2047 को ध्यान में रखकर बनाया गया बजट

यह शताब्दी के दूसरे चौथाई हिस्से का पहला बजट है और इस अवधि में वर्ष 2047 में विकसित भारत तैयार करने का लक्ष्य भी शामिल होगा। लिहाजा मुझे उस दिशा में 20 से अधिक वर्शा के लिए तैयारी करनी है।

मैं नए वित्त आयोग के सुझावों के साथ आगे बढ़ रही हूं और अगले पांच वर्षों के लिए योजना बनाने की आवश्यकता है। यह पांच वर्षों में पहला है। इस बजट का ध्यान स्थिर विकास को सतत बनाए रखना है।

बहुत सी वैश्विक अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं।

आयकर और जीएसटी राहत के बाद मेरा दृढ़ विश्वास है कि इन उपायों से लोगों को अधिक रकम बचाने और खरीदारी करने में मदद मिलेगी। इसके बाद ध्यान आर्थिक तरक्की पर रहना चाहिए। मैं कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती थी, क्योंकि किसी को नहीं पता कि वैश्विक स्तर पर क्या होने वाला है क्योंकि कई चुनौतियां आज भी बरकरार हैं।

निजी क्षेत्र से पूंजी निवेश

कंपनी कर में कटौती कर के हमने इसे आसान बना दिया है। आयकर में भी कर श्रेणियां दुरुस्त बनाई गई हैं। इसलिए मुझे लगता है कि उद्योग जगत को ही भारत की आर्थिक तरक्की में भाग लेने के तरीकों पर सोचना होगा।

विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए हमें कभी धीमे और कभी तेज भागना है

इसीलिए मैंने कहा कि इस बजट में एक साल का एजेंडा है जिसे फर्राटा कह सकते हैं और विकसित भारत की दिशा में मैराथन । लेकिन दोनों के बीच में पांच साल की समय-सीमा भी है।

यह कहना शब्दों की बाजीगरी भी है लेकिन ग्रामीण सुधार, आर्थिक क्षेत्र के रूप में शहरों, जल मार्गों के लिए हमारी योजनाएं तात्कालिक भी हैं और दीर्घकालिक भी। युवाओं को कौशल संपन्न बनाना, एआई से कृषि और उद्योगों तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी की उत्पादकता बढ़ाना आदि सभी का मिश्रण बजट में मिलेगा। पहले आपको खोजना होगा, फिर निकालना होगा, फिर उसे परिष्कृत करना होगा ताकि वे चीजें बनाई जा सकें जो सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और रोबोट्स के लिए आवश्यक हैं।

लेकिन कच्चे माल के लिए कहीं और पर निर्भर रहना हमें इस स्थिति तक ले आया है कि किसी भी छोटे निर्णय का उल्टा असर हम पर पड़ता है।

भ्रश्टाचार का मुद्दा

जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार अंतिम छोर के काम को बाधित करता है, उसे परियोजना को पूरा करने की उत्सुकता और प्रयास में नजर-अंदाज नहीं किया जा सकता। जैसे मनरेगा में था, कुछ राज्यों में जल जीवन मिशन में भी है। ऐसा भ्रष्टाचार परियोजना की मंशा को ही बिगाड़ सकता है। आप पाइप बिछा सकते हैं लेकिन उस स्रोत में पानी ही नहीं है, जहां से आना चाहिए। दसरे शब्दों में, जब आप देखते हैं कि लोग किसी अच्छे इरादे वाली परियोजना का दुरुपयोग कर सकते हैं, तो आपको उसे सुधारना होगा।

एम एस एमई का उन्नयन

जब मैं कहती हूं कि विनिर्माण को सतत विकास के स्तंभों में से एक बनाना है तो मैं केवल बड़े उद्योगों की बात नहीं करती हूं। सिक्के का एक पहलू है पीएलआई। उसके माध्यम से हम उन उद्योगों को देखते हैं जहां श्रमिक की बहुत जरूरत होती है और निर्यात की संभावना होती है। इसमें सेमीकंडक्टर, फोन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, वस्त्र आदि क्षेत्र हैं।

सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि हमारे निर्यात का 40 प्रतिशत एमएसएमई से होता है। मझोले उद्योग संभावनाओं के बावजूद बढ़ना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि वे एमएसएमई लाभ खो देंगे। हमने मानदंड बदले हैं। हम उन्हें एमएसएमई श्रेणी में रहते हुए भी मदद प्रदान करेंगे।

बजट बनाने में सभी का दृष्टिकोण अपनाने की कोशिस

किसी भी नए विचार को स्वीकार करने के लिए खुले मन का होना चाहिए। यही कारण है कि हम बहुत से लोगों से जुड़ रहे हैं, इसे वेबसाइटों पर डाल रहे हैं और कह रहे हैं श्अपने सुझाव दीजिएश्। यहां तक कि यदि आप व्हाट्सऐप पर संदेश भेजते हैं, तो हम उसे भी देखेंगे।