1. प्लाईवुड और पेनल उद्योग में QCO का विरोध क्यों हो रहा था?

QCO का विरोध मुख्यतः आयातक लाबी कर रही थी। कम गुणवत्ता का सस्ता माल मंगा कर, स्वदेशी उत्पादों की कीमतों का मुकाबला करते हुए बाजार को अस्थिर किया जा रहा था। बी आई एस के मानकों में भी थोड़ी बहुत कमीयां थी, जिसका डर उद्योगतियों में था। उद्योग को यह समझने में थोंड़ा समय लगा कि फब्व् के प्रावधान उनके हित में हैं। मानकों की कमियों को, बी आई एस के संपर्क में रह कर, धीरे धीरे सुधारा जा सकता हैं।

  1. क्या अब सारी दिक्कतें दूर हो गई है? कहां-कहां बदलाव की अभी भी आवश्यकता है?

वैसे तो काफी दिक्कतें दूर हो गई है। इसके अंदर एक दो चीजें विशेष रूप से संशोधित होनी चाहिएं। हमारी उत्पादन प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से वेस्ट प्रॉडक्ट निकलता है, जिसे संशोधित कर नए उत्पाद तैयार किए जाते है, वह उद्योग की इकोनोमी के लिए और मुख्य उत्पाद की कीमतों को स्थिर करने के लिए बहुत ही आवश्यक है। उसके लिए अभी तक कोई अमेंडमेंट आई नहीं है। बाकी तो प्रायः सब ठीक है। क्योंकि 1989 के बाद तो BIS के अंदर कोई अमेंडमेंट हुई नहीं थी। और मुझे लगता है कि ये हमारे उद्योग के लिए सही हैं।     

  1. आप BIS से कब से परिचित हैं। तब (शुरू) से अभी तक इसमें क्या बदलाव आपने देखे हैं?

हमारे पास पिछले पच्चीस साल से आईएसआई का लाइसेंस है। इसमें हम एक चीज़ बीएसआई वालों से और डिस्कैस करना चाहते हैं कि जो भी दिक्कतें आती है, वो सिर्फ उन्हीं को आती है जो उनके लाइसेंसी होते हैं। इनके ऑफिसर्स को बताते हैं कि फलां फैक्ट्री मे सब स्टैन्डर्ड काम हो रहा है, आप जाइए, और जाकर चेक कीजिए। तो वो कहते हैं, कि हम जा नहीं सकते, हम तो सिर्फ उन के पास जा सकते हैं जिनके पास लायसेंस हैं। 

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  1. 303 के मानकों में जो बदलाव हुए हैं उनसे आप कितने सहमत है वो कितने सहायक (Helpful) हैं?

IS: 303 के मानकों में जो बदलाव हुए हैं, उनमें MOR/MOE के मानक सही कर दिए गए हैं। क्योंकि पहले अपने यहाँ पर 1.0 एम एम का फेस आता था, आज 0.3 एम एम से ऊपर का फेस इंपोर्ट नहीं हो रहा है। तो जो इन्होंने मानक बनाए हैं, वो इसको मद्देनज़र रखते हुए सही कर दिए गए हैं।

जब क्यूसीओ आ ही रहा है तो इंडियन इंडस्ट्री को भी अपने आपको तैयार करना पड़ेगा। इस पोज़ीशन पर लेके आना पड़ेगा कि सब स्टैन्डर्ड मटेरियल ना बने और सब अच्छा मटेरियल बनाएं। उसके लिए सब आईएसआई की रजिस्ट्रेशन भी करवाएं, लेब्स भी लगाएं, अपनी फैक्टरी में अच्छे ढंग से काम करें।

  1. क्या आपको लगता है कि तय तिथी में QCO लागू हो जाएगा?

जॉइंट सेक्रेट्री से हमारी मीटिंग के बाद हम आश्वस्त हैं कि ये QCO अपने तय समय पर हंड्रेड परसेंट लागू हो जाएगा।

  1. अगर तय तिथी में QCO लागु नहीं होता है उद्योग को क्या दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं?

ये तो बहुत बड़ी तकलीफ का विषय बन जाएगा प्लाईवुड इंडस्ट्री के लिए। मैं यह समझता हूँ कि ऑलरेडी डेढ़ दो सौ यूनिट बंद हो चूके हैं। और अगर ये फब्व् लागू नहीं होगा, तो इंपोर्टर्स के हौसले बुलंद हो जाएंगे। अभी इंपोर्टर्स ने व्यापार बंद किया हुआ है। क्योंकि डेढ़ से दो महीने लगते हैं, उनको मेटेरियल इंपोर्ट करने में। अगर ऐसा हुआ तो मार्केट में बहुत ज्यादा तकलीफ और प्लाईवुड इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ी दिक्कत हो जाएगी।


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