प्लाईवुड उद्योग का भविष्य बहुत उज्जवल है
- जून 10, 2025
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प्लाईवुड में वर्तमान परिस्थितियां
हालांकि पिछले कुछ सालों से प्लाईवुड उद्योग की रफ्तार धीमी हो गई है। लकड़ी की तेज होती कीमतों के अलावा, कम उम्र की लकड़ी से बनने वाले उत्पाद एमडीएफ और पार्टीकल बोर्ड द्वारा बाजार में धीरे-धीरे पैर पसारना भी इसके लिए जिम्मेवार माने जा सकते है।
आने वाले दिनों में फिर से प्लाईवुड अपनी चमक धमक कायम करेगा। इसकी कई वजह है। सबसे अहम वजह तो यह है कि बीआईएस मानक अनिवार्य होने से अब कम गुणवत्ता के प्लाईवुड के उत्पादन और वितरण में कभी आएगी।
वह उत्पादक जो प्लाईवुड को सस्ता करने के चक्कर में कम गुणवत्ता का माल बाजार में सप्लाई करते थे, उन पर अब रोक लगनी तय है। वह न तो खुद को ब्रांड के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। न ही उनकी कोशिश थी उद्योग में लंबे समय तक टिकने की। वह शार्ट टर्म मुनाफे की सोच से प्रेरित रहते थे। अब इससे उपभोक्ताओं में प्लाईवुड को लेकर एक विश्वास पैदा होगा। जो बाजार में सकारात्मकता का माहौल तैयार करेगा। गुणवत्ता मानक अनिवार्य होना बेहद जरूरी थे। लंबे समय से उद्योग में इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी।
दूसरा चाइना व अन्य देशों से कम गुणवत्ता का सस्ता प्लाईवुड भी बाजार में आ रहा था। उन उपभोक्तओं को जिन्हें प्लाई की ज्यादा समझ नहीं थी, वह इन सस्ते आयातित माल के झांसे में आ जाते थे। यह प्लाई कुछ समय बाद ही खराब हो जाती थी। इस तरह से लोगों का प्लाई से विश्वास ही उठता जा रहा था।

चंद गलत काम करने वाले प्लाईवुड निर्माताओं की वजह से पूरे उद्योग व खरीददारों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। बीआईएस मानक लागू होने से उन पर रोक लगेगी। अब हर उत्पादक को बी आई एस मानकों के अनुसार ही काम करना होगा। खरीददार को यह गारंटी होगी कि वह जिस उत्पाद के लिए भुगतान दे रहा है, उन्हें वह माल मिल भी रहा है। अब माल की गुण्वत्ता को लेकर कोई गड़बड़ी निम्नतम हो सकती है।
कच्चे माल की कमी बढ़ती जा रही है, यह कैसे पूरी हो सकती है?
यूक्लिप्टस और पाईन की लकड़ी आयात होने से कच्चे माल की कमी धीरे धीरे दूर हो रही है। आयात होने वाली ऑस्ट्रेलियन पाइन भी पापुलर की तरह मजबूत है, यह बहुत ही स्मूथ भी है। कोर अब तंजानिया और यूगांडा व लाउस से जैसे देशों से भारत में लगातार अच्छी क्वान्टिटी में आ रही है। इसके दो लाभ हो रहे हैं।
इन से कच्चे माल को लेकर घरेलू स्तर पर एग्रोफॉरेस्ट्री पर जो दबाव था, वह कम हो रहा है। मांग व आपूर्ति में संतुलन होने से स्थानीय स्तर पर भी कच्चे माल की उपलब्धता में सुधार होगा। आने वाले दिनों में कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर एक रूटीन बन जाएगा।

हालांकि लागत में बहुत बड़ा अंतर नहीं है। लेकिन इससेघरेलू स्तर पर कच्चे माल को लेकर जो दबाव है, वह कुछ हद तक कम होगा।
किसान भी उचित कीमतों की वजह से एग्रोफॉरेस्ट्री में उत्साहित हैं। जिससे लकड़ी का घरेलु उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। उद्योग द्वारा निजी स्तर पर और एसोसियेसन की ओर से भी एग्रोफोरेस्ट्री को बढ़ावा देने की कोशिसें हो रही है। जिनका प्रतिफल आने वाले दिनों में दिखने लगेगा।
उम्मीद है, अब कच्चे माल की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
पिछले कुछ समय से मांग में कमी देखी जा रही थी?
हां बाजार में मांग कम थी। अब मांग बढ़ेगी। फर्नीचर में भी क्यूसीओ लागू हो गया है।
अब उन्हें भी उच्च गुणवत्ता की प्लाई चाहिए होगी। उच्च गुणवत्ता की प्लाई बनाने वाले उत्पादकों के लिए यह एक अवसर है। उन्हें एक और बड़ा बाजार उपलब्ध हो गया है।
स्मार्ट सिटी विकसित हो रहे हैं। फ्लैट की मांग भी बढ़ती जा रही है। उत्पादकों के लिए यह नए अवसर लेकर आ रहे हैं। कह सकते हैं कि अब प्लाईवुड के निर्माण, गुणवत्ता व मांग में जो दिक्कत थी, वह धीरे धीरे दूर हो जाएगी।

लेकिन उत्पादन क्षमता का पुर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है
थोड़ा वक्त लगेगा। फिर सब ठीक हो जाएगा। जैसे जैसे मांग में सुधार आएगा, उत्पादन भी अपनी क्षमता तक पहुंच जाएगा। अभी कच्चे माल की कमी को दूर होने में थोड़ा समय लगेगा। भुगतान की समस्या से भी उद्योगपतियों को जुझना पड़ रहा है। इसके लिए भी हम सकारात्मक सोच रखे हुए हैं, थोड़ा वक्त निकलेगा तो उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा।
कुछ उद्योग ऐसे है, जिसमें अग्रिम भुगतान के बाद ही माल की आपूर्ति की जाती है। प्लाईवुड उद्योग में यह परंपरा नहीं रही। खासतौर पर यमुनानगर उद्यार माल बेचने में आगे रहा। लेकिन इसमें भी अब बदलाव आना लाजिमी है। रनिंग के पीटल की लागत बेतहासा बढ़ गई है। प्रायः सभी कच्चा माल नकद खरीदना पड़ रहा है। इसलिए भी उत्पादक कुछ सखती करने लगे हैं। अच्छि बात यह है कि वितरक भी उद्योग का सहयोग कर रहें है।
हर कोई अब उच्च गुणवत्ता का उत्पाद चाह रहे हैं। लोगों में जागरूकता आई है। जो इस उद्योग में पुराने और अनुभवी हैं, उन्होंने भी इस दिशा में पहल की है। वह अपने अनुभव और तजुर्बे से उद्योग का मार्ग दर्शन कर रहे हैं। अच्छी क्वालिटी के उत्पाद के लिए राह आसान होती जा रही है।
भविष्य कैसा है?
यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग एक बार फिर से अपनी धमक व चमक बनाएगा। क्योंकि यमुनानगर के पास धैर्य है, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है। इसके साथ ही उन्हें अपने उत्पादन की गुणवत्ता उच्च बनाए रखने का लंबा अनुभव है। वह रिस्क लेना जानते हैं। नए प्रयोग करने से पीछे नहीं हटते।
इस आधार पर हम कह सकते हैं कि आने वाले दिन प्लाईवुड के लिए खासकर यमुनानगर के लिए बहुत ही अच्छे होने वाले हैं। यह मान कर चलना चाहिए कि मुश्किल वक्त गुजर चुका है।
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