वत्त मंत्री ने आयकर विधेयक 2025 में डिजिटल पहलू को शामिल करने का बचाव करते हुए बताया कि आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मौजूदा प्रावधान मुख्य रूप से भौतिक रिकॉर्ड को ही संदर्भित करते हैं, जिससे डिजिटल डेटा को संग्रहित और जांच करने में दिक्कत आती है।

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान परिवेश में डेटा को देखने का प्रावधान तो है, खास तौर पर तलाशी और जब्ती के कुछ मामलों में, किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अधिकृत करने पर। अब नए आयकर विधेयक में इसका विशेष रूप से उल्लेख करते हुए संसोधन किया गया है क्योंकि 1961 के अधिनियम में डिजिटल रिकॉर्ड का कोई प्रावधान नहीं है।‘

विधेयक में अघोषित आय की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों को शामिल किया गया है। और अधिकारियों को तलाशी और जब्ती के दौरान किसी भी आवश्यक एक्सेस कोड को ओवरराइड करके वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुँच प्राप्त करने की अनुमति प्रदान की गई है।

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डिजिटल साक्ष्यों से कर चोरी का पता लगाने में मदद मिलने के उदाहरणों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘एन्क्रिप्शन को डिकोड करने पर 250 करोड़ रूपये के बेहिसाब धन का पता चला। व्हाट्सऐप संदेशों से मिले साक्ष्यों से 90 करोड़ रूपये से अधिक के क्रिप्टो लेनदेन और 200 करोड़ रूपये के फर्जी बिलिंग सिंडिकेट का पता चला।‘

उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह गूगल मैप हिस्ट्री ने अघोषित लेनदेन से जुड़े स्थानों का पता लगाने में मदद की और उच्च मूल्य वाली संपत्तियों के स्वामित्व का पता लगाने के लिए इंस्टाग्राम का उपयोग किया गया।

सीतारमण ने लोक सभा को यह भी बताया कि सरकार ने करदाताओं को स्वैच्छिक रूप से विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय का खुलासा करने के लिए प्रेरित किया है जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। वैश्विक सूचना-साझाकर समझौतों के संबंध में पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली की 2018 की घोषिणा को याद करते हुए सीतारमण ने कहा कि देश को अब भारतीयों द्वारा विदेश में खोले गए खातों की जानकारी भारत को स्वतः प्राप्त होती है।


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