भारत के बेरोजगार स्नातक
- अक्टूबर 10, 2024
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क्या भारत के अधिकांश स्नातक बेरोजगार हैं। यह चौंकाने वाला तथ्य अर्थव्यवस्था सर्वेक्षण 2023-24 में सामने आया है। वह भी तब जबकि इस दशक के अंत तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह जर्मनी और जापान को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। लेकिन इस तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद एक चुनौती शिक्षित बेरोजगारों की बनी हुई है। 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण में यह कड़वा सच सामने आया है। भारतीय कॉलेजों से सीधे निकलने वाले लगभग दो में से एक स्नातक रोजगार के योग्य नहीं है।
क्या यह भारत के लिए एक चेतावनी है?
आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार लगभग 51 प्रतिशत युवा रोजगार के योग्य माने जाते हैं, इसका सीधा मतलब है कि दो में से एक स्नातक सीधे कॉलेज से निकलने पर आसानी से रोजगार के योग्य नहीं है। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि भारत की तेजी से बढ़ती आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है और उनमें से कई के पास आज की अर्थव्यवस्था में आवश्यक कौशल की कमी है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में प्रशिक्षुता कार्यक्रमों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कौशल अंतर उनमें से एक है। शैक्षणिक संस्थानों में सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं। इस तरह की और भी कई समस्याएँ हैं।
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कई लोगों को लगता है कि व्यावसायिक प्रशिक्षण अकादमिक शिक्षा से कम महत्वपूर्ण है। इसलिए हमारे युवा विश्वविद्यालय की डिग्री लेने में ज्यादा विश्वास रख रहे हैं। बजाए इसके कि वह कोई प्रशिक्षण लें। इसकी वजह यह है कि वहां से वह जो प्रशिक्षण लेंगे इससे उन्हें गैर-स्नातक कहा जाएगा।
कौशल विकास से परहेज करने वाले युवाः प्रशिक्षण कौशल विकास मंत्रालय की 2022-23 की रिपोर्ट कहती है कि 15 से 59 के बीच के बहुत कम भारतीय औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त हैं। कई भारतीय, कौशल विकास को अंतिम संभावना के रूप में देखते हैं, जो या तो औपचारिक शिक्षा में सफल नहीं हुए या जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी है।
यही कारण है कि मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट में शिक्षा रोजगार और कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्य आकर्षणों में भारतीय संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के छात्र ऋण के लिए वित्तीय सहायता और राज्य सरकारों और उद्योगों के साथ एक नया सहयोगी कौशल कार्यक्रम शामिल है। इस पहल का उद्देश्य अगले 5 वर्षों में लगभग 20 लाख युवा व्यक्तियों को कौशल प्रदान करके उनके रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना है।
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