ऑनलाइन भुगतानों तक तत्काल पहुँच अब एक सामान्य बात हो गई है। लेकिन जब करों की बात आती है, तो व्यवसाय अभी भी तत्काल भुगतान की पुष्टि प्राप्त करने के लिए संघर्षरत हैं। इससे अक्षमताएँ पैदा हो रही है, जो व्यवसाय में विश्वास को कमजोर कर रही हैं।

यह समस्या जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में और भी अधिक स्पष्ट है, जहाँ असीमित संख्या में ट्रान्जेक्सन होते है। अगर हम 10 लाख के बिल पर 11.80 लाख (1.80 लाख जीएसटी सहित) का भुगतान करने वाले खरीदार पर विचार करें, तो खरीदार को आईटीसी का दावा करने के लिए तब तक इंतजार करना होगा, जब तक विक्रेता जीएसटी जमा नहीं कर देता और रिटर्न दाखिल नहीं कर देता। यदि किसी वजह से, जानबुझकर या अनजाने में, विक्रेता चूक करता है, तो खरीदार को अपनी राशि के लिए इंतजार करना पड़ता है, और तत्कालिक तौर पर विक्रेता को जीएसटी राशि बतौर ब्याज मुक्त ऋण मिल जाती है।

यह समस्या सभी के लिए आम है। बड़े या होशियार खरीदार अक्सर तब तक भुगतान करने का इंतजार करते हैं, जब तक कि उनके पोर्टल में आईटीसी दिखाई न दे। अन्य खरीदारों को यह जाँचने में इंतजार करना पड़ सकता है कि आपूर्तिकर्ता का पोर्टल कर अनुपालन कर रहे हैं या नहीं। दोनों परिदृश्य व्यवसाय के विकास को रोकते हैं और लागत बढ़ाते हैं।

एक ऐसी प्रणाली जो खरीदारों को भुगतान के समय सीधे सरकार को तत्काल क्रेडिट के साथ, करों का भुगतान करने की अनुमति दे, दोनों पक्षों के लिए गेम-चेंजर होगी। इससे लेन-देन में भरोसा बढ़ेगा, कर अनुपालन में सुधार होगा और कर संग्रह में तेजी आएगी।

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इसके अतिरिक्त, खरीदार द्वारा सीधे सरकार को कर देने वाली व्यवस्था, अर्थव्यवस्था की लेन-देन दक्षता में सुधार करके कर राजस्व में भी वृद्धि करेगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अर्थव्यवस्था को और अधिक गतिशील बनाएगा।

बेशक, ऐसी प्रणाली को लागू करना आसान नहीं होगा। कई व्यवसाय चालान-दर-चालान भुगतान मॉडल का उपयोग नहीं करते हैं। इसके बजाय, भुगतान अक्सर एक साथ सामुहिक या फिर टुकड़ों (पोर्ट पेमेन्ट) में किए जाते हैं, इसमें अग्रिम राशि समायोजित किए जाते हैं, या क्रेडिट शर्तों के अनुसार विलंब से भुगतान किए जाते हैं। कभी-कभी, माल वापस कर दिया जाता है या अस्वीकार कर दिया जाता है। व्यापार में ऐसी ऐसी विभिन्न जटिल परिस्थितियां बनती रहती है।

लेकिन निश्चित रूप से, जहां खरीदार प्रत्येक बिल का भुगतान तत्काल कर देते हैं, या जिस विक्रेता की विश्वसनीयता संदिग्ध हो, या किसी अनियमित विक्रेता से खरीदारी की जा रही हो, वहां इस तरह की कर भुगतान व्यवस्था काफी कारगर सिद्ध हो सकती है।

कोई भी नई प्रणाली जो तत्काल कर क्रेडिट की अनुमति देती है, उसे मौजुदा कर मॉडल के साथ साथ वैकल्पिक होना पड़ेगा। इस तरह, यह विभिन्न और जटिल व्यावसायिक स्थितियों में फिट हो सकती है।

लेकिन जैसे अब तत्काल भुगतान एक वास्तविकता है, इसी तरह हमारी कर प्रणालियों को भी विकसित होना चाहिए। वास्तविक समय में कर भुगतान और क्रेडिट को सक्षम करने वाली प्रणाली भारत की अर्थव्यवस्था को बदल सकती है। यह छोटे व्यवसायों के लिए चीजों को और अधिक सरल और न्यायसंगत बना सकती है।

 

सुरेश बाहेती
9050800888


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