भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 23 अप्रैल को जारी ‘अर्थव्यवस्था स्थिति’ रिपोर्ट में आगाह किया है कि पश्चिम एशिया में लगभग दो महीने से चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति में आ रही बाधा आगे चलकर मांग में भारी गिरावट का रूप ले सकती है। ऐसे में इस स्थिति का बहुत ही बारीकी और सावधानी से आकलन करने की दरकार है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्ध विराम से वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिली है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद, अर्थव्यवस्था को ऐसे झटकों का सामना करने में, मदद करेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह संघर्ष जारी रहता है और आपूर्ति श्रृंखला जल्द बहाल नहीं होती हैं, तो इससे घरेलू अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

मार्च में विनिमय दर में तेज गिरावट पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि अस्थायी युद्ध विराम की घोषणा और आरबीआई के उपायों से अप्रैल की शुरुआत में रुपये को कुछ सहारा मिला। मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपया 4 फीसदी से ज्यादा नरम हो गया था और यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई थी। इसके बाद नियामकीय उपायों से इसकी चाल बदल गई। अब जब कुछ पाबंदियां हटा ली गई हैं तो रूपये में फिर गिरावट देखी जा रही हैं।

‘अर्थव्यवस्था की स्थिति‘ रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने कई क्षेत्रों में मजबूती दिखाई जबकि अन्य क्षेत्रों में सुस्ती देखने को मिली है। रिपोर्ट में आर्थिक गति धीमी होने के शुरुआती संकेतों की ओर इशारा किया गया है, जो बंदरगाह कार्गा, हवाई यातायात और परचेजिंग मैनेजरों के दृष्टिकोण जैसे कुछ चुनिंदा संकेतकों में भी स्पष्ट तौर पर दिखाई देते हैं।

रिपोर्ट में आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में भी गिरावट का उल्लेख किया गया है। उर्वरक, कच्चा तेल, कोयला और बिजली के उत्पादन में गिरावट से बुनियादी उद्योगों का उत्पादन वृद्धि 19 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।

इसमें कहा गया कि आरबीआई के भविष्योन्मुखी सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर उपभोक्ता विश्वास कमजोर पड़ रहा है, कारोबारी आशावाद में नरमी आई है और साथ ही लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि आपूर्ति से जुड़ी रुकावटों से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए गए त्वरित आपूर्ति प्रबंधन से महंगाई के दबाव को काबू में रखने में मदद मिली है।


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