केंद्रीय बैंक ने अपने नवीनतम बयान में कहा है कि उत्पादकता बढ़ाने वाले संरचनात्मक सुधारों, निवेशों और ‘‘उत्साही‘‘ घरेलू खपत पर नॉर्थ ब्लॉक के अटूट फोकस से समर्थित भारतीय अर्थव्यवस्था, देश से परे विकास संबंधी चिंताओं के बावजूद पहले के अनुमान की तुलना में तीसरी तिमाही में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा, ‘‘सरकार के बुनियादी ढांचे पर खर्च, निजी पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी, स्वचालन, डिजिटलीकरण और स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलने से निवेश मांग लचीली प्रतीत होती है।‘‘

वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसके माध्यम से आरबीआई को अर्थव्यवस्था में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। कई वैश्विक आर्थिक थिंक-टैंकों को उम्मीद है कि भारत इस साल और अगले साल तक विकास का चालक बना रहेगा, हालांकि वैश्विक व्यापार काफी अस्थिर बना हुआ है, जिससे कई प्रतिस्पर्धी उच्च-विकास अर्थव्यवस्थाओं के लिए विस्तार में चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

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आरबीआई बुलेटिन में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2023 की अंतिम तिमाही में धीमी होने के संकेत दे रही है। इसके विपरीत, हालांकि, भारत में तीसरी तिमाही के जीएसपी में विस्तार की गति क्रमिक रूप से तेज होनी चाहिए।

आरबीआई ने कहा कि शहरी इलाकों में पूरे सीजन में मजबूत मांग रही है, खासकर मध्य और प्रीमियम सेगमेंट में। हालाँकि, एंट्री-लेवल सेगमेंट की मांग अपेक्षाकृत कम है क्योंकि ‘‘प्रीमियमाइज़ेशन‘‘ की सुसंगत प्रवृत्ति विकसित होने के स्पष्ट संकेत दिख रहे है।

 आरबीआई बुलेटिन में कहा गया है, ‘‘समष्टि आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों को मजबूत करने और निरंतर संरचनात्मक सुधारों पर नीतिगत फोकस ने भारत को विकास परिणामों के मामले में विशिष्ट बना दिया है।‘‘

आरबीआई ने कहा कि हालांकि विकास पटरी पर है, मुद्रास्फीति नरमी की राह पर है, लेकिन उपभोक्ता मूल्य तय लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है। मुख्य मुद्रास्फीति, आवर्ती और अतिव्यापी खाद्य कीमतों के झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है।

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