भारतीय सरकार मौजूदा BIS शुल्क रियायतों को MSMEs BIS fee concessions for एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) के लिए वर्तमान मई 2026 की समयसीमा से आगे अगले तीन वर्षों तक बढ़ाने की योजना बना रही है। BIS द्वारा इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव भी भेजा गया है।

इस विस्तार का उद्देश्य वर्तमान राहत संरचना को जारी रखना है, जिसके तहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम उद्यमों को क्रमशः 80 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और 20 प्रतिशत शुल्क में छूट मिलती है, ताकि विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके। 

वर्तमान रियायत संरचना (मई-2026 तक) 

  • माइक्रो उद्यमर:80 प्रतिशत शुल्क रियायत
  • स्मॉल उद्यमर:50 प्रतिशत शुल्क रियायत
  • मीडियम उद्यमर:20 प्रतिशत शुल्क रियायत
  • स्टार्ट-अपर:80 प्रतिशत शुल्क रियायत
  • महिला-नेतृत्व वाले उद्यमर:उनके मूल MSME दर पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत की रियायत 

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भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इन आर्थिक प्रोत्साहनों को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

इस विस्तार का उद्देश्य छोटे व्यवसायों को गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने में निरंतर सहायता देना है, क्योंकि भारत विनिर्माण में “क्वालिटी-फर्स्ट” दृष्टिकोण पर जोर दे रहा है। 

यह विस्तार फिलहाल विचाराधीन है और यदि स्वीकृत होता है तो यह BIS प्रमाणन के लिए MSMEs और स्टार्ट-अप्स को मई 2026 की मौजूदा समय सीमा के बाद भी उल्लेखनीय शुल्क राहत प्रदान करेगा, जिससे उनके विकास और गुणवत्ता मानकों को मजबूती मिलेगी।


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