पश्चिम एशिया संकट का उद्योग पर असर
- मार्च 10, 2026
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पश्चिम एशियाई युद्ध का असर भारतीय उद्योग पर साफ दिख रहा है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के मुताबिक, लगभग 40,000-45,000 भारतीय कंटेनर फिलहाल या तो रास्ते में फंसे हुए हैं या अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर अटके हुए हैं।
इसके अलावा, शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाए गए कई आकस्मिक शुल्कों के कारण प्रति कंटेनर लागत में तीन से पांच गुने तक की वृद्धि हो रही है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी कारणों से लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे कंटेनर संकट की स्थिति पैदा हो सकती है
एक फ्रेट फॉरवर्डर के अनुसार, बीमाकर्ताओं द्वारा युद्ध जोखिम कवर को रद्द करना भी उद्योग के लिए एक समस्या बन गया है।
यदि संकट लंबा चलता है तो इस संकट के कारण माल ढुलाई की मूल दरों में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है।
हालांकि, भारत सरकार ने कंपनियों को आश्वासन दिया है कि वह पश्चिम एशिया से एलएनजी आपूर्ति में कमी से धीरे-धीरे निपटने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है, ताकि युद्ध लंबा चलने पर भी उत्पादन में कोई बाधा खड़ी न हो।
जहां तक एलएनजी का सवाल है, तो 60 प्रतिशत आयात में से अधिकांश कतर से आता है, जिसने युद्ध के कारण अब आपूर्ति रोक दी है। प्राकृतिक गैस को ठंडा कर एलएनजी में बदला जाता है। इससे इसकी मात्रा कम हो जाती है और इसे दूरदराज ले जाने में आसानी हो जाती है। बंदरगाहों पर पहुंचने पर एलएनजी को उर्वरक, बिजली, सिटी गैस और अन्य उद्योगों में उपयोग के लिए रिगैसिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए गैस में परिवर्तित किया जाता है।
सूत्रों ने कहा कि यूरिया बनाने में लगभग 80 प्रतिशत कच्चा माल गैस है। गैस आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट से भारत में यूरिया का घरेलू उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है और आयात पर इसकी निर्भरता बढ़ जाएगी।
संकट शुरू होने के एक सप्ताह बाद से ही वेस्ट एशिया में यूरिया की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति टन बढ़कर लगभग 600 डॉलर प्रति टन हो गई हैं।
- कच्चा तेल-$80 से बढ़कर $120 प्रति बैरल हो गया हैं।
- रू 80 ज्ञह वाला फेनोल रू 120 तक पहुंच गया है।
- फेस विनीयर की लागत दो रूपये तक महंगी हो गई है।
पश्चिम एशिया के मौजूदा युद्ध का उद्योग पर गंभीर असर पड़ा है। जब आसपास लड़ाई छिड़ी हो तो भले ही कोई इसमें सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन उस पर असर अवश्य पड़ता है।
उद्योग विशेष्ज्ञों के मुताबित वर्ष 2026 का पूरा साल विभिन्न वैश्विक घटना-दुर्घटनाओं भरा रह सकता हैं। जिससे कीमतें अस्थिर रहेंगी और इसलिए व्यापार भी।
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