राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण का मसौदा तैयार करने से पहले किए गए एक परीक्षण सर्वेक्षण में पाया गया कि वेतन, वित्तीय संपत्तियों से आमदनी, गहनों पर खर्च या कितना आयकर चुकाया आदि का खुलासा करने में लोग हिचकिचाते हैं।

बड़े पैमाने पर किए जाने वाले सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों में स्पष्टता, प्रवाह और सर्वेक्षण उपकरणों की संरचना से संबंधित मुद्दों की पहचान करने के लिए फील्ड में कर्मचारियों की तैनाती से पहले यह पूर्व-परीक्षण अभियान एक मानक प्रक्रिया है। इसमें सामने आया कि लगभग सवालों का जवाब देने वाले 95 प्रतिशत लोगों ने विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय के बारे में जानकारी देने में झिझक महसूस की।

आमतौर पर माना जाता है कि इस डेटा को एकत्र करना बहुत मुश्किल है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अधिकांश लोग खुद अपनी आय का खुलासा नहीं करना चाहते हैं।

पूर्व-परीक्षण अभियान से यह भी पता चला कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवार खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर और आय को कम करके बताते हैं। इसके अलावा, वित्तीय संपत्तियों की जानकारी को याद रखना या सटीक रूप से बताना उत्तरदाताओं के लिए मुश्किल पाया गया, क्योंकि उन्हें बचत खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य वित्तीय संपत्तियों से मिलने वाले व्याज के बारे में जानकारी नहीं होती है।

एनएसओ फिलहाल अगले साल फरवरी में घरेलू आय पर पहला अखिल भारतीय सर्वेक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसलिए, सर्वेक्षण के इन मुख्य प्रश्नों के प्रति उत्तरदाताओं द्वारा गैर-जिम्मेदारी दिखाने से सर्वेक्षण के सफल संचालन में बाधा आ सकती है।

एनएसओ ने अपने नौवें (1955), 15वें (1959), 19वें (1964) और 24वें (1969) दौर (जुलाई 1969-जून 1970) में घरेलू आय पर जानकारी एकत्र करने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों द्वारा गैर-जिम्मेदारी दिखाने के कारण यह कवायद अधूरी ही रह गई।

इसलिए, पहले किए गए प्रयासों के परिणाम से बचने के लिए एनएसओ अभी से पुख्ता तैयारी करने में जुटा है।


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