भारत में 3,500 से ज़्यादा प्लाईवुड फ़ैक्टरियाँ हैं, जिनमें से ज़्यादातर SSI इकाइयाँ हैं और कुछ इकाइयाँ मध्यम स्तर की हैं। ये सभी फ़ैक्टरियाँ अनुभवी तकनीशियनों द्वारा चलाई जाती हैं।

हालाँकि, कई फ़ैक्टरियों में प्लाईवुड तकनीक के इंजीनियर या प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। फ़ैक्टरी में तकनीकी काम करने वाले प्रायः सभी लोग या तो “गुरु-शिष्य परंपरा” के ज़रिए या फिर स्वयं मशीन में काम करते हुए या किसी प्रक्रिया को लगातार करते हुए सीखे हुए हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि तकनीकी काम सीखने का यह एक अच्छा तरीका है और इसी तरह एक कर्मचारी ऑपरेटर बनता है और एक ऑपरेटर सुपरवाइज़र या फोरमैन बनता है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है, कि किसी भी समस्या का समाधान वरिष्ठ तकनीशियन के अनुभव से होता है, न कि तकनीक के मूल सिद्धांतों से।

सिर्फ़ अनुभवी तकनीकी कर्मियों द्वारा (वगैर किसी वैज्ञानिक सिधांतों के ज्ञान से) प्रक्रिया और फ़ैक्टरी को चलाने के कुछ फ़ायदे हैं लेकिन कुछ नुकसान भी हैं। अनुभवी कर्मचारी चल रही प्रक्रिया को बहुत अच्छी तरह से चलाते हैं, लेकिन चल रही प्रक्रिया में कोई भी बदलाव या विकास स्वीकार करने में अनिच्छुक होते हैं, जो उनके अनुभव के क्षेत्र से बाहर हो।यह प्रवृत्ति अक्सर फ़ैक्टरी के विकास में बाधा बनती है। अनुभव बताते है कि कई सुपरवाइजर किसी भी आरएंडडी (नई विचार धारा या प्रक्रिया) के कार्यान्वयन के खिलाफ खड़े रहते हैं और खुद को अपनी सीखी सिखाई विधियों की सीमाओं के भीतर सीमित रखने की कोशिश करते हैं।

लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि प्लाईवुड तकनीक, के अलावा, कारखाने में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनरी, मशीनरी के रखरखाव और उत्पादन में समस्याओं के संबंध में समस्या निवारण पर एक पुस्तिका की कमी है। कारखाने में प्रबंधकों और फोरमैन के लिए एक संदर्भ या पुस्तिका बहुत जरूरी है।

यह पुस्तक किसी प्रक्रिया या मशीन को चलाने और उत्पादन के दौरान आने वाली किसी भी समस्या को हल करने के लिए जानकारी या ज्ञान प्रदान करेगी। यह पुस्तक प्लाईवुड निर्माण से जुड़े प्रबंधकों, ऑपरेटरों, सुपरवाइजरों और अन्य तकनीशियनों के लिए एक आंख खोलने वाली पुस्तक होगी।

उत्पाद बनाने की हर प्रक्रिया के लिए, हर किसी को यह पता होना चाहिए कि

“हम क्या करने जा रहे हैं”,

 “हम ऐसा क्यों कर रहे हैं”,

 “इस प्रक्रिया का परिणाम क्या है” और

“चीजों को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।”

यह पुस्तक प्रक्रिया और इसे पूर्णता के साथ करने के तरीके के बारे में सभी बुनियादी जानकारी प्रदान करेगी। प्रक्रिया की मूल बातें जानने और फिर उसे अर्जित अनुभव के साथ मिलाने से, एक ऑपरेटर या पर्यवेक्षक अपना काम बेहतर ढंग से करने में सक्षम होगा और तकनीक में भी सुधार करेगा।

पुस्तक कई प्रक्रियाओं और मशीनरी की परिचालन तकनीकों का फ्लोचार्ट प्रदान करती है। यह नौसिखियों के साथ साथ अनुभवी लोगों को प्लाईवुड बनाने में किसी भी प्रक्रिया को अपनाने में मदद करेगी। पुस्तक प्लाईवुड बनाने में उपयोग की जाने वाली मशीनों का संक्षिप्त विवरण देती है, जो मशीनों को समझने, छोटी-मोटी मरम्मत करने और मशीनरी को संचालित करने में मदद करेगी। सभी प्रक्रियाओं को चरणों में वर्णित किया गया है ताकि कोई भी आसानी से समझ सके कि प्रक्रिया को कैसे शुरू और मॉनिटर किया जाए। पुस्तक में भारत में प्रचलित वर्तमान प्लाईवुड निर्माण प्रथाओं के संदर्भ में प्लाईवुड के निर्माण में प्रमुख प्रक्रियाओं को संचालित करने या निष्पादित करने के व्यावहारिक तरीके शामिल हैं।

इसके अलावा, प्रक्रिया में उन्नयन की आवश्यकता और ऐसा करने के तरीके का वर्णन किया गया है।

इस पुस्तक में दी गई तकनीक एक मध्यम भारतीय प्लाईवुड कारखाने के बुनियादी ढांचे और प्लाईवुड निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामान्य प्रक्रियाओं पर आधारित है। इस पुस्तक में वर्णित प्रक्रियाओं का पालन करके, एक प्रशिक्षु भी आसानी से प्रक्रिया को अपना सकता है और इसे निष्पादित कर सकता है।