Increasing importance of 'Proof of origin' in Export

QCO के 18 महीने बाद विदेशी जूता निर्माताओं को बीआईएस प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया अब शुरू हो सकती है।

भारत सरकार लगभग 18 माह बाद, अब विदेशी जूता निर्माताओं को भी बीआईएस लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू करेगी इस तरह से एक बार फिर से भारत में नाइकी, टॉमी हिलफिगर, केल्विन क्लेन, अरमानी, एक्सचेंज, सुपर ड्राई जैसे विदेशी ब्रांड के आने का रास्ता साफ हो जाएगा।बीआईएस प्रमाणपत्र मिलते ही इन ब्रांडों के फुटवियर का भारत में फिर से आयात शुरू जाएगा।

जब से भारत ने जूता उद्योग के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश क्यूसीओ लागू किया है,उस के बाद से भारतीय बाजार में वह जूता ही आ सकता है,जिनके पास बी आई एस का लाइसेंस है। इस तरह से विदेशी जूतों का भारत में आयात बंद सा हो गया था।

इसका असर वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है, क्योंकि भारत जूतों की बड़ी मार्केट है। इसलिए विदेशी जूता निर्माता यह मांग उठा रहे थे, कि उन्हें भी बीआईएस प्रमाण पत्र दिया जाए। वह भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों को अपनाने के लिए तैयार हैं।

हालांकि भारतीय अधिकारियों ने बताया कि विदेशी जूता उद्योग को प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की हुई है। क्योंकि सरकार देश के जूता उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए आयात पर अंकुश लगाना चाहती है। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका में मुख्यालय वाली नाइकी इंक कंपनी ने अपने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के लिए बीआईएस प्रमाणपत्र के लिए भारत सरकार से कई बार संपर्क किया था। लेकिन अब तक उन्हें इसमें कोई सफलता नहीं मिली थी।

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आखिरकार उन्होंने इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप के साथ बैठक से पहले यह मुद्दा उठाया था। जिससे उन्हें अब मदद मिली है।

यह स्थिति लकड़ी उद्योग में भी आ सकती है, लेकिन कब? यह भविष्य ही तय करेगा। सरकार को कब, किस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी देश की बात माननी पड़ सकती है इसका अंदाज नहीं लगा सकते। लेकिन इतना निश्चित है कि इसमें समय लग सकता है। और यह बहुत जल्दी तो कम से कम नहीं हो सकता है।

इसलिए भारतीय लकड़ी उद्योग के पास अवसर है कि वह खुद को इतना मजबूत कर लें, ताकि जब कभी विदेशी पेनल निर्माताओं को बीआईएस प्रमाण पत्र मिले तो भारतीय लकड़ी उद्योग इनका दृढ़ता से मुकाबला कर सके। यदि वह ऐसा करने में सफल होते हैं तो न सिर्फ प्रधानमंत्री का ‘‘मेक इन इंडिया - मेड इन इंडिया‘‘ का सपना साकार होगा, बल्कि उद्योग को भी देश में मजबूती मिलेगी।

प्लाईवुड व पैनल निर्माताओं के पास अभी सुनहरा वक्त है कि इस वक्त का पूरा फायदा उठाया जाए।


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