कैसे बढ़े भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में आत्म विश्वास
- मई 8, 2025
- 0
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिन शुल्कों का ऐलान किया है दुनिया में कितनी उथल-पुथल मचा सकते हैं इसका पता तुरंत नहीं चलेगा और शुल्कों का असर शायद साल भर बाद ही दिख सकेगा। झटका उन देशों को भी लगेगा, जो अमेरिका के साथ ज्यादा व्यापार नहीं करते। उसकी वजह यह है कि विनिर्माण करने वाले देश खास कर चीन अमेरिकी बाजार से हटने पर कमी की भरपाई के लिए दूसरे देशों में बाजार तलाशेंगे।
टंªप का लक्ष्य एकदम साफ है - शुल्क लगाकर विनिर्माण को वापस अमेरिका लाना तथा देश का औद्योगिक आधार मजबूत करना।
सच कहें तो अब दुनिया भर के देशों को देखना चाहिए कि उनका विनिर्माण (और सेवा) नए आर्थिक दौर में कितनी होड़ कर सकता है।
मजबूत विनिर्माण क्षमता के कारण ही चीन दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बना है। भारत ने भी कम लागत एवं ऊंची गुणवत्ता वाली विनिर्माण गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनने के प्रयास किए हैं मगर कामयाबी नहीं मिली हैं। भारत के साथ दिक्कत यह रही है कि विभिन्न सरकारांे ने दशकों से कई कार्यक्रम चलाए फिर भी ज्यादातर उद्योगों में हमारी विनिर्माण क्षमता दुनिया से होड़ नहीं कर पाती है।
भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि देश के भीतर निजी खपत की वजह से ज्यादा आई है और निर्यात की वजह से कम।
दुनिया भर की विनिर्माण कंपनियों के लिए यहां बहुत बड़ा बाजार होने के बावजूद भारत किसी भी क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण की बड़ी ताकत क्यों नहीं बन पाया है?
इस नाकामी का दोश भारत में (केंद्र और राज्य की) सरकारों को भी दिया जा सकता है और भारतीय कंपनियों को भी, जिनमें न तो आकार बढ़ाने की तमन्ना है और न ही वैश्विक महत्त्वाकंक्षा।
बड़ी भारतीय कंपनियों ने दुनिया भर में होड़ करने और छाने के बजाय देश के भीतर ही उत्पाद बेचने तथा अपना देसी बाजार बढ़ाने का आसान रास्ता चुन लिया।
यही कारण है कि हमारे पास कई क्षेत्रों में दखल रखने वाले वैश्विक स्तर के विनिर्माता हैं मगर निर्यात में ताकत बनने के बजाय उन्होनें देसी उपभोक्ताओें पर ही जोर दिया है उनका तर्क उचित भी है कि अगर विदेशी उत्पादक भारतीय बाजार में प्रवेश पाने की कोशिष में लगे है तो भारतीय उत्पादक इस मौके का फायदा क्योंना उठाएं।
नारों एवं घोषणाओं के बावजूद भारत में विनिर्माण की राह अभी भी आसान नहीं है। जमीन अधिग्रहण से लेकर तमाम मंजूरियां हासिल करने में लगने वाले वक्त से लेकर माल ढुलाई (लॉजिस्टिक) की लागत और कर विवाद आदि के कारण भारत देसी-विदेशी विनिर्माण कंपनियों के लिए सही जगह नहीं बन पाया है।
केंद्र एवं राज्य सरकारों को साथ मिलकर उन सभी समस्याओं का समाधान खोजना होगा, जो उनके वष में हैं और जो स्वदेशी उत्पादकों का आत्मविश्वास बढ़ाएं।
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298592, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us