देश में कंपनियों के बोर्डरूम लगातार कटु पारिवारिक झगड़ों के मैदान बनते जा रहे हैं। उत्तराधिकार योजनाओं को औपचारिक रूप देने की लगातार अनिच्छा की वजह से संपत्ति को लेकर बढ़ते टकराव के कारण ऐसा हो रहा है।

परिवार के अक्सर उम्रदराज प्रमुखों की मानसिकता और अगली पीढ़ी की आकांक्षाओं के बीच तालमेल नहीं बैठ पाता है। परिवार के सदस्यों के बीच बराबरी का योगदान नहीं होना और प्रतिबद्धता का अभाव, और कमजोर संचालन जैसी बातों को शामिल कर दें तो आपको लंबे समय तक चलने वाले पारिवारिक विवादों का कथानक मिल जाएगा।

नियंत्रण को लेकर मुकदमेबाजी में उलझे प्रमुख भारतीय कारोबारी परिवारों की बढ़ती सूची है।

विशेषज्ञ इन बढ़ते विवादों के लिए स्वामित्व के अस्पष्ट ढांचे, अनौपचारिक समझौतों, उम्र बढ़ने और कमजोर होते संरक्षकों और योजना में देरी को जिम्मेदार ठहराते हैं।

जिन अधिकांश भारतीय परिवारों ने आकार और कारोबार की जटिलता में विस्तार किया है, उन्होंने औपचारिक स्वामित्व या उत्तराधिकार व्यवस्था में निवेश नहीं किया है। जब हालात बदलते हैं और कोई व्यवस्था नहीं होती है तो विवादों को टालना मुश्किल होता है।


 👇 Please Note 👇

Thank you for reading our article!

If you don’t received industries updates, News & our daily articles

please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.


Natural Natural