अगस्त तक सब कुछ ठीक होने की संभावना, आयात रूकने का सकारात्मक असर आएगा
- जून 10, 2025
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बीआईएस ने जो गुणवत्ता मानक अनिवार्य किए है, इससे कम गुणवत्ता की सस्ती लकड़ी उत्पादों के उत्पादन और आयात पर रोक लगेगी। जाहिर है, इसका असर बाजार पर सकारात्मक आएगा। बीआईएस अब मानकों को लेकर सक्रिय हो रहा है। इसके भी अच्छे परिणाम निकलेंगे। यह मानना है, यमुनानगर के प्लाईवुड व एमडीएफ निर्माता अमित गोयल का।
बी आई एस मानकों पर आपकी राय?
क्यू सी ओ लागू होने के बाद, अब बीआईएस भी मानकों को लागू कराने को लेकर गंभीर है। उत्पादकों को भी चाहिए कि अब पारदर्शी तरीके से काम करें।
हां यदि बीआईएस गुणवत्ता मानकों को तय करते हुए, जैसी लकड़ी वैसी ही गुणवत्ता मानक तय कर दें तो समझ अधिक बेहतर हो सकती है। यह दो तरह से हो सकता है। जैसी लकड़ी की गुणवत्ता है, उसी तरह का उत्पाद बनाओ। इस पर ग्रेड लगा दो। लकड़ी की प्रकृति और घनत्व के हिसाब से फर्निचर, कामर्शियल या इंडस्ट्रीयल ग्रेड डाल दो। इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में एक मुश्त जानकारी मिल सकती है।
जैसे गर्जन की लकड़ी से जो प्लाईवुड तैयार होती है, उसकी मजबूती अलग होती है। यही स्थिति सफेदा में भी है। क्योंकि इनका घनत्व अधिक होता है। लेकिन यह मजबूती पापलुर या दूसरी लकड़ी से नहीं आ सकती। कहना यह है कि उत्पाद की गुणवत्ता का प्रतिफल लकड़ी से आता है। तो गुणवत्ता मानकों का आधार लकड़ी होना चाहिए। इसी पैमाने के हिसााब से ही ग्रेड तैयार होने चाहिए।
इस तरह की ग्रेडींग से फायदे?
एक तो इससे उपभोक्तओं के लिए यह पता करना आसान हो जाएगा कि वह किस ग्रेड की लकड़ी का उत्पाद खरीद रहा है। और यह तय कर पाएगा कि उसकी आवश्यकता किस ग्रेड में पूरी हो रही है।
उत्पादक जब अपने बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद बनाएंगे तो पोपुलर उत्पादक किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। वर्तमान में, कृशि वाणिकी में पोपलर किसानों की पहली पसंद बना हुआ हैं। पोपलर से निर्मीत उत्पादों में बाजार की रूचि बढ़ने से इसकी मांग में इजाफा होगा और अंततः किसान लाभान्वित होंगे।

देश की पहली जरूरत अपने किसानों को लाभ पहुंचाते हुए उन्हें समर्थ बनाना है। इस तरह की पहल से जहां एक ओर किसानों की आय बढ़ेगी वहीं उद्योग को भी काम सुचारू रूप से संचालन करने में थोड़ी राहत मिलेगी।
दुकानदारों पर बी आई एस मानकों पर कितना बाध्यता हैं?
उद्योगपति तो बीआईएस मानकों के अनुसार उत्पाद तैयार कर लेंगे। लेकिन दुकानदारों व डीलरों का क्या? वह फेक ब्रांड या कम गुणवत्ता के उत्पाद को उच्च गुणवत्ता वाला बता कर और बेच कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।
इस पर रोक लगाने के लिए दुकानदार को इस बारे में जागरूक करना पड़ेगा। उन्हें भी कड़ी हिदायत दी जानी चाहिए कि यदि उसके यहां से जो सैंपल लिया, अगर वह मार्किंग किए गए ग्रेड में पास नहीं हुआ, तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। यदि ऐसी बाध्यता बना दी जाए, तो इससे दुकानदार की उस सोच पर रोक लगेगी, जो उसे गलत ब्रांड का हल्का माल बेचने पर मजबूर करती है।
क्योंकि लकड़ी उद्योग में उत्पाद को सस्ता करने के लिए, गुणवत्ता मानकों से खिलवाड़ करने वालों की कमी नहीं है। एक जगह या प्रदेश में यदि सख्ती होती है, तो दूसरी जगह के कुछ उत्पादक सस्ता प्लाईवुड व अन्य लकड़ी उत्पाद तैयार करना शुरू कर देंगे।
एक कलस्टर में फैक्टरी संचालक ऐसा नहीं कर सकते। उन पर रोक लगाना अपेक्षाकृत आसान है। ज्यादातर लायसेंस धारक उत्पादक, मानकों के अनुसार ही उत्पाद तैयार कर रहे हैं। लेकिन दुकानदारों के पास तो विकल्प है, वह कहीं से भी या किसी से भी माल लेकर बेचना शुरू कर सकते हैं।
इस बारे में बीआईएस पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। इसकी एक वजह यह भी हो सकता है कि बीआईएस का अधिकार क्षेत्र उत्पादक है, दुकानदार नहीं है। लेकिन अगर ऐसा है तो बीआईएस को अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाना चाहिए। साथ ही दुकानदारों को जागरूक और सावधान करना होगा।
यह कैसे संभव है?
यह मुश्किल भी नहीं है। बीआईएस को जागरूकता के लिए डीलर व दुकानदारों के सेमिनार ही तो करने हैं। यह सेमिनार हमारे माध्यम से कराए जा सकते हैं। और महत्वपूर्ण रुप से इस तरह के कार्यक्रम को प्रचारित किया जाना चाहिए।

लकड़ी उत्पाद व प्लाईवुड के रिटेल व होलसेल डीलर्स बीआईएस के दायरे से बाहर हो सकते है, इसलिए भी वह बीआईएस के जागरूकता कार्यक्रम से दूरी बनाए रखते हैं।
जो भी मानक मंथन हो रहें है, इसमें भी कोशिश थी कि डीलर भी आएं। लेकिन वह नहीं आए। क्योंकि उन्हें अभी इसकी जरूरत महसूस नहीं हो रही।
समाधान के लिए विकल्प क्या हैं?
हमें इस समस्या का समाधान खोजना होगा। उन्हें ईमेल से गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी जा सकती है। उत्पादकों के पास लगभग सभी डीलर व विक्रेताओं के ईमेल व फोन नंबर है। सब कुछ संभव है। बस जागरूकता के कार्यक्रम डीलर व विक्रेता से शुरू होने चाहिएं।
बीआईएस उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए छोटे छोटे विज्ञापन भी बनाए, हम सोशल मीडिया के अपने चैनलों से भी इसे प्रचारित और प्रसारित करेंगे। कम से कम समय में सभी तक यह जानकारी पहुंचायी जा सकती है। सब कुछ संभव है,बस इस दिशा में कोशिश करनी है।
आफिशियल बीआईएस वीडियो संदेश को हर कोई देखेंगे । टीवी एक बहुत बड़ा और कारगर माध्यम है, जो सभी को संदेश देने के लिए कारगर माध्यम साबित हो सकता है।
इसमें उत्पादक की क्या भूमिका हो सकती हैं?
हालांकि बीआईएस का आग्रह है कि लकड़ी उत्पादक ही खुद डीलर के यहां प्रचार करें। इसके लिए वह प्रचार सामग्री तैयार करें। यह भी हम कर सकते हैं। उत्पादक यह जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है। हम अपने दुकानदार के यहां साइन बोर्ड व पंपैलेट लगा सकते हैं। जिसमें बीआईएस की अनिवार्यता, प्लाईवुड के मानकों की विस्तृत जानकारी और बीआईएस केयर ऐप आदि के बारे में लिखा जा सकता है।
हमें उपभोक्ताओं को जागरूक करना है। इस दिशा में हम भी अपने निजी और एसोसिएशन के माध्यम से कदम उठाएंगे।
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