उद्योग जगत और निवेशकों के बीच पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण भारतीय रियल एस्टेट बाजार में पर्यावरण के अनुकूल मकान बनाने का चलन बढ़ रहा है। वे वैश्विक मानदंडों का अनुपालन करने और अपने कर्मचारियों को स्वस्थ कार्यस्थल प्रदान करने के लिए अधिक खर्च करने के लिए भी तैयार हैं।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत के ऑफिस रियल एस्टेट बाजार में पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं पर काफी जोर दिख रहा है। यही कारण है कि ग्रीन ऑफिस के स्टॉक में 2016 के मुकाबले 83 फीसदी की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में 2016 के बाद की अवधि पर गौर किया गया है क्योंकि मकान खरीदारों के हितों की रक्षा करने और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2016 को उसी साल लागू किया गया था।

साल 2010 के बाद प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग की संख्या में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के कुल ग्रेड ए ऑफिस स्टॉक का 61 फीसदी प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग है।

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भारत ग्लोबल वार्मिंग के कारण भूस्खलन, बेमौसम बारिश, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाना न केवल एक विकल्प बल्कि आवश्यकता हो गई है। यही कारण है कि रियल एस्टेट क्षेत्र अपनी परियोजनाओं के विभिन्न चरणों में पर्यावरण के अनुकूल समाधानों को अपनाने पर जोर दे रहा है।

बायोफिलिक स्पेस पारंपरिक कार्यस्थलों के मुकाबले कई मायनों में लाभप्रद हैं। डिजाइन एवं नवाचार के लिहाज से बायोफिलिक स्पेस कम कार्बन उत्सर्जन के साथ कामकाज के लिए एक स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराता है। दूसरी ओर, ग्रीन वर्कस्पेस के किराये भी अधिक होते हैं।

आगे चलकर सभी वाणिज्यिक स्पेस ऐसे डिजाइन के साथ बायोफिलिक होगें जो कामकाजी लोगों की सेहत और जीवनशैली को बेहतर करने में मददगार होंगे। इन कार्यस्थल में पेड़-पौधे, धूप और बारिश जैसे प्राकृतिक तत्वों को समाहित करने का खास ध्यान रखा जाएगा ताकि मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई बढ़ने न पाए।

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