वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने वाले “विश्वसनीय भागीदारों” के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) ढांचे को आसान बनाने के लिए तैयार है।

स्विट्जरलैंड और स्वीडन की चार दिवसीय यात्रा पर आए मंत्री ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की 90 प्रतिशत पर चर्चा पूरी हो चुकी है, सेवाओं और मूल नियमों पर बातचीत शुरू होने वाली है। हालांकि, उन्होंने कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को संबोधित करना मुख्य मुद्दा है।

भारत देश में गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए QCO को लागू कर रही है। अमेरिका सहित कुछ देशों ने QCO अनुमोदन पर आपत्ती उठायी है।

गोयल ने कहा कि नियम, मानक और प्रक्रिया घरेलू निर्माताओं और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के बीच भेदभाव नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सभी देशों की कंपनियों को राष्ट्रीय व्यवहार दिया जाता है।

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गोयल ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हम आपसी लाभ और आपसी मान्यता के आधार पर कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं, बशर्ते अन्य देश भारत द्वारा बनाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का सम्मान करने के लिए तैयार हों और हमें अपनी प्रमाणन प्रक्रिया लागू करने की अनुमति दें। हमें अपने विश्वसनीय भागीदारों को भी ऐसा करने की अनुमति देने में खुशी होगी।‘‘

घरेलू विनिर्माण मानकों को बढ़ाते हुए घटिया वस्तुओं के आयात को रोकने और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों तक उपभोक्ता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्यूसीओ को डिजाइन किया गया है।

यूरोपीय संघ द्वारा अनावरण किए गए कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) के बारे में पूछे जाने पर, गोयल ने कहा कि यह उपाय ‘‘अच्छा नहीं‘‘ है क्योंकि यह एक तरह का गैर-टैरिफ अवरोध भी है। उन्होंने कहा कि यदि कर लगाया जाता है, तो यह भारतीय उद्योग के साथ अन्याय होगा और यदि यूरोपीय संघ ऐसा कोई कदम उठाता है, तो भारत को उसका जवाब देना होगा। मंत्री ने कहा, ‘‘इससे निपटने के तरीके खोजने के लिए हमारी बातचीत चल रही है।‘‘


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