Straits Research (2025) के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्लाईवुड बाजार का मूल्य 62.67 अरब अमेरिकी डॉलर आँका गया है, जो 2033 तक 104.53 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है - अर्थात् 6.60 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR)।

इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं:

  1. ग्रीन कंस्ट्रक्शन में उछालः

विश्वभर के बिल्डर अब नेट-ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए टिकाऊ सामग्री को प्राथमिकता दे रहे हैं। 149 से अधिक देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन को घटाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे पर्यावरण-अनुकूल प्लाईवुड पारंपरिक सामग्रियों जैसे सीमेंट और स्टील का विकल्प बन रहा है।

  1. तेज़ी से शहरीकरण और आधारभूत विकासः

भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे देशों में निर्माण क्षेत्र में भारी निवेश जारी है। उदाहरण के लिए, चीन का निर्माण निवेश 2030 तक 13 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।

  1. नवाचारयुक्त उत्पादों की मांगः

अग्नि-रोधी, जलरोधी और फॉर्मल्डिहाइड-रहित (Formaldehyde-free) प्लाईवुड की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। 2025 में सॉफ्टवुड प्लाईवुड 45.1 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे लोकप्रिय उत्पाद रहेगा।

  1. ई-कॉमर्स का विस्तारः

ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म अब प्लाईवुड वितरण का बड़ा माध्यम बन रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर निर्माता सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँच पा रहे हैं।

हालाँकि, लकड़ी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सख्त पर्यावरणीय नियम और सप्लाई चेन में बाधाएँ उद्योग के लिए चुनौती बने हुए हैं।


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