अवैध निर्माण के नुकसान और तकनीकी इलाज
- अक्टूबर 15, 2025
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अनियंत्रित और अवैध निर्माण से शहरी इलाकों में होने वाली समस्याएं शहरी संसाधनों के प्रबंधन और प्रशासन में ही दिक्कत पैदा नहीं करतीं बल्कि शहरवासियों के जीवन की सुगमता और सामाजिक समरसता में भी व्यवधान डालती हैं।
अवैध एवं अनधिकृत इमारतों से कई त्रासद दुर्घटनाएं भी हो चुकी है। ये अवैध निर्माण पर्यावरण पर प्रतिकूल असर डालते हैं, जीवन की गुणवत्ता बिगाड़ते हैं और कुछ मामलों में तो ऐसा नुकसान कर देते हैं, जिसकी भरपाई ही नहीं हो सकती। यह संकट बहुत भयावह है, इसलिए अधिक समय तक इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब यह अति आवश्यक हो गया है कि इन निर्माणों से जुड़े नियम सख्त बनाए जाएं।
इस तरह के अवैध निर्माण के बड़े आर्थिक एवं पर्यावरणीय दुष्परिणाम दिखते हैं। पहली बात, कर राजस्व का बड़ा नुकसान होता है क्योंकि इस तरह की संपत्तियों की रजिस्ट्री ही नहीं होती। दूसरी बात, अवैध निर्माण से अनियोजित विस्तार होता है, जिससे सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं एवं संसाधनों पर बोझ बढ़ता है। उनके लिए संसाधन और सुविधाएं देने पर अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है। इसके अलावा इन ढांचों को गिराने के भी नुकसान हैं।
इनसे वित्तीय बोझ बढ़ता है और पर्यावरण को नुकसान भी होता है। अवैध निर्माण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की अनदेखी नहीं की जा सकती।
ये इमारतें नियमों का उल्लंघन कर, अक्सर संरक्षित क्षेत्रों, हरित क्षेत्रों या बाढ़ की आशंका वाले इलाकों का अतिक्रमण कर खड़ी कर दी जाती हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे भी कई गुना बढ़ जाते हैं। उदाहरण के लिए अस्थिर भूमि या बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में बनी इमारतें वहां रहने वाले सभी लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं।
हम शहरीकरण की अभूतपूर्व रफ्तार के लिए तैयार हो रहे हैं, इसलिए सुनिश्चित करना होगा कि भूमि पर अवैध निर्माण तथा उसके अवैध इस्तेमाल पर अंकुश लगे। हमारी रणनीति आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक रूप से टिकाऊ रहने के तीन स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए।
कानून सख्ती से लागू करने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और अवैध निर्माण के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में स्थानीय प्रशासन एवं सरकार की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शहरी स्थानीय निकायों को जोनिंग और भवन उपनियम अद्यतन करने चाहिए और उन्हें अधिक पारदर्शी बनाना चाहिए। मंजूरी, निरीक्षण और शिकायत निवारण के लिए ऑनलाइन प्रणाली अपना कर प्रशासन की जवाबदेह एवं सुगम व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
लोगों को अवैध निर्माण से पर्यावरण को होने वाले खतरों के बारे में समझाना और पर्यवारण के अनुकूल शहरी नियोजन के लिए प्रोत्साहन तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। अवैध निर्माण की शिकायत करने एवं सूचना देने में नागरिक समाज सक्रिय भूमिका निभा सकता है मगर इसके लिए सरकारी तंत्र में विश्वास रहना चाहिए और यह भरोसा भी होना चाहिए कि शिकायत होने पर आवश्यक कार्रवाई जरूर होगी।
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