सरल नियम और कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करन जरूरी
- अगस्त 7, 2025
- 0
पंजाब सरकार ने श्री नरेश तिवारी को फर्नीचर एवं प्लाई उद्योग पर क्षेत्र-विशिष्ट समिति का आधिकारिक रूप से अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह घोषणा पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन एवं प्रवासी भारतीय मामलों के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने की।
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद श्री नरेश तिवारी से प्लाई इन्साईट की बातचीत के मुख्य अंशः
इस नई जिम्मेदारी में सरकार को आपसे क्या उम्मीदें हैं?
पंजाब सरकार चाहती है कि प्रदेश में लकड़ी उद्योग कैसे और अधिक प्रगति करे, इस पर ठोस सुझाव सामने आएं। मुझे दो माह का समय दिया गया है ताकि मैं उद्योग की समस्याओं को सरकार के समक्ष रख सकूं। यह सरकार की सकारात्मक सोच का परिचायक है कि वो उद्योगपतियों से सीधे संवाद कर रही है। इससे उद्यमियों को न केवल अपनी दिक्कतें बताने का मंच मिलेगा, बल्कि समाधान की दिशा में भी सरकार तेजी से काम करेगी।
एनजीटी से जुड़ी जो समस्याएं हैं, उन्हें पहले ही सरकार के संज्ञान में लाया गया है। पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया भी एक बड़ा विषय है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
पर्यावरण मंजूरी को लेकर मौजूदा यूनिट्स को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
पर्यावरण मंजूरी यूनिट लगाने से पहले लेना जरूरी है, लेकिन जो यूनिट्स पहले से चल रही हैं, उन्हें अब यह अनुमति औपचारिकता के तहत लेनी होगी। सरकार को यह देखना होगा कि इन चालू यूनिट्स को आसानी से पर्यावरण क्लियरेंस कैसे दिया जाए। हालांकि चूंकि कैटल में किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता, इसलिए इनसे पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इस बारे में सरकार को पहले भी अवगत करा दिया गया है और इस पर दोबारा विचार की मांग भी उठाई गई है।
टर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के प्रस्ताव को आप कैसे देखते हैं?
हमारे राज्य में लेमिनेट लेदर और प्लाईवुड की लगभग दस हजार यूनिट्स हैं, अधिकतर यूनिट्स में से कोई हानिकारक पदार्थ नहीं निकलता। ऐसे में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की अनिवार्यता उचित नहीं लगती।
हमने सरकार को यह स्थिति स्पष्ट की है और उम्मीद है कि सरकार इस तथ्य को समझ कर इसमें राहत देने की दिशा में पहल करेगी।
उद्योगों को कैसे प्रोत्साहन मिल सकता है, सरकार से किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता महसूस होती है?
सबसे पहले तो सरकार को नीति निर्माण में उद्योग से परामर्श लेना चाहिए। हम लकड़ी उद्योग की समस्या ही नहीं बल्कि उसका समाधान भी सरकार को सुझाएंगे।
क्योंकि हर तरह के उद्योग के लिए यदि एक जैसी नीति बना दी जाए तो इससे किसी का भी भला नहीं होता। हर उद्योग की अपनी नेचर होती है। अपनी जरूरत होती है। एक ही नियम सभी पर लागू नहीं हो सकता।
इसके अलावा, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, पर्यावरण मंजूरी की सरल प्रक्रिया, और सस्ती व समान दर पर कच्चे माल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना जरूरी है।
सरकार और उद्योग यदि मिलकर पारदर्शी और तार्किक प्रणाली बनाएँ, तो पंजाब का लकड़ी उद्योग देशभर में एक मिसाल बन सकता है। यह न केवल रोजगार बढ़ाएगा बल्कि निर्यात के नए द्वार भी खोलेगा।
पंचायती जमीन पर लकड़ी उगाने के प्रोजेक्ट की क्या स्थिति है?
पंजाब में 50 से 60 हजार एकड़ ऐसी जमीन हैं, जो बंजर है। इस पर वृक्षारोपण किया जा सकता है। अगर यह जमीन सरकार उद्योगपतियों को लीज पर दे देती है तो लकड़ी की उपलब्धता बढ़ जाएगी। हम सरकार से इस बाबत लगातार आग्रह कर रहे हैं। इस प्रयास में हम दो साल से लगे हुए हैं।
यह जमीनें सालाना पांच हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से हमें मिलनी चाहिए। क्योंकि इन जमीनों में किसी तरह का उत्पादन नहीं होता। इस जमीन की सिंचाई के लिए कोई इंतजाम नहीं है। भूजल स्तर नीचे चला गयाा है। नहरी पानी आता नहीं। इसलिए यह जमीन बंजर है। इस जमीन का इस्तेमाल वृक्षारोपण के लिए करने से पंचायत को आमदनी होगी, वहीं उद्योग को पर्याप्त मात्रा में लकड़ी मिलने लगेगा।
क्या यूरिया का कोई विकल्प संभव है?
इस दिशा में प्रयास जरूर हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस विकल्प सामने नहीं आया है। यदि भविष्य में कोई विकल्प निकलता है तो निश्चित ही उद्योग को इससे बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल एकमात्र समाधान यही है कि सभी उद्योगों को बराबर कीमत पर टेक्निकल यूरिया उपलब्ध हो।
वर्तमान में समस्या यह है कि कृषि यूरिया का उपयोग करने वालों की उत्पादन लागत कम हो जाती है। इससे बाजार में कीमत असंतुलन पैदा हो जाता है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि यूरिया की कीमत सभी निर्माताओं को एक जैसी पड़नी चाहिए। जिससे उत्पादन लागत पर जो असर पड़ता है, वह न पडे़। इससे बाजार में संतुलन आएगा।
क्या सरकार से टेक्निकल यूरिया पर किसी प्रकार की सब्सिडी की मांग है?
सबसे बड़ी समस्या यह है कि टेक्निकल यूरिया की आपूर्ति ही सही ढंग से नहीं हो पा रही है। किसान को भी पर्याप्त यूरिया नहीं मिल रहा है और न ही उद्योगों को। पहले तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि टेक्निकल यूरिया की स्थायी और पारदर्शी सप्लाई हो।
सरकार ने किसानों के लिए नई प्रणाली लागू की है, जिसमें उन्हें खेत की जानकारी देनी होगी, और उसी अनुपात में उन्हें यूरिया का वितरन होगा। इससे गैर-कृषि उपयोग अपने आप रुक जाएगा।
अगर यूरिया की कीमत सबके लिए समान हो जाएगी और सभी उद्योग टेक्निकल यूरिया का ही उपयोग करेंगे, तो प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता आएगी और उत्पादन लागत भी संतुलित रहेगी।
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us