भारत में प्लाईवुड की मांग बढ़ने की क्या संभावनाएं हैं

हम चीन से 20 गुना कम प्लाईवुड का उत्पादन करते हैं, जो अभी भी बहुत कम है। हमारी आबादी 1.4 अरब है, जो दुनिया की सबसे बड़ी है। अगर हम अगले दस साल में अपना उत्पादन दस गुना भी बढ़ा लें, तो भी हम चीन के वर्तमान उत्पादन का केवल आधा ही पहुंच पाएंगे। प्रति व्यक्ति आधार पर देखें तो भारत में औसतन केवल तीन वर्ग फुट प्लाईवुड का उत्पादन होता है। ये सभी तथ्य साफ तौर पर दिखाते हैं कि भारत के प्लाईवुड बाजार में आने वाले समय में जबरदस्त संभावनाएं हैं। इसके लिए हमें खुद को अच्छी तरह तैयार करना होगा।

कुछ लोगों का मानना है कि कच्चे माल की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है। क्या आप सहमत हैं?

नहीं, मैं ऐसा नहीं मानता। देश में लकड़ी का उत्पादन बढ़ रहा है। किसान अब समझ रहे हैं कि एग्रोफॉरेस्ट्री से वे प्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपये कमा सकते हैं। इसमें पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती। यही कारण है कि एग्रोफॉरेस्ट्री तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

यूकेलिप्टस की खेती बढ़ रही है, क्योंकि यह केवल चार साल में ही आय देना शुरू कर देता है। इसलिए किसान लंबे समय तक फल देने वाले पेड़ों के बजाय यूकेलिप्टस और पॉपलर की ओर अधिक झुक रहे हैं। हम जहां-जहां अपनी इकाइयां चलाते हैं, जैसे पंजाब और कर्नाटक, वहां एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा दे रहे हैं।

चीन अपने कच्चे माल के लिए क्या मॉडल अपना रखा है?

चीन में एग्रोफॉरेस्ट्री बड़े पैमाने पर पहाड़ी और बंजर भूमि पर भी की जाती है। हम भारत में भी इस प्रयोग को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। एग्रोफॉरेस्ट्री से न केवल हमारे उद्योग को कच्चा माल मिलेगा बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। वास्तव में चीन में प्रदूषण नियंत्रण में भी एग्रोफॉरेस्ट्री की बड़ी भूमिका है। भारत में भी यह प्रयोग चल रहा है और यहां भी एग्रोफॉरेस्ट्री बड़ी भूमिका निभाएगी।

इस पहल के लिए आप किसानों से कैसे जुड़ते हैं?

हमने किसानों के साथ समन्वय के लिए एक समर्पित टीम बनाई है। उन्हें बताया जाता है कि एग्रोफॉरेस्ट्री कैसे करें। हम उन्हें पौधे उपलब्ध कराते हैं और समय-समय पर तकनीकी मदद भी देते हैं ताकि वे इसे सही तरीके से प्रबंधित कर सकें। हर वुड-बेस्ड इंडस्ट्री यूनिट को इस मॉडल को अपनाना चाहिए। इससे देश में लकड़ी का उत्पादन बढ़ेगा और प्लाईवुड उद्योग कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा।

उत्तर प्रदेश के लिए आपके भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

यूपी जनसंख्या के लिहाज से बड़ा राज्य है और यहां व्यापारिक अवसर भी बहुत हैं। राज्य सरकार भी प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जो काफी उत्साहजनक है। स्वाभाविक रूप से हम भी इसका लाभ उठाना चाहेंगे। जहां तक हमारी बात है, यूपी में इकाई स्थापित करना हमारी भविष्य की योजनाओं में है। हालांकि, अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

लाईवुड क्षेत्र में गुणवत्ता को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?

प्लाईवुड की एक बड़ी चुनौती यह रही है कि यह लंबे समय तक असंगठित क्षेत्र रहा है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, क्योंकि कुछ निर्माता मानकों पर ध्यान नहीं देते और उपभोक्ता को नुकसान होता है। लेकिन अब यह समस्या दूर हो रही है क्योंकि भारत सरकार ने फब्व् (क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर) के तहत गुणवत्ता मानक लागू किए हैं। अब हर किसी को इन मानकों का पालन करना होगा। उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलेंगे और उद्योग पर उनका भरोसा बढ़ेगा। यह प्लाईवुड और संबंधित उत्पादों जैसे एमडीएफ, पार्टिकल बोर्ड और लैमिनेट्स के लिए एक सकारात्मक बदलाव है।

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उद्योग के लिए QCO कितना महत्वपूर्ण है?

QCO बिल्कुल आवश्यक है ताकि उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलें। इससे घटिया उत्पाद बनाने वाले निर्माता बाजार से बाहर हो जाएंगे-जो उपभोक्ता और उद्योग दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। असली निर्माता स्वाभाविक रूप से इसका लाभ उठाएंगे।

कुछ लोगों को डर है कि QCO व्यवसाय के लिए बाधा बन सकता है। आपका क्या मानना है?

नहीं, इसमें कोई कठिनाई नहीं है। अगर कोई ईमानदारी से काम कर रहा है, तो वह एक महीने के भीतर लाइसेंस प्राप्त कर सकता है। उद्योग को QCO को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। इसका एकमात्र उद्देश्य उद्योग में गुणवत्ता लाना है। केवल जब हम QCO को सही ढंग से लागू करेंगे, तभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना पाएंगे।

आपके पिता पद्मश्री सज्जन भजनका उद्योग जगत का बड़ा नाम हैं। आपने उनसे क्या मूल्य सीखे हैं?

मेरे पिता का मंत्र है-ईमानदारी और कड़ी मेहनत। उन्होंने हमें सिखाया कि अगर हम इस दर्शन का पालन करें, तो सफलता निश्चित है। उन्होंने हमें और हमारे साथ काम करने वाले सभी लोगों को यह भी सिखाया कि उपभोक्ता हमेशा हमारे व्यवसाय के केंद्र में होना चाहिए। उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें निरंतर काम करना होगा। साथ ही हमें अपने देश और समाज के प्रति भी जवाबदेह रहना है, और उस जिम्मेदारी को हम पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।

भविष्य के लिए आपकी बाजार रणनीति क्या है?

हम एक स्पष्ट रणनीति के साथ काम करते हैं। हमारा ध्यान उपभोक्ताओं, आर्किटेक्ट्स, डीलरों और कॉन्ट्रैक्टर्स तक सीधे पहुंचने पर है। हम उनसे सक्रिय रूप से जुड़ते और उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। हमारे पास दो लाख कारपेंटरों का डाटा है और हम 20,000 आर्किटेक्ट्स के साथ काम कर रहे हैं। हम एक सुव्यवस्थित विज्ञापन नीति अपनाते हैं और हमारा मुख्य फोकस ग्राहकों की समस्याओं को तुरंत हल करने पर रहता है। नए उत्पाद लाना और नवाचार में प्रयोग करना हमेशा हमारी प्राथमिकता है। जहां भी हम मौजूद हैं, उपभोक्ताओं को सबसे अच्छा अनुभव देने का प्रयास करते हैं।

अंत में, आपके अनुसार इस उद्योग की चुनौतियों से निपटने की कुंजी क्या है?

यह बहुत सरल है-जब तक हम उपभोक्ताओं को सही जानकारी देते रहेंगे, जो उत्पाद हम बेचते हैं उसके बारे में पारदर्शी रहेंगे, और अपने दृष्टिकोण में ईमानदार रहेंगे, तब तक कोई भी चुनौती हमारे लिए कठिन नहीं होगी।


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