मजबूत मांग और तेज़ कीमत बढ़ोतरी के चलते लग्ज़री आवास, किफायती घरों की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक निवेश विकल्प बनकर उभरे हैं। जहाँ ₹40 लाख से कम कीमत वाले किफायती घरों की कीमतों में पिछले तीन वर्षों में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं ₹1.5 करोड़ या उससे अधिक कीमत वाले लग्ज़री घरों ने इसी अवधि में करीब 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया।

एनारॉक के अनुसार, भारत के शीर्ष सात रियल एस्टेट बाजारों में लग्ज़री घरों की कीमतें 2022 में ₹14,530 प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2025 में ₹20,300 प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गईं। इसके विपरीत, किफायती आवास की कीमतों में अपेक्षाकृत सीमित बढ़ोतरी हुई और वे 2022 में ₹4,220 प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2025 में ₹5,299 प्रति वर्ग फुट रहीं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतर का मुख्य कारण प्राइम लोकेशन में बड़े घरों की लगातार बनी हुई मांग है, खासकर प्रतिष्ठित और ब्रांडेड डेवलपर्स द्वारा विकसित परियोजनाओं में। साथ ही, निर्माण सामग्री, श्रम लागत और जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है, जिससे किफायती आवास परियोजनाएँ, विशेषकर मेट्रो तथा टियर-प् और टियर-प्प् शहरों में, कम लाभकारी होती जा रही हैं।

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लग्ज़री सेगमेंट में सबसे अधिक कीमत वृद्धि दिल्ली-एनसीआर में दर्ज की गई, जहाँ पिछले तीन वर्षों में कीमतें 72 प्रतिशत बढ़ीं। इसके बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (43 प्रतिशत) और हैदराबाद (41 प्रतिशत) का स्थान रहा। ₹40 लाख से ₹1.5 करोड़ की कीमत वाले मिड-रेंज और प्रीमियम घरों की औसत कीमतों में भी 39 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह सेगमेंट भी निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।

कुल मिलाकर, महामारी के बाद खरीदारों की प्राथमिकता प्रतिष्ठित डेवलपर्स, बड़े घरों और प्रीमियम लोकेशनों की ओर झुक गई है। यही कारण है कि मिड और लग्ज़री आवास सेगमेंट में मांग मजबूत बनी हुई है और ये रियल एस्टेट निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं।


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