वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत इंक से आग्रह किया कि वे हिचकिचाहट छोड़कर क्षमता विस्तार में निवेश करें और सरकार की नीतियों व सुधारों, जैसे वस्तु एवं सेवा कर (GST) दर तर्कसंगतीकरण का लाभ उठाएं।

 उन्होंने भारतीय फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे आशा है कि अब उद्योग के पास निवेश करने, क्षमता बढ़ाने, भारत में अधिक उत्पादन करने में कोई हिचक नहीं होगी। अगर सरकार से और कुछ अपेक्षित है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं।”

 सीतारमण ने कहा, “हमें समय-समय पर खुद को यह याद दिलाना होगा कि हमें कौशल विकास पर ध्यान देना है, अन्यथा उद्योग को मानव संसाधन के लिए संघर्ष करना पड़ेगा और जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा नहीं मिल पाएगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का लक्ष्य युवाओं, जिनमें स्कूल छोड़ने वाले और बुनियादी योग्यताओं वाले शामिल हैं, को AI आधारित कौशल प्रदान करना है। इसके लिए देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को उन्नत किया जाएगा और हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए AI आधारित प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएंगे।

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सीतारमण ने सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला ताकि कौशल विकास कार्यक्रम उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों।

उन्होंने उद्योग से आग्रह किया कि वे युवाओं को कौशल विकास में सरकार का साझेदार बनें और केवल बजट से पहले ही नहीं, बल्कि पूरे साल सरकार से जुड़े रहें।

एमएसएमई पर फोकस

सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के महत्व को पहचानती है, जो भारत के GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है। सरकार प्रशिक्षण और ऋण सुविधाओं सहित विभिन्न प्रकार का समर्थन प्रदान करने पर काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार MSME क्लस्टर्स के साथ मिलकर उनके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है ताकि कार्यबल को अपस्किल किया जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।


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