क्यूसीओ और बाजार वर्तमान परिदृश्य और भविष्य - भाग 2
- जून 12, 2024
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जेके बिहानीः बीआईएस अपनी तैयारियों की बजाय सैंपल पर ज्यादा जोर दे रहा है।
क्यूसीओ फरवरी से लागू हो जाएंगे। लेकिन अभी बीआईएस की तैयारी हमें तो कमजोर लग रही है। इस वक्त बीआईएस ज्यादा जोर दे रहा है बाजार से पुराने लाइसेंस धारकों के सैंपल लेने का। लगातार कई कई सैपल। इस वजह से लोगों में डर है। बीआईएस को अपनी ताकत लगानी चाहिए क्यूसीओ के बारे में जागरूक करने में। इसमें सभी के लिए भलाई हैं।
हमारे ही कई डीलर हमारे साथ गड़बड़ कर रहें हैं। हम से एक गाड़ी लेता है, लेकिन वह हमारे ब्रांड की कई गाड़ियां बेच रहा है। हमने उसकी शिकायत की। नाम व फोटो भी दिए। बीआईएस ने शिकायत स्वीकार भी की। इसके बाद भी समुचित कार्यवाही नहीं हुई। इधर उद्योगपतियों से लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं।
यहां उद्योगपतियों को थोड़ी राहत दी जानी चाहिए। क्यूसीओ लागू करने से पहले इस तरह की तेजी ठीक नहीं है। इस बारे में ठप्ै को अवश्य विचार करना चाहिए। डॉ. पांडे व डॉ. एमपी सिंह से आग्रह है कि इस समस्या की ओर बीआईएस का ध्यान दिलवाएं। पहले एक बार सभी लाइसेंस के दायरे में आ जाएं, इसके बाद सब अभ्यस्त् हो जाएंगे। कुछ दिन सभी को राहत देनी चाहिए।
IS: 303 के मानक ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है। फरवरी में यह लागू हो जाएंगे। इसमें ई1 व ई 2 मानक तय किया गया है। फार्मल डिहाइड की जो मात्रा रखी गयी है, यह भी ठीक है। ई 1, 8 एमजी प्रति 100 ग्राम से कम व ई 2, में आठ एमजी से 30 एमजी तक रखा है। इसे भी हासिल किया जा सकता है। प्लाइवुड का तो हो ही जाएगा।
एमओआर में 15 प्रतिशत एलान्ग द ग्रेन कम किया है लेकिन एक्रोस द ग्रेन बढ़ा दिया हैं जिसकी आवश्यकता नहीं थी। लकड़ी की उम्र कम है। इसलिए एमओआर बढ़ाना ठीक नहीं है। जहां कम किया है, वह ठीक है।

डॉ. एमपी सिंह
इसमें हम बदलाव ला रहे हैं। इसमें रेंज लंबी देंगे। ताकि जो भी उत्पादक जिस रेंज में प्रोडेक्ट बनाना चाहे वह बना सके। जिससे हर तरह का उत्पाद तैयार हो सके।
जेके बिहानी
ब्लाक बोर्ड के लिए लंबी लकड़ी नहीं मिल रही है। एमओआर मानक पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
डॉ. एमपी सिंह
इस पर आप डाटा उपलब्ध करा दें। जिससे एक विशिष्ट श्रेणी तय कर दी जाए। हमने बीआईएस की प्रयोगशाला से भी डाटा मांगा है।
जेके बिहानी
यह ठीक रहेगा। क्योंकि इससे अधिक प्रमाणित डाटा और कहीं से मिल नहीं सकता।
डॉ. एमपी सिंह
आप बीआईएस में अपनी बात रखे। लिखित में यह बात उनके सामने उठाएं कि जिस तरह से सैंपल लिए जा रहे हैं, उससे कैसे परेशानी आ रही है। उद्योगपतियों में इसे लेकर तनाव बना हुआ है। वहां जो लिखित में आप देंगे, उसकी एक कॉपी हमें भी दें। वहां डीजी स्तर पर अपनी बात उठानी होगी।
इन्द्रजित सोहेलः पंजाब हरियाणा के उद्योगों को बचाना होगा
यूनिट चलाने में दिक्कत आ रही है। लकड़ी नहीं मिल रही है। बीआईएस ने हमारे ऊपर तो सख्ती कर रखी है। लेकिन बाहर से जो माल आयात हो रहा है वह खुलेआम बिक रहा है। इसलिए फब्व् में बीआईएस मानक जल्द से जल्द लागू होने चाहिए।
क्योंकि QCO लागु होने से ही आयात के कम गुणवत्ता के माल पर रोक लगाना संभव होगा। सैंपल प्रक्रिया से भी परेशानी आ रही है। इस वक्त पंजाब व हरियाणा का प्लाईवुड उद्योग मुश्किल वक्त से गुजर रहा है। इस स्थिति से उबारने की जरूरत है।

माखन गट्टानीः तीन माह में चार चार पांच पांच सैंपल उठ रहे हैं
हम बीआईएस के लायसेंस हैं, लेकिन हमें ही डर लग रहा है कि हम बीआईएस में रह पाएंगे या नहीं। क्योंकि जिनके पास भी बीआईएस का लाइसेंस है, हर तीन माह में चार चार पांच पांच सैंपल उठ रहे हैं। हमारे पास तीन चार पांच लाइसेंस है तो आज इस का सैंपल लिया जा रहा है, कल उसका सैंपल लिया जा रहा है। हमारी पूरी टीम इसमें उलझी रहती है।
पैरामीटर के संदर्भ में किसी भी 10 या 20 आस पास की यूनिट के सैंपल लेकर जो मानक आएं उन्हें ही अंतिम रूप दे देना चाहिए।
एक बड़ी समस्या यह है एक सैंपल उठने के बाद चिट्ठी आती है कि एक आदमी फिर आ रहा है। सात हजार रुपए और जमा करा दो। वह व्यक्ति आधे घंटे के लिए आएगा। सैंपल ले लेगा। इससे हम पर आर्थिक बौझ बढ़़ रहा है।
हमारे पास प्रशिक्षित लोगों की कमी है। इस वजह से हमें अर्ध कुशल कर्मचारियों के साथ काम करना पड़ रहा हैं।
एमओआर एमओई की रेंज कैसे बढ़ाएं? हमारे पास जो लकड़ी हे, इसमें जो रेंज आ रही है, वह ही वास्तविक रेंज है।
डॉ. सीएन पांडेः हम 303 प्लाइवुड में कई श्रेणी बना देंगे। लेकिन इसमें यह दिक्कत है कि उपभोक्ताओं को कैसे पता चलेगा। हम यदि कम गुणवत्ता में अपना उत्पाद पास कराते हैं, लेकिन उपभोक्ता को नहीं पता कि इतनी सारी श्रेणी है। इससे बेहतर गुणवत्ता का उत्पाद बनाने की जो कोशिश है, उस प्रयास को ठेस पहुंच सकती है।

डॉ. एमपी सिंह
जो IS: 303 श्रेणी है, यह बड़ी विस्तृत श्रेणी है। इसमें प्लाईवुड का कैरेक्टर निश्चित करना चाह रहे हैं। जिससे एक ही श्रेणी में अलग अलग कलस्टर में बनने वाले उत्पाद के एक मानक को इसमें समहित तय कर लिया जाए।
हम पैकिंग ग्रेड लाने की बात करते हैं तो विरोध होता है। इसी तरह से अलग अलग श्रेणी में यदि अलग अलग मानक बनाने की कोशिश करते हैं तो इसका विरोध होता है। इसलिए हमने तय किया कि मानक में ही स्पष्ट कर दिया जाए कि यह उत्पाद इस प्रयोग के लिए तैयार किया गया है।
माखन गट्टानी
हम IS: 303 की उच्च गुणवत्ता की प्लाई बना रहे हैं, लेकिन जो इस श्रेणी में कम गुणवत्ता की प्लाई बना रहे हैं तो क्या वो उस पर लिखेंगें कि यह फर्नीचर के प्रयोग के लिए है।
डॉ. एमपी सिंह
इसका वर्गीकरण किया जाएगा। जो उत्पादक यह लिखना चाहते हैं लिख सकते हैं। यदि सभी इस पर राजी होते हैं तो हम इसका प्रावधान कर सकते हैं।
डॉ पांडे
यह सुझाव उद्योग की ओर से आया था। हमने यूरोपियन समेत कई देशों के मानकों का जब अध्ययन किया तो पाया कि वहां उस उत्पाद पर लिखा जाता है कि यह उत्पाद किस विशेष श्रेणी का है। जिससे खरीदार को पता चल सके कि उत्पाद को कहां प्रयोग करना है।
इसलिए हमने भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ही भारतीय मानक तैयार किए हैं।
सोनू अग्रवालः देशी व विदेशी उद्योग से सैंपल लेने के लिए एक नीति बननी चाहिए
एमएसएमई को दिक्कत यह आ रही है कि यदि लाइसेंस लेते हैं तो सैंपल लेने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। स्थानीय उद्योग व विदेशी उद्योग के सैंपल लेने के लिए एक जैसी नीति बनानी चाहिए। इसमें यह देखा जाए कि सैंपल कब कब और कितने लिए जाएंगे।
लाइसेंस लेने की बात चल रही है, तीन माह में तीस उद्योपगतियों ने ही लाइसेंस आवेदन किया है। जिनके लाइसेंस की अवधि खत्म हो गई हे, उन्हें जल्द से जल्द लाइसेंस दिए जाने चाहिए।

क्योंकि उनका विवरण बीआईएस के पास है। इससे यह भी जानकारी ली जा सकती है कि उन्होंने अपना लाइसेंस रद्द क्यों कराया। यदि ऐसा किया जाता है तो आधे से ज्यादा उद्योगपति लाइसेंस के दायरे में आ जाएंगे।
क्यूसीओ को सख्ती से भी लागू करना चाहिए। क्योंकि थोड़ा दबाव आएगा तो हर कोई लाइसेंस लेगा। इसके लिए बीआईएस को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।
एक व्यवस्था यह भी हो सकती है कि जिस तरह से जीएसटी विभाग के अधिकारी जब जीएसटी की जांच करते हैं वह ही बीआईएस लाइसेंस की जांच भी कर लें तो काम आसान हो सकता है।
डॉ. एमपी सिंह
एसोसिएशन की ओर से उद्योगपतियों को जागरूक किया जाना चाहिए कि लाइसेंस ले लें। क्योंकि सरकार और बीआईएस यह बोल सकतें हैं कि हमने नोटिफिकेशन कर दिया है, अब लाइसेंस के लिए यदि कोई आवेदन नहीं कर रहा है तो विभाग क्या कर सकता है।
अब हम यह कहना बंद कर दें कि ज्यादातर उद्योग लाइसेंस से बाहर है। इस धारणा को बदलना होगा। क्योंकि यदि यह धारणा बनी रहती है तो QCO लागू करने में फिर से विलंब हो सकता है।
डॉ. सीएन पांडे
सरकार ने क्या सुविधा उपलब्ध करायी है। बीआईएस ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जो उद्योगपतियों को प्रेरित कर सके। एमएसएमई जिसका दस करोड़ रुपए का निवेश होता है वह हर साल एक डेढ़ लाख रुपए खर्च करे तो थोड़ी दिक्कत आएगी। सैंपल का इतना खर्च कैसे वहन कर सकते हैं। इसके लिए कोई न कोई सुविधा या छूट होनी चाहिए।
डॉ. एमपी सिंह
हम एक बैठक बीआईएस के साथ कर सकते हैं। लेकिन बीआईएस बोल सकते हैं कि यदि आप अपना उद्योग चलाना चाहते हैं तो लाइसेंस लीजिए, नहीं चलाना है तो न चलाए। बीआईएस के पास बहुत से उद्योग है।
उनके सैंपल के जो मापदंड है, वह तो मानने ही होंगे। क्योंकि बाकी उद्योग इस तरह की मांग नहीं कर रहे हैं। इसलिए लकड़ी उद्योग को इस तरह की छूट शायद ही मिल पाए।

माखन गट्टानी
हमारे एक सैंपल के टेस्टींग का बिल 25 हजार रुपए आया है। इसलिए इसे कम किया जाना चाहिए। एक फ्लश डोर का यह रेट बहुत ज्यादा है।
नवल केडियाः उद्योगपतियों को कुछ रियायत तो मिलनी ही चाहिए
मुझे लगता है, कि क्यूसीओ को लागू करने की समय सीमा और बढ़ सकती है।
बीआईएस के लोगों को भी इस तरह की बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि उन्हें पता चले कि उद्योगपतियों को दिक्कत क्या आ रही है।
इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि लाइसेंस जो भी लें, वह मानकों के अनुरूप काम भी करें। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आज लाइसेंस ले लिया, लेकिन मानकों को फोलों नहीं किया, या किसी अन्य वजह से लाइसेंस सस्पेंड करा दिया।
उद्योगपतियों को जागरूक करना चाहिए। क्योंकि जब तक उद्योगपति स्वयं जागरूक नहीं होगा वह उपभोक्ताओं को क्या समझाएगा।
शायद ज्यादा श्रेणी बनाने की भी आवश्यकता नहीं है।
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