QCO युग की शुरुआत में प्लाइवुड निर्माताओं के लिए व्यावहारिक समस्याएं
- मार्च 7, 2025
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हमारे देश के प्लाइवुड और लकड़ी आधारित पैनल उत्पाद क्षेत्र में 11 और 28 फरवरी 2025 को भारतीय प्लाइवुड उद्योग के इतिहास में QCO - गुणवत्ता (नियंत्रण) आदेश युग की शुरुआत के रूप में अंकित किया जाएगा।
उद्योग ने बड़े पैमाने पर QCO कार्यान्वयन का 1 वर्ष की विस्तार अवधि के बाद बहुत सराहना के साथ स्वागत किया है, और हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी और उनकी टीम के ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट‘ विजन के साथ मेड इन इंडिया उत्पादों को मानकीकृत करने के उत्कृष्ट प्रयासों को उचित श्रेय दिया है।
हालांकि, हमारे प्लाइवुड निर्माण क्षेत्र - विशेष रूप से छोटे-मध्यम उद्यमों, में अभी तक पर्याप्त परिकल्पना और रणनीतिक सोच का अभाव रहा है, जो केंद्र में हमारी गवर्नेंस टीम के विजन को व्यावहारिक रूप से शत प्रतिशत साकार करने में सक्षम हो। हमारे उत्पादों द्वारा अनुभुव व्यवहारिक समस्याएं/परिदृश्य कुछ इस प्रकार की हैः
- गुणवत्ता मानसिकता का अभाव
गुणवत्ता एक मानसिकता है, अपने आप में कोई प्रक्रिया नहीं।
यह सबसे कष्ट कारी अभिशाप हैं, जिससे भारतीय प्लाईवुड उद्योग जुझ रहा है। यह मालिकों और प्रबंधकों की, गुणवत्ता के प्रति मानसिकता और दृष्टिकोण है, जो कारखाने, इसकी प्रक्रियाओं और इसके उत्पादों की गुणवत्ता तय करता है।
भारत में हमेशा से ही अनादि गुणवत्ता मानसिकता का अभाव रहा है। संभवतः जब से उद्योग का व्यापक प्रसार उत्तर पूर्व से स्थानांतरित होकर संपूर्ण भारत में हुआ, तब से यह समस्या अधिक गहरी हो गई। हालाँकि, हाल के दिनों में चीजें बदलने लगी हैं, लेकिन अधिकांश कारखानों में अभी भी गुणवत्ता मानसिकता की कमी हैं।
यह याद रखना चाहिए कि गुणवत्ता, सिर्फ निवेश करने या टीम पर दबाव बनाने से नहीं आती है। गुणवत्ता तब आती है जब मालिक गुणवत्ता और स्थिरता के लिए सोचते हैं, बात करते हैं, व्यवहार करते हैं और कार्य करते हैं।
- कहावत है - ‘मूंगफली के लिए, आपको बंदर मिलते हैं।‘
अधिकांश छोटी-मध्यम फैक्ट्रियों को यह भी नहीं पता कि अपने कारखाने के संचालन के लिए अपनी टीम का चयन कैसे करें। यहां तक कि 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली फैक्ट्रियों में भी हम देख सकते हैं कि ‘‘ग्लू‘‘ बनाने वाले अपने ‘‘फरमुलों‘‘ का उपयोग करते हैं।
तथाकथित प्रबंधक और सुपरवाइजर ‘‘व्यावहारिकता‘‘ के नाम पर उत्पादन के बारे में बिल्कुल अनर्गल तर्क देते हैं, और मालिक अपनी ‘‘अनुभवी‘‘ टीम के लिए गर्व करते रहते हैं।
अब ऐसी सोच वाले कारखानों के दिन गिने-चुने रह गए हैं। शायद, उनकी ‘व्यावहारिक’ टीम खुद ही, मालिकों को ऐसी फैक्ट्रियों को जल्द ही बंद करवाने में मदद करेगी। आने वाले समय में विशुद्ध रूप से संभावित ग्राहक-केंद्रित उद्योग के लिए कारखाने में योग्य, जानकार, दूरदर्शी, भविष्य-प्रूफ टीम का होना सबसे आवश्यक निवेश है।
- उचित प्रसंस्करण कार्यशेली का अभाव
आगामी मानकों के कार्यान्वयन के सुचारु संचालन के मद्देनजर यह एक गहरी चिंता का विषय है।
मालिकों और प्रबंधन में अक्सर, उनके उत्पादन का मुख्य कच्चा माल-कोर विनियर-प्रसंस्करण में परिवर्तन और प्रबंधन की आवश्यकता के प्रति त्वरित सामंजस्यता और अहसास की कमी है - जैसे कि धीमी गति से सूखना या कोर की कंडीशनिंग, और उसके साथ ही उनके रेजिन और गोंद बनाने की प्रक्रिया - जैसे कि रेजिन और ग्लू की विस्कोसीटी में परिवर्तन, रेजिन पकाने में पूर्णता, ग्लू मिश्रृण में महारत आदि।
विशेष रूप से स्माल-माइक्रो प्लाईवुड निर्माताओं में, परिवर्तन और नई सोच को ग्रहण करने की स्वीकृति की कमी बनी हुई है, हालांकि कई मध्यम स्तर के उत्पादकों ने अपनी सोच को बदलना शुरू कर दिया है और सक्रिय रूप से प्राचीन पूर्वाग्रहों से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं।
‘पूर्वाग्रह एक बोझ है जो अतीत को भ्रमित करता है, भविष्य को खतरे में डालता है और वर्तमान को दुर्गम बनाता है।’ - माया एंजेलो
- नई सामग्रियों के लिए नए प्रसंस्करण मापदंडों की आवश्यकता होती है
कोर विनियर पीलिंग के लिए 7 साल से अधिक पुराने लकड़ी के दिन अब लद गए हैं। कच्चे या इस माल के संसाधनों के लिए MDF, PM, OSB जैसे लकड़ी आधारित पैनल उत्पादकों से प्लाईवुड की कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
इसलिए, प्लाईवुड कारखानों को, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता से समझौता किए बिना, कम गुणवत्ता वाले लकड़ी के संसाधनों के बेहतर प्रसंस्करण तकनीकों और क्षमताओं, और रेजिन/ग्लू की नई प्रौद्योगिकियों के अनुकूल होना ही पडे़गा।
उपलब्ध कच्चे माल के संसाधनों से ताल मेल बैठाते हुए मशीनरी, प्रसंस्करण और उत्पादन तकनीकों को अपनाना भविष्य में प्लाईवुड कारखानों के अस्तित्व और जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण है - विशेष रूप से सूक्ष्म-लघु कारखानों के लिए।
‘वह बदलाव बनें जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।’ - एम. के. गांधी

- मानव कौशल की कमी
कौशल और मानव संसाधन विकास, प्लाईवुड विनिर्माण क्षेत्र में पूरी तरह से उपेक्षित क्षेत्र है। हमारे देश भर में लकड़ी आधारित पैनल उद्योग क्षेत्र के 5000 से अधिक कारखानें- जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक सूक्ष्म और लघु हैं, ने कभी ऐसी आवश्यकताओं के बारे में सोचा ही नहीं है। अनुभवी कर्मचारियों और श्रमिकों की खोज और उन्हें अपनी कार्यबल में शामिल करना अब तक उद्योग में प्रचलित है।
QCO के कार्यान्वयन के बाद, कुशल कार्यबल की आवश्यकता में भारी बदलाव देखने को मिलेगा, जो मानकों की आवश्यकताओं को संभालने के लिए पर्याप्त योग्य और उत्पाद की गुणवत्ता परिदृश्यों को संभालने क लिए पर्याप्त ज्ञानवान और समर्थ हो।
हमारे क्षेत्र में कौशल और मानव संसाधन विकास में निवेश की कमी, सूक्ष्म-लघु क्षेत्र को बहुत मुश्किल में डालने वाली है।
- ‘गुणवत्ता की लागत‘ को समझने की समस्या
‘गुणवत्ता की लागत‘ को समझने की समस्या को समझना सूक्ष्म-लघु निर्माताओं के अस्तित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें से अधिकांशतः इकाइयों की सोच रहती हैं कि ‘आगंतुकों‘ को भुगतान करके और सेम्पलिंग, टेस्टींग और इन्सपेक्सन की प्रक्रिया को किसी भी तरिके से संभालते हुए अपना काम चला लिया जाए।
ऐसी सोच रखने वाले मालिकों को याद रखना चाहिए कि अनिवार्य QCO का मतलब है, प्रत्येक CML नंबर के प्रत्येक लॉट के लिए, अनिवार्य उत्पादन मैनुअल प्रविष्टि और रिकॉर्ड रखना। भारत में उत्पादित प्रत्येक बोर्ड का BIS नंबर होना चाहिए। BIS मार्केंट सेंपलिंग की किसी भी संभावना में सचेत रहने के लिए फैक्ट्री में ही प्रत्येक लॉट का नमूना लिया जाना चाहिए और परीक्षण किया जाना चाहिए।
मार्केंट सेंपलिंग की जानकारी, परीक्षण रिपोर्ट और शिकायतों के लिए फ़ैक्टरी की इन-हाउस लैब हमेशा तैयार होनी चाहिए। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे, अपने फेक्ट्री सेंपलिंग टेस्टिंग और मार्केट सेंपलिंग रिपोर्ट को कितनी देर तक और कितनी बार संभाल पाएंगे। यह बहुत महंगा साबित होने वाला है।
यहां ध्यान देने की आवश्यकता है कि, सिर्फ गुणवत्ता को लगातार बनाए रखने से ही - आने वाले समय में गुणवत्ता की लागत कम हो जाएगी।
खराब गुणवत्ता की कड़वाहट में सस्ता मिलने की मिठास घूल जाती है दृ बेंजामिन फ्रैंकलिन
उम्मीद है कि लकड़ी आधारित पैनल विनिर्माण क्षेत्र में हमारे देश के सूक्ष्म-लघु निर्माता, QCO के महत्व को समझेंगे और अपनी मानसिकता, विचार-प्रक्रिया, फैक्ट्री टीम और गुणवत्ता चेतना को जल्दी से जल्दी उच्चता की ओर ले जाएंगे, जिससे वे अपने विनिर्माण कार्यों को गर्व और सम्मान के साथ सफलतापूर्वक जारी रख सकें।
जो लोग गुणवत्ता के प्रति जागरूक हैं और अपने विचारों में मजबुत हैं, मैं उनसे वादा करता हूँ कि QCO कार्यान्वयन उन पर बहुत अधिक नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगा, चाहे वे सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्योग हों।
ऐसे सभी निर्माता निश्चित रूप से जल्दी से वास्तविकता के अनुकूल सकारात्मक व्यवहारिकता अपनाएंगे और बिना अपनी लागत में बहुत अधिक वृद्धि किएअपनी प्रक्रियाओं, तकनीकों और उत्पाद परिष्करण में स्थिरता सुनिश्चित करेंगे।
जय हिंद!
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