आर्थिक और वित्तीय भविष्यवाणियों की पहेली और भारत की लंबी अवधि की योजनाएं
- अप्रैल 13, 2024
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आर्थिक और वित्तीय मामलों की भविष्यवाणी करना खासा मुश्किल काम है। इस तरह की भविष्यवाणी का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। इसके बावजूद भी साल के शुरुआत में आर्थिक विकास और साल के अंत में स्टॉक सूचकांक के पूर्वानुमान पर काफी रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है।
आर्थिक और वित्तीय मामलों की गणना करने और इसका रिकार्ड रखने में अमेरिका बहुत आगे हैं। वहां इस तरह की भविष्यवाणी करना एक बड़े बिजनेस का हिस्सा है। इसके बाद भी वहां इस संबंध में की गई भविष्यवाणी सही नहीं निकलती।
यह माना गया था कि 2023 में अमेरिका एसएंडपी 500 विफल हो जाएगा, लेकिन हुआ यह है कि यह 24.2 प्रतिशत चढ़ गया। नैस्डैक 50 की बजाय 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। उम्मीद की जा रही थी कि कोविड के बाद चीनी शेयर बाजार ष्फिर से खुलने पर तेजी दिखाएंगे। लेकिन चीनी बाजार डूब रहा है।
अमेरिकी में मंदी की भविष्यवाणी गलत साबित हुई। इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में जोरदार वृद्धि हुई। फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में बढ़ोतरी से उपभोक्ता खर्च और व्यापार वृद्धि वीमी होने की उम्मीद थी, इसके बजाय, अर्थव्यवस्था बढ़ती रही, मुद्रास्फीति दर गिर गई और स्टॉक की कीमते बढ़ गई। दूसरी ओर, एआई में सफलता से अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है।
बाजार का मिजाज और अर्थव्यवस्था की चाल कब किस पासे पलट जाए. इसका आकलन पहले से करना खासा मुश्किल काम है। बाजार की परिस्थितियों का एक छोटा सा बदलाव भी आर्थिक तौर पर अस्थिरता पैदा कर देता है। इस वजह से बाजार के भविष्यवक्ता अक्सर गच्चा खा जाते हैं। लेकिन यह आशंका लंबी अवधि की योजनाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई रणनीति में लागू नहीं होती।
उदाहरण के लिए, मोदी सरकार ने एक के बाद एक कई ऐसे निर्णय लिए, जिससे विकास के नए रास्ते खुले है। 2019 को यदि छोड़ दिया जाए तो 2014 और 2021 के बीच आर्थिक मंदी के बाद भी बाजार की ग्रोथ अच्छी रही। इससे, शायद, दीर्घकालिक परिणामों की मविष्यवाणी करना आसान हो जाता है। क्योंकि यदि विकास को लेकर जो नीति बनाई जाती है, वह लागू रहे, उसे उसी रूप में अमल में लाया जैसा कि उनके तैयार करते वक्त सोचा गया था।
उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनः
मार्च 2020 में छोटे पैमाने पर शुरू की गई उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उद्देश्य भारत को एक विनिर्माण केंद्र में बदल कर घरेलू जरूरतों को पूरा करना है। जिससे स्थानीय उद्योग की बड़ी जरूरतें भी हम स्वयं ही पूरी कर सके।
इसके पीछे सोच यह है कि खासकर चीन से आयात पर निर्भरता को कम किया जाए। यदि स्थानीय उत्पादों की बिक्री पूर्व निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचती है, तो यह योजना प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसे अब तक सीमित सफलता मिली है, क्योंकि तैयार माल के आयात की बजाय, इसे टुकड़ों में आयात कर यहां जोड़ कर अंतिम उत्पाद तैयार कर लिया जाता है। 1980 के दशक में टेलीविजन के क्षेत्र में ऐसा ही हुआ था।
पीएलआई योजना अति-महत्वाकांक्षाओं वाली प्रतीत होती है। क्योंकि हम उन छह मिलियन नौकरियों के आसपास भी नहीं हैं, जिसके अवसर पैदा किए जाने थे। वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2027 के बीच प्रोत्साहन के रूप में 2 ट्रिलियन दिए गए थे। लेकिन मेरा मानना है कि भारतीय उद्यम पहले की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी और साधन संपन्न हैं और यह योजना कुछ हद तक देश में उत्पादन को बढ़ावा देने वाली साबित हो सकती है।
बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्ययः
आजादी के बाद से, अर्थशास्त्रियों ने तर्क दिया कि बजटी का बड़ा हिस्सा तो सरकारी वेतन, पेंशन और उधारी पर ब्याज पर खर्च किया जाता है। आर्थिक विकास को गति देने वाली मदों (अति आवश्यक पूंजीगत व्यय कैपेक्स) के लिए कोई पैसा नहीं बचता है। 2023-24 के बजट में मोदी सरकार ने इस तथ्य को समझते हुए बदलाव किए। अब सरकार रक्षा, शहरी बुनियादी ढांचे और रेलवे के लिए 10 ट्रिलियन का शानदार पूंजीगत व्यय (2.40 ट्रिलियन का आवंटन, वित्त वर्ष 2023 की तुलना में 75 प्रतिशत की भारी वृद्धि) की घोषणा की। ऊर्जा भी एक बड़ा क्षेत्र है, जिसके नवीकरणीय की ओर ध्यान देते हुए स्मार्ट ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड स्मार्ट मीटरिंग पर लगातार खर्च किया जा रहा है।
आयात में कटौती
अब अगर पीएलआई प्रणाली, ऊर्जा और रक्षा पर पूंजीगत व्यय का लाभ मिलता है, तो तीन सबसे बड़ी आयात वस्तुओं इलेक्ट्रॉनिक्स, हथियार और तेल में खर्च होने वाले बजट में तेजी से कटौती करना संभव हो सकता है। इस रकम से देश के आर्थिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव होगा। क्योंकि जिन क्षेत्रों के तहत पीएलआई योजना की घोषणा की गई है, उनमें आयात का लगभग 40 प्रतिशत योगदान है।
जाहिर है, इस पर देश के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा था। हर दिन कुछ कंपनियां अपने राजस्व से कई गुना अधिक ऑर्डर की घोषणा कर रही हैं। विश्लेषकों को ऐसी खबरों के साथ तालमेल बिठाने और अपने राजस्व और लाभ के पूर्वानुमान को अपडेट करने में कठिनाई हो रही है। आम सहमति यह है कि कम से कम आने वाले कुछ वर्षों के लिए हमारे पास एक स्थिर और प्रतिबद्ध नीति ढांचा है। इसलिए निरंतर विकास के पूर्वानुमान दिए गए हैं। इससे बाजार के ऊंचे स्तर पर जाने को लेकर आम सहमति बनी है।
इसे कौन नहीं जानता? हर कोई रेलवे और रक्षा पर खर्च के बड़े सकारात्मक प्रभाव के बारे में जानता है। यही कारण है कि वैगन निर्माता टीटागढ़ रेल सिस्टम ने पिछले साल 367 प्रतिशत और मझगांव डॉक शॉट ने 191 प्रतिशत की छलांग लगाई। हावर्ड एम के रूप में प्रसिद्ध अमेरिकी निवेशक आर्क्स ने सलाह दी, जब आप किसी चीज (जैसे देश या कंपनी का भविष्य) को लेकर उत्साहित हों, तो अपने आप से पूछेंः यह कौन नहीं जानता? यदि हर कोई जानता है. तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है और उज्ज्वल भविष्य पहले से ही मौजूदा कीमत में परिलक्षित होता है। दरअसल, जब हर कोई आशावादी हो और एक-दूसरे से सहमत हो. तो सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी नकारात्मक खबर गंभीर झटका दे सकती है।




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