हमारा उद्देश्य प्लाइवुड और लेमिनेट व्यापारियों की समस्याओं को समाधान करने के साथ साथ उनमें जागरूकता लाना भी है

ऑल भारत प्लाइवुड और लेमिनेट ट्रेडर्स एसोसिएशन के गठन की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

काफी समय से यह महसूस किया जा रहा था कि एक अखिल भारतीय स्तर पर संगठन होना चाहिए। जिसमें व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने में तो मदद मिले ही, इसके साथ ही कैसे वह बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं, इस पर भी जागरूक किया जाए। इसी सोच को सामने रखते हुए एसोसिसशन का गठन किया गया है।

आल भारत प्लाईवुड और लेमिनेट ट्रेडर्स एसोसिएशन नाम का चयन कैसे किया गया?

नाम चयन करने में कार्यकारी समिति में कई सुझाव आए थे। कुछ सदस्यों का भारत की जगह इंडिया पर अधिक झुकाव था। क्योंकि यह प्रचलन में है। इस संगठन का उद्धेश्य भारत के प्रत्येक कोने को समाहित करना है। अतः इसमें स्वदेशी की भावना का विस्तार के उद्धेश्य को ध्यान में रखकर अंततः भारत शब्द का चयन किया गया। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि एसोसिएशन का दफ्तर मध्य भारत में ऐसी जगह, जहां सबकी आसान पहुंच हो, होना चाहिए। इसलिए सबकी सहमति से कार्यालय नागपुर में रहेगा।

देश भर में एसोसिसएशन के सदस्य बने, इसे लेकर क्या रणनीति है?

हम ज्यादा से ज्यादा व्यापारिक संगठनों से संपर्क करेंगे। जिस शहर या प्रदेश में एसोसिएशन सक्रिय नहीं है, उन्हें सक्रिय करेंगे। इसका संदेश देश भर में प्रचारित करेंगे कि सारी ट्रेड एसोसिएशन हमारे साथ जुड़े। किसी को कोई भी मदद चाहिए, जिसमें बीआईएस, जीएसटी जैसे कानूनी मसले हों, या किसी कंपनी से विवाद हो या फिर परिवहन की दिक्कत हो, हम सभी दिक्कतों को दूर करने में यथासंभव सहयोग करेंगे।

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क्या किसी एक मुद्दे को मुख्य बना कर एसोसिएशन को मजबूत किया जा सकता है?

यह ठीक है। लेकिन हम हर तरह की समस्याओं पर बात करेंगे। क्योंकि अभी शुरूआत है। इसलिए हम सभी को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम हर तरह की समस्याओं के निवारण की दिशा में काम करेंगे। क्योंकि देश भर में इस व्यापार से जुड़े लोगों को कई और तरह तरह की दिक्कत आ रही है। इन्हें सुलझाने में एसोसिएशन उनके लिए क्या कर सकती है, इसके उपर ध्यान केंद्रित करना हमारा मुख्य उद्देश्य रहेगा।

अभी फौरी तौर पर क्या दिक्कत महसूस कर रहे हैं?

कई बार व्यापारी को पता ही नहीं होता कि किसी प्रचलित ब्रांड से मिलते जुलते नाम से बेचना भी अपराध की श्रेणी में आता है। वह तो इसी भ्रम में रहता है की राम से पहले सीता लगा है तो यह एक नया नाम सीताराम है। जबकि शायद भारतीय कानून के अनुसार राम अगर रजिस्टर्ड है, तो उसके आगे पीछे कुछ लगाकर एक जैसा उत्पाद बेचा नहीं जा सकता। हालांकि इसमें शायद राम जैसे ब्रांड की जिम्मेवारी भी बनती है, कि वह इस तरह की बाजार में प्रचलित अवधारणाओं की कानूनी जानकारी प्रचारित करें, ताकि सभी व्यापारी सजग रहे।

इसका क्या हल आप के अनुसार हो सकता है?

कई सारे ऐसे मसले हैं, जो सालों से नियमित तौर पर चले आ रहे हैं, जो धीरे-धीरे जनमानस में सामान्य होते चले जाते हैं। इनका स्वरूप इतना व्यापक और एकात्म हो जाता है कि आमतौर पर उसे समाज गलत या गैरकानूनी ही नहीं समझता। जबकि कानूनन वह गलत होते हैं। इसलिए नैतिक और अनैतिकता के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है।

व्यापार और भारतीय प्रशासन के बदलते हुए स्वरूप में, इसे सभी व्यापारियों को समझना बहुत आवश्यक है।

हालांकि सारे व्यापारी समाज को जागृत करना एक बहुत चुनौती पूर्ण कार्य है, लेकिन हमने इसे करने का बीड़ा उठाया है। उम्मीद है कि हमें संपूर्ण भारत के ट्रेड एसोसिएशन से जितना सहयोग मिलेगा, उतना ही उद्योगपतियों से भी मिलेगा।


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