एग्रीस्टैकर: चरण बद्ध तरिके से उर्वरक सब्सिडी पर अंकुश
- मार्च 11, 2026
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वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कृषि क्षेत्र के लिए विकसित की जा रही डिजिटल अधोसंरचना “एग्रीस्टैक” को भावनात्मक रूप से “अगला यूपीआई” करार दिया है। हालांकि Unified Payments Interface (यूपीआई) की अवधारणा अपेक्षाकृत सरल हैकृयह उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ती है और गूगल पे या फोनपे जैसे ऐप के माध्यम से सुलभ हैकृलेकिन एग्रीस्टैक कहीं अधिक महत्त्वाकांक्षी और जटिल पहल है। यह केंद्र और राज्य सरकारों की प्रशासनिक तथा आईटी क्षमताओं की वास्तविक परीक्षा लेने वाला प्रोजेक्ट है।
‘एग्रीस्टैक‘ का उद्देश्य देश के लगभग 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल आईडी तैयार करना और तीन प्रमुख डेटाबेस विकसित करना है- किसान पंजीकरण, भू-अभिलेख, फसल डेटा। इसका मकसद किसानों को न्यूनतम कागजी कार्रवाई के साथ सीधे लाभ और सेवाओं तक पहुंच प्रदान करना है, ताकि उन्हें बार-बार सेवा प्रदाताओं के पास न जाना पड़े।
केंद्र सरकार ने सितंबर 2024 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी। अब तक 8.62 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और लक्ष्य मार्च 2027 तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का है।
एग्रीस्टैक की सफलता के लिए सटीक और सूक्ष्म डेटा संग्रह बेहद जरूरी है। देश के कई हिस्सों में ड्रोन तकनीक से कृषि भूमि की डिजिटल मैपिंग में प्रगति हुई है, लेकिन वास्तविक भूमि स्वामित्व की पहचान करना अब भी जटिल है। करीब 20 प्रतिशत किसान परिवार पट्टे या बंटाई पर खेती करते हैं, जबकि जमीन के मालिक अक्सर शहरों या विदेशों में रहते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि लगभग 60 प्रतिशत उर्वरक उपयोग उन किसानों द्वारा किया जाता है जिनके नाम पर जमीन दर्ज नहीं है।
आगामी वित्तीय वर्ष में उर्वरक सब्सिडी का बजट 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यदि भूमि, फसल और उर्वरक उपयोग के डेटा को जोड़ा जाए, तो न केवल सब्सिडी खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधारी जा सकती है।
भ्ंतलंदं में एग्रीस्टैक के प्रयोग के तहत भूमि, उर्वरक उपयोग और फसल डेटा को जोड़ने से उल्लेखनीय बचत दर्ज की गई। विशेष रूप से यूरिया के उपयोग में कमी आई, जिस पर अत्यधिक सब्सिडी के कारण असंतुलित उपयोग बढ़ गया था।
एग्रीस्टैक उर्वरक सब्सिडी वितरण में एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत बदलाव ला सकता है- जहां सब्सिडी उर्वरक निर्माताओं की बजाय सीधे किसानों को दी जाए।
जहां एक ओर, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और उपयोग के आधार पर सब्सिडी का अधिक सटीक समायोजन संभव होगा। वहीं दुसरी ओर यूरिया की कालाबाजारी पर रोक लगती चली जाएगी।
सुरेश बाहेती
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