देश की बंजर जमीन को अब कृषि वानिकी से हराभरा किया जाएगा। नीति आयोग ने इस दिशा में पहल की है। जिसमें कृषि वानिकी (जीआरओडब्ल्यू) रिपोर्ट और पोर्टल के साथ जमीन की पहचान कर पौधा रोपण का काम किया जाएगा। देश में कुल भौगोलिक क्षेत्र (टीजीए) का लगभग 16.96 प्रतिशत बंजर भूमि है।

Under the scheme, the use of remote sensing and GIS will be used in all the districts of the country to find out what kind of agroforestry can be done. A dataset will be prepared for this. Which will be known as an Agroforestry Suitability Index (ASI) for national level priority. This report analyzes according to the state and district, which supports government departments and government for greening and renewal projects.

योजना से यह होगा लाभ

एक पोर्टल तैयार किया जा रहा है।//bhuvan-app1.nrsc.gov.in /asi_portal/ (पोर्टल अभी तैयार होने की प्रक्रिया में हैं)

इसमें बंजर जमीन और इस जमीन पर किस तरह का पौधा रोपण उपयुक्त रहेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध होगी। अब कहीं से भी राज्य और जिलास्तरीय डेटा पोर्टल से इसे देखा जा सकता है। लकड़ी उद्योग की लंबे समय से मांग रही है कि बंजर जमीन पर लकड़ी उगाई जाए। अब उद्योगपति इस पोर्टल के माध्यम से तय कर सकते हैं कि किस राज्य के किस जिले में उन्हें उनके उद्योग के मुताबिक बंजर जमीन और वहां किस किस्म की लकड़ी उगाई जा सकती है, इसकी जानकारी मिल सकती है।

वर्ष 2030 तक कृषि वानिकी का रकबा डबल करने लक्ष्य

अभी देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 8.65 प्रतिशत, यानी लगभग 284.2 मिलियन हेक्टेयर पर ही कृषि वानिकी की जा रही है। अब उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां कृषि वानिकी की संभावना है। इस तरह से ग्रो ;ळतवूद्ध पहल योजना में 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर (परती) भूमि को दोबारा से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह से 2.5 से 3 खरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने का टारगेट भी निश्चित किया गया है।

कृषि वानिकी को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने बताया कि कृषि वानिकी को विशेष रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। ताकि तीन चीजों पर ध्यान देने दिया जा सके। जैसे लकड़ी और लकड़ी उत्पादों के आयात को कम करना, वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्बन को अलग करना और कृषि योग्य भूमि का बेहतर उपयोग करना शामिल है। कृषि योग्य बंजर भूमि को कृषि वानिकी के माध्यम से उत्पादन उपयोग हेतु बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और कृषि में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि वानिकी से किसानों की आय दुगुनी करना संभव है

2014 में राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति का लक्ष्य बंजर जमीन का उपयोग कर उत्पादकता, लाभदायिकता और स्थिरता को बढ़ाना है। कृषि वानिकी, भोजन, पोषण, ऊर्जा, रोजगार और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करते हुए पेड़ों, फसलों और पशुधन को एकीकृत करती है। यह पेरिस समझौते, बॉन चौलेंज, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य, मरुस्थलीकरण से निपटने पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीसीडी), किसानों की आय दोगुनी करने, हरित भारत मिशन और ऐसी ही अन्य वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।


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