मोबाइल फोन रिटेलर्स ने बिना डाउन पेमेंट वाली लोकप्रिय फाइनेंसिंग स्कीम को खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी सभी खरीदों में से 10-12 प्रतिशत धोखाधड़ी वाली होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय घाटा होता हैं, ग्रे मार्केट की बिक्री में वृद्धि होती हैं और रिटेलर्स को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसीएस) द्वारा प्रतिबंधित कर दिया जाता हैं।

इस तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए लोन लेने की प्रक्रिया के वक्त बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ-साथ ग्राहकों को हैंडसेट सौंपने के दस्तावेजी सबूत के साथ ओपन-बॉक्स डिलीवरी को लागू करने की भी मांग की गई है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, फाइनेंसिंग स्कीम हाई-एंड स्मार्टफोन खरीदने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक है, जिसमें 2023 में खरीदे गए तीन में से एक हैंडसेट मासिक किस्तों पर खरीदा गया है।

हालाँकि, इन लंबी अवधि की मासिक किस्त योजनाओं में खासी गड़बड़ी देखने को मिली है।

रिटेलर्स ने विशेष रूप से एपल आई फोन पर शून्य डाउन पेमेंट वाली 24 महीने की लंबी किस्त योजनाओं में इस तरह की गड़बड़ी की संभावना ज्यादा रहने की संभवना जताई है।

क्या हो रहा है?

  • आसान कर्ज लेने वालों को धोखेबाज फाइनेंसिंग के माध्यम से फ़ोन खरीदवाते हैं
  • फिर इन फ़ोनों को कम कीमत पर बेच दिया जाता है
  • इस तरह के फोन के खरीददार बाद में उन्हें ग्रे मार्केट में फिर से बेच देते हैं
  • एक अवधि के बाद, खरीदार झूठा दावा करते हैं कि उन्हें कभी मोबाइल मिला ही नहीं था।
  • इससे तरह से वह कर्ज लौटाने से बचने की कोशिश करते हैं।

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