अमेरिका द्वारा अप्रत्याशित रूप से होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करने के निर्णय के बाद भविष्य (2026) की राह अनिश्चित नजर आ रही है।

ईरान ने भी अमेरिका की बंदी की प्रतिक्रिया में होर्मुज स्ट्रेट को एक बार खोलकर दोबारा बंद कर दिया है। ऐसे में राजनीतिक और आर्थिक हालात दो सप्ताह पहले युद्ध विराम के शुरुआती समय की तुलना में कहीं अधिक बिगड़ चुके हैं।

यदि, जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) सक्रिय रूप से राजनीतिक नेताओं को दरकिनार कर रही है, तो साझा आधार खोज पाना कठिन है।

अमेरिकी नाकाबंदी ईरान की निर्यात आय और खाद्य पदार्थ, अनाज तथा दवाइयों जैसे आवश्यक आयातों को निस्संदेह सीमित करेगी, जिससे उसके लोगों का कष्ट बढ़ेगा। लेकिन यह भी सच है कि, दशकों से बढ़ती पाबंदियों ने ईरानी जनता को कठिनाइयों के प्रति अभ्यस्त बना दिया है। इस स्थिति में, एक और नाकाबंदी झेलना उनके लिए बहुत कठिन नहीं होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पहले ही 2026 की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 3.3 फीसदी से घटाकर 3.1 फीसदी कर दिया है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया, जो आर्थिक वृद्धि के लिहाज से सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक है, नाकाबंदी का सबसे अधिक खमियाजा भुगत रहे हैं। खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाला 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन एशिया के लिए होता है।

यह तथ्य कि ईरान का 90 फीसदी तेल चीन जाता है, चीन और अमेरिका के बीच संबंधों को और बिगाड़ने का जोखिम बढ़ाता है, जिसके परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। युद्ध विराम और नाकाबंदी ने जमीनी हकीकतों को जितना बदला है, उससे 2026 का साल अनिश्तिताओं से उबरता नजर नहीं आ रहा है।

युद्ध विराम से जो रसायनों मे नरमी दिखने लगी थी, नाके बंदी के समाचार आने के बाद, उछलकर फिर से अपने उच्च स्तरों पर पहुंचने लगे हैं।


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