दावोस में वैश्विक निवेश की प्रतिस्पर्धा
- जनवरी 21, 2026
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जहाँ बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ते टैरिफ तनाव और AI आधारित व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता की तलवार लटका रहे हैं। इसी माहौल में, भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल, दावोस में, देश को एक स्थिर और दीर्घकालिक विकास गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में है।
“ए स्पिरिट ऑफ डायलॉग” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 नेता शामिल होंगे, जिसमें भारत सबसे सक्रिय और दृश्यमान प्रतिनिधिमंडलों में से एक रहेगा।
हालांकि फिर भी, दावोस में अधिकतम ध्यान संभवतः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर रहेगाक-वेनेजुएला घटना, नए व्यापार युद्ध और ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक बयानबाज़ी की पृष्ठभूमि में।
भारत से 80 से अधिक सीईओ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के 56वें वार्षिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए 19 से 23 जनवरी के बीच दावोस पहुँचेंगे। इनके साथ वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और 9 राज्यों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगेक-यह वैश्विक निवेशकों और निर्णयकर्ताओं के साथ भारत के रणनीतिक संवाद को रेखांकित करता है।
भारत का कॉरपोरेट प्रतिनिधिमंडल पारंपरिक उद्योग समूहों से लेकर नई अर्थव्यवस्था की कंपनियों तक फैला होगा। अपेक्षित प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल हैं: एन. चंद्रशेखरन (टाटा संस) सुनील मित्तल (भारती समूह) सज्जन जिंदल (JSW समूह) अनिश शाह (महिंद्रा समूह) नंदन नीलेकणी (इन्फोसिस चेयरमैन) इसके साथ ही अगली पीढ़ी के कॉरपोरेट नेता भी शामिल होंगे, जैसे: सुधर्शन वेंणु (TVS मोटर) शश्वत गोयनका (RPSG समूह) पार्थ जिंदल (जिंदल समूह) राज्य भी वैश्विक निवेश की दौड़ में
भारत के कई राज्य प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं, जिनमें शामिल हैंरू महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड, केरला। इनमें से कुछ प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में हैं, जैसे: देवेंद्र फडणवीस, एन. चंद्रबाबू नायडू, मोहन यादवष् हेमंत सोरेन, हिमंत बिस्वा सरमा। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्री जैसे: अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी, किनजारापु राममोहन नायडू भी शिरकत करेंगे।
स्विस आल्प्स के इस कस्बे में वैश्विक निवेश की प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलेगी। वैश्विक नेतृत्व का केंद्र WEF 2026 में शामिल होंगे: G7 के 6 नेता 65 राष्ट्राध्यक्ष / प्रधानमंत्री, के साथ-साथ 850 शीर्ष CEO और चेयरपर्सन 100 से अधिक यूनिकॉर्न और प्रौद्योगिकी नेता।
दावोस वह स्थान है जहां विकास, प्रौद्योगिकी और भू-राजनीति के संवाद किए जाते हैं। वैश्विक विकास का अगला अध्याय पारंपरिक बाज़ारों से आगे बढ़कर ग्लोबल साउथ में आकार ले रहा है। अपनी जनसंख्यीय स्केल, प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार क्षमता के साथ भारत एक सशक्त दावेदारी पेश कर रहा है।
वैश्विक निवेशकों की नज़र भारत पर ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक निवेशकर: उन्नत देशों में धीमी आर्थिक वृद्धि, बढ़ते संप्रभु ऋण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, दीर्घकालिक विकास अवसरों की तलाश में हैं।
भारत स्वयं को स्थिर, विस्तारशील और निवेश-योग्य अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह अवसर भुनाने की कोशिश कर रहा है।
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