एक वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी मेहनत से पाई गई आर्थिक स्थिरता, जिसने भारत को कई अन्य राष्ट्रों के मुकाबले तेजी से पुनर्वास की मार्ग पर पहुंचा दिया, उसे फीका नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि अर्थव्यवस्था भविष्य में वृद्धि की ओर टिकाऊ तरीके से बने रहने की संभावना है।

‘‘भारत भविष्य में विकास को अपनी पूर्णता के साथ सुधारने की दिशा में दृढ रूप से जा रहा है। फिर भी, यह समय उपलब्धि पर आराम करने और अर्जित आर्थिक स्थिरता को खतरे में डालने का नहीं है,‘‘ वित्त मंत्रालय की FY2023 की ‘‘वार्षिक आर्थिक समीक्षा‘‘ कहती है।

आर्थिक मामलों की विभाग (डीईए) जो वार्षिक बजट तैयार करता है, की दी गई चेतावनी, एक पूर्व-चुनावी वर्ष में महत्वपूर्ण है, जब सरकार आर्थिक नियंत्रणों को धीरे-धीरे कम करने और ताज़ा योजनाएँ घोषित करने की प्रवृत्ति रख सकती हैं।

समीक्षा में यह भी कहा गया है कि शहरी मांग के मज़बूत रहने और ग्रामीण मांग के पुनरूद्धार की राह पर होने के बावजूद, भूगर्भिय तनाव के बढ़ने और एल नीनो के प्रभाव से आर्थिक वर्ष के शेष भाग में वृ़द्धि में चिुनौती का सामना कर सकते हैं।

‘‘मज़बूत बैलेंस शीट्स और डिजिटल उन्नति से बेहतर वित्तीय फैसले हो सकते हैं, जोे भारत को वित्तीय चक्र में बुरे ऋण की चुनौती का सामना करने से पहले लंबे समय तक टिका सकता है,‘‘ रिपोर्ट में कहा गया है।

डीईए के अनुसार, विकास की गति को प्रतिबन्धित करने वाले कारकों में भूगर्भिय तनाव और वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में अस्थिरता, वैश्विक शेयर बाजारों में तीव्र परिवर्त्तन, एल नीनो का गहरा प्रभाव और कम वैदेशिक व्यापार गतिविधि और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आवृत्ति में हो सकते हैं।

‘‘यदि ये कारक अगले क्वार्टर में गहरे होकर विकास बाधित करते हैं, तो भारत के बाहरी क्षेत्र FY 2024 में विकास को चुनौती दे सकते हैं,‘‘ इसमें जोड़ा गया।

भारत के ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) ने मार्च तिमाही में 6.1 प्रतिशत तक विकास की गति पकड़ी, जिससे वर्ष 2023 में विकास की दर को 7 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया।