केंद्र सरकार जीएसटी को और ज्यादा आसान व तर्कसंगत बनाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए दो मुख्य स्लैब (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) करने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर प्लाईवुड उद्योग को इससे खासी उम्मीद है। देश की प्लाईवुड एसोसिएशन की मांग है कि प्लाईवुड में जीएसटी की दर पांच प्रतिशत कर दी जाए तो इस क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास संभव है। यह न सिर्फ उद्योग में नई जान फूंकने वाला कदम साबित होगा, बल्कि इससे रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय प्लाइवुड एवं पैनल उद्योग महासंघ (फिप्पी) के डायरेक्टर जनरल डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि भारतीय प्लाइवुड और पैनल उद्योग संगठित-असंगठित अनुपात 20:80 है, जो देश भर में लगभग 35 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसके बाजार का आकार 2022-23 में लगभग 27,000 करोड़ रुपये आंका गया है।

प्लाइवुड और पैनल उत्पादों पर फरवरी 2025 से अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) लागू होने से उच्च-गुणवत्ता युक्त उत्पाद सुनिश्चित किए हैं। इन नियमों से आयात पर निर्भरता कम होने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। क्यूसीओ इस क्षेत्र को मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के साथ जोड़ते हैं।

किसानों की आय में इजाफा होगाः डा. एमपी सिंह

प्लाईवुड उद्योग में 92 प्रतिशत लकड़ी टीओएफ (वनों के बाहर के पेड़) या कृषि वानिकी से प्राप्त होती है। एग्रोफॉरेस्ट्री से तकरीबन 10 लाख से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। फिर भी कृषि वानिकी से प्राप्त लकड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यह अन्य कृषि उत्पादों की तुलना में काफी अधिक है। इधर कृषि उपज को जीएसटी से छूट दी गई है। इससे तैयार उत्पादों पर भी 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर लागू होती है। जीएसटी की इस असमानता से किसान एग्रोफोरेस्ट्री की ओर ज्यादा उत्साहित नहीं हो पाते।

फप्पी ने तर्क दिए

  1. भारत सरकार जीएसटी दर कम रख कर, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करती है। उदाहरण के लिए कपड़ा क्षेत्र में प्राकृतिक रेशों पर 0-5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि मानव निर्मित रेशों पर 18 प्रतिशत कर लगता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5 प्रतिशत कर लगता है, जबकि ईंधन से चलने वाले वाहनों पर 28 प्रतिशत कर लगता है।
  • इसके विपरीत लकड़ी के पैनल जो कि पर्यावरण के अनुकूल है - पर 18 प्रतिशत कर लगता है, जबकि ऐक्रेलिक पैनल, पीवीसी पैनल
  • और लकड़ी-प्लास्टिक मिश्रित सामग्री पर भी उतना ही है, जो मुख्य रूप से मानव निर्मित सामग्री हैं।
  1. पर्यावरण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा। क्योंकि देश में हरित क्षेत्रफल बढ़ने से प्रदूषण कम होगा। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है। जिससे जलवायु परिवर्तन कम होता है। इसलिए कम जीएसटी की नीति देश की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होगी।
  2. कृषि वानिकी से प्राप्त लकड़ी और ऐसी सामग्रियों से बने लकड़ी के पैनलों पर जीएसटी कम करने से सरकार के किफायती आवास लक्ष्यों को बल मिलेगा।
  3. कम जीएसटी होने से हर कोई जीएसटी जमा कराने के प्रति प्रेरित होगा।

पांच प्रतिशत जीएसटी होः सोनू अग्रवाल

इस संबंध में अखिल भारतीय प्लाईवुड निर्माता उद्योग के बिहार इकाई के अध्यक्ष सोनू अग्रवाल ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र लिख कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। इसलिए 2 स्लैब्स (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) में सीमित करने की घोषणा की गई है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि देश के प्लाईवुड उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा है, जबकि अन्य कृषि-आधारित उत्पादों पर केवल 0-5 प्रतिशत जीएसटी है। उनकी मांग है कि प्लाईवुड पर भी जीएसटी पांच प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनकी मांग को बिहार सरकार की ओर से जीएसटी काउंसिल को भेजा जाए।

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रोजगार बढ़ेगा, जे के बिहानी

हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ने सीएम को पत्र लिख कर मांग की कि जीएसटी 5 प्रतिशत स्लैब कराने के लिए केंद्र से बातचीत की जाए। उन्होंने सीएम ने अनुरोध करते हुए कहा कि इससे प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कच्चे माल की उपलब्धता और राज्य की अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा मिलने से कच्चे माल के तौर पर लकड़ी की मांग बढ़ेगी। इस स्थिति में प्रदेश में पौधा रोपण को तो बढ़ावा मिलेगा। किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

क्षेत्रीय इकाईयों को मजबूती मिलेगीः अशोक अग्रवाल

यूपी प्लाईवुड मैन्युफैक्चरर वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल ने वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण को पत्र लिख कर बताया कि इससे क्षेत्रीय इकाइयों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस उद्योग में संगठित व गैर संगठित 35 लाख से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। पांच प्रतिशत जीएसटी लागू करने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर और ज्यादा बढ़ेंगे। हर किसी के लिए अपने घर का सपना भी संभव होगा। सरकार को ज्यादा रेवेन्यू मिलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। प्लाईवुड उद्योग इसलिए जीएसटी पांच प्रतिशत करने की मांग कर रहा है।

जीएसटी पांच प्रतिशत होने का लाभ दक्षिण भारत के किसानों को भी मिलेगाः प्रशांत

साइथ इंडिया प्लाईवुड मैन्यूफेक्चरर के अध्यक्ष प्रशांत एमए ने कहा कि दक्षिण भारत खासतौर पर कर्नाटक जहां सिल्वर ओक और मिलिया दुबिया कॉफी प्लाट के साथ एग्रोफॉरेस्ट्री के तौर पर उगाया जाता है। केरला में रबर पेड़ बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं। यह एग्रोफॉरेस्ट्री सीधे तौर पर प्लाई उद्योग से जुड़े हुए हैं। प्लाईवुड पर जीएएसटी पांच प्रतिशत करने का लाभ यहां के किसानों को भी मिलेगा। प्लाईवुड उद्योग तरक्की करेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

उद्योग की स्थितिः

देश में लगभग 3500 प्लाईवुड उद्योग कार्यरत हैं। इनमें से ’99.5 प्रतिशत एमेसेमी इकाइयाँ हैं, जो ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। कच्चा माल मुख्यतः किसानों से प्राप्त ’एग्रोफॉरेस्ट्री लकड़ी है, जिससे किसानों की आमदनी होती है।

इसलिए कम हो जीएसटी

  • क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ी है, किसानों की लकड़ी की खपत व बिक्री प्रभावित है,
  • लाखों मजदूरों के रोजगार संकट में हैं,
  • आम जनता के लिए प्लाईवुड महंगा हो गया है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण

प्लाईवुड उद्योग सीधे वृक्षारोपण व एग्रोफॉरेस्ट्री को प्रोत्साहित करता है।’ इससे ’कार्बन उत्सर्जन में कमी’ व ’कार्बन क्रेडिट लाभ’ मिलता है। यदि यह उद्योग कमजोर होगा, तो किसानों का वृक्षारोपण कम होगा और ’पर्यावरण संरक्षण प्रभावित होगा।’ इस प्रकार, जीएसटी पांच प्रतिशत करने से न केवल किसान व उद्योग बल्कि जलवायु लक्ष्यों’ को भी मजबूती मिलेगी।

अपेक्षित लाभ

  • किसानों की आय में वृद्धि होगी,
  • एमेसेमी उद्योग पुनर्जीवित होंगे,
  • लाखों मजदूरों का रोजगार सुरक्षित होगा,
  • आम जनता को किफायती दर पर प्लाईवुड मिलेगा, और
  • भारत के पर्यावरणीय/कार्बन कटौती लक्ष्यों में योगदान मिलेगा।

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