FEAR AND CHEER ON BJP’S VICTORY

वर्तमान भारतीय कारोबारी जगत का विरोधाभास यह है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी जीतों पर शेयर बाजार में अत्यंत प्रसन्नता का माहौल है जबकि कई कारोबारी सरकार को लेकर सशंकित भी हैं।

परंतु शेयर बाजार के व्यवहार में डर नहीं केवल उम्मीद नजर आती है। यह बात संस्थागत विदेशी निवेशकों और घरेलू निवेशकों, दोनों के उत्साह से समझी जा सकती है।

अक्सर यह सुनने में आता है कि कारोबारी अगली गर्मियों के आम चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी सरकार की वापसी चाहते हैं लेकिन एक अल्पमत सरकार के रूप में ताकि गठबंधन साझेदारों का दबाव बना रहे और कोई अति महत्त्वाकांक्षी कदम न उठाया जाए।

कई भारतीय कारोबारी वैश्वीकरण के हिमायती नहीं रहे। इसके बावजूद अधिकतर कारोबारी मोदी सरकार को तरजीह देते हैं क्योंकि उसने कारोबारियों के अनुकूल कई कदम उठाए हैं। कार्पोरेट कर दर में कमी की गई है, घरेलू उत्पादकों को आयात प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध टैरिफ और गैर टैरिफ संरक्षण दिया जा रहा है। अप्रत्यक्ष कर को लेकर सुधार किया गया है, निवेश के लिए सब्सिडी दी जा रही है और उत्पादन बढ़ाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अधोसंरचना में भी सुधार हुआ है तो आखिर आलोचना किस बात की हो?

कारोबारियों को लगता है कि मोदी सरकार स्थिरता और निरंतरता प्रदान करती है। कोई नहीं चाहता कि अतीत की गठबंधन सरकारों जैसा अफरातफरी वाला माहौल बने या फिर मनमोहन सिंह के कार्यकाल की तरह नीतिगत पंगुता नजर आए। कर को लेकर आतंक के मामले में हालात कांग्रेस के कार्यकाल से बेहतर हुए हैं या नहीं इस पर अवश्य बहस हो सकती है। लेकिन एक अन्य कारक भी है।

फिलहाल कांग्रेस की ओर से मुख्य रूप से कल्याण योजनाओं और निःशुल्क उपहारों का ही संदेश सामने आता है, जो राजकोषीय मोर्चे पर गैर जवाबदेह है। पार्टी कोई कारोबार समर्थक संदेश नहीं देती।

मुद्दा यह है कारोबारी समृद्धि चाहते हैं और उन्हें अनिश्चितता कम करने की आवश्यकता है जिसमें जोखिम है।