आयकर में फर्जी दावों द्वारा बड़े रिफंड वालो पर कार्यवाई
- सितम्बर 13, 2025
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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार, पिछले चार महीनों में लगभग 40,000 करदाताओं ने अपने आयकर (आईटीआर) रिटर्न में संशोधन किया है और फर्जी कटौतियों और छूटों पर आयकर विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई के बाद 1,045 करोड़ रुपये के फर्जी दावे वापस लिए हैं।
सीबीडीटी ने देश भर में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान शुरू किया, जिसमें आयकर रिटर्न (आईटीआर) में कटौतियों और छूटों के फर्जी दावों को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर लाभों के दुरुपयोग के विस्तृत विश्लेषण के बाद की गई है, जो अक्सर पेशेवर बिचौलियों की मिलीभगत से किया जाता है।
सीबीडीटी ने एक बयान में कहा, ‘‘जांच में कुछ आईटीआर तैयार करने वालों और बिचौलियों द्वारा संचालित संगठित रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो कमीसन के बदलने में फर्जी कटौतियों और छूटों का दावा करते हुए रिटर्न दाखिल कर रहे थे। इन धोखाधड़ी वाली फाइलिंग में लाभकारी प्रावधानों का दुरुपयोग शामिल है, यहाँ तक कि कुछ लोग अत्यधिक रिफंड का दावा करने के लिए झूठे टीडीएस रिटर्न भी दाखिल करते हैं।‘‘
ये रैकेट अक्सर अस्थायी ईमेल आईडी का उपयोग करके रिटर्न दाखिल करते हैं, जिन्हें बाद में बंद कर दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप आधिकारिक नोटिस बिना पढ़े रह जाते हैं।
कर विभाग के विश्लेषण से धारा 10(13ए), 8OGGC, 8OE, 8OD, 8OEE, 8OEEB, 8OG, 8GGA और 8DDB के तहत कटौतियों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता चलता है।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश में हाल ही में की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाइयों से इन निष्कर्षों की पुष्टि होती है, जहाँ विभिन्न समूहों और संस्थाओं द्वारा धोखाधड़ी के दावों के सबूत पाए गए।
विभाग ने धोखाधड़ी के दावे जारी रखने वालों के खिलाफ, जहाँ भी लागू हो, दंड और अभियोजन सहित कड़े उपायों की चेतावनी दी है।
करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी आय और संपर्क विवरण का सही विवरण दर्ज करें, तथा अनुचित रिफंड का वादा करने वाले एजेंटों या बिचौलियों के झांसे में न आएं।
बड़ी कटौतियों जैसे कि धर्मार्थ संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों या राजनीतिक दलों को बढ़ा-चढ़ाकर दान देना, या मकान किराया भत्ता (I-T) के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने वाले आयकरदाताओं पर आयकर विभाग ने ऐसी गतिविधियों की जाँच कड़ी कर दी है।
सरकार करदाताओं के साथ विश्वास की नीति अपना रही है। कर रिटर्न अब कागज़ रहित हैं, और लोगों को भरते समय छूट और कटौती के प्रमाण संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, रिटर्न जल्दी संसाधित होते हैं, और रिफंड भी जल्दी मिलता है।
लेकिन करदाताओं पर भरोसा करने की सरकार की नीति कुछ बेईमान तत्वों द्वारा कर प्रणाली का दुरुपयोग करने के कारण उल्टी पड़ गई है।
कर विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन प्रथाओं को अब आसानी से पकड़ा जा सकता है। कर विभाग के पास नए उपकरण हैं, वे बैंकों, नियोक्ताओं और अन्य स्थानों से डेटा का उपयोग करते हैं। वे किसी भी असामान्य चीज़ का पता लगाने के लिए उन्नत सॉफ़्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भी उपयोग करते हैं। यदि छोटे दावे किसी व्यक्ति की आय या जीवनशैली से मेल नहीं खाते हैं, तो उन पर भी सवाल उठाया जा सकता है।
कर विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने किसी भी दावे के लिए उचित दस्तावेज़ रखें, जैसे कि एचआरए के बिल, अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) यात्रा टिकट, या दान की रसीदें। 10,000 रुपये का फर्जी दावा मुसीबत का सबब बन सकता है, लोगों को जुर्माना, ब्याज देना पड़ सकता है, या गंभीर मामलों में अदालती मामलों का भी सामना करना पड़ सकता है।
यदि विभाग को कोई झूठा दावा मिलता है, तो करदाताओं को अस्वीकृत दावे की राशि पर कर चुकाना पड़ सकता है, साथ ही कर का भुगतान होने तक 1 प्रतिशत प्रति माह ब्याज भी देना पड सकता है। इसके अलावा, गलत तरीके से बचाए गए कर का 50 प्रतिशत से 200 प्रतिशत तक जुर्माना भी लग सकता है - फर्जी दावों पर 200 प्रतिशत तक का जुर्माना लगता है।
सीबीडीटी ने करदाताओं को चेतावनी दी है कि वे झूठे दावों के ज़रिए बड़े रिफंड का वादा करने वाले एजेंटों पर भरोसा न करें और ईमानदारी से रिटर्न दाखिल करें।
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