Global Timber Market under Pressure Due to Price Surge

वैश्विक लकड़ी (वुड) बाजार इन दिनों भारी दबाव में है। लगातार बढ़ती मांग, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट और बढ़े हुए टैरिफ के चलते लंबर (सागौन व अन्य प्रोसेस्ड लकड़ी) की कीमतों में तेज़ी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात अगर लंबे समय तक बने रहे, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्नीचर, निर्माण और पैकेजिंग उद्योगों पर सीधा असर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने हाल ही में यूरोपीय देशों से आने वाली लंबर पर आयात शुल्क बढ़ा दिए हैं। इस कदम का सबसे ज्यादा असर जर्मनी के लकड़ी उद्योग पर पड़ रहा है। जर्मनी ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी टैरिफ न केवल उसकी घरेलू लकड़ी कंपनियों को नुकसान पहुंचाएंगे, बल्कि इससे वैश्विक बाजार में असंतुलन और भी गहरा सकता है।

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लकड़ी की कीमतों में बढ़ोतरी का एक और कारण है दृ रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोप में सप्लाई नेटवर्क का बाधित होना। युद्ध की वजह से कई यूरोपीय देशों को लकड़ी और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात-आयात में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। साथ ही, एशियाई देशों जैसे चीन और भारत की ओर से बढ़ती मांग ने बाजार की स्थिति को और कठिन बना दिया है।

भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। यहां निर्माण और फर्नीचर उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर लकड़ी की कीमतों में वृद्धि से लागत बढ़ने की आशंका है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर दिखेगा, जब फर्नीचर और हाउसिंग की कीमतें और महंगी हो जाएंगी।

अभी के हालात बताते हैं कि लंबर की कीमतें निकट भविष्य में और ऊपर जा सकती हैं। अगर वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव और सप्लाई में रुकावट नहीं सुलझी, तो यह संकट लंबे समय तक उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित करता रहेगा।


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