New Opportunities in the India–EU Deal

भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतिक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा समझौता है जो दो अरब लोगों का बाजार तैयार करता है।

वर्ष 2024-25 में भारत-यूरोपीय संघ द्विपक्षीय व्यापार करीब 136.54 अरब डॉलर का था। भारत ने उस वर्ष 75.85 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया जबकि उसका आयात 60.68 अरब डॉलर का रहा। भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 25 फीसदी और वैश्विक व्यापार में एक तिहाई हिस्सेदारी रखते हैं।

इस बात पर सहमति बनी है कि यूरोपीय संघ भारत से आयात होने वाली वस्तुओं के लिए मूल्य के आधार पर 99.5 फीसदी पर शुल्क कम करेगा जबकि भारत 92 फीसदी से अधिक वस्तुओं पर शुल्क को उदार बनाएगा। समझौता लागू होते ही भारत मूल्य के हिसाब से 30 फीसदी व्यापार वस्तुओं पर शुल्क को शून्य कर देगा और इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।

फिलहाल उम्मीदों को वास्तविकता के धरातल पर रखना चाहिए। किसी भी भारत-ईयू व्यापार समझौते को यूरोपीय संघ के सभी 28 सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी होगी। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। इसमें ही छह से बारह महीने लग सकते हैं। इसलिए, अगर कोई समझौता होता भी है, तो उसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। लागू होने में समय लगेगा।

बाजार के नजरिये से समझौते की घोषणा खुद उतनी जरूरी नहीं है जितनी उसकी बारीकियां। अभी, दोनों तरफ से बहुत सारे संकेत दिए जा रहे हैं, मोटे तौर पर यह बताने के लिए कि वैकल्पिक व्यापार भागीदारी बनी हुई है। लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या यह समझौता आखिरकार सच में एक संतुलित और दोनों के लिए फायदेमंद करार में बदल पाएगा।

भारत को अब आंतरिक सुधारों को और अधिक आक्रामक ढंग से आगे बढ़ाना होगा। वह केवल तभी व्यापार समझौतों का लाभ ले पाएगा जब भारत के व्यवसाय अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। एफटीए की एक आम आलोचना यह होती है कि वे भारतीय व्यवसायों को लाभ नहीं पहुंचाते। ऐसा प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण होता है। आंतरिक सुधार भविष्य में ऐसे नतीजों से बचने में मददगार साबित हो सकते हैं।


 👇 Please Note 👇

Thank you for reading our article!

If you don’t received industries updates, News & our daily articles

please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298590, your number will be added in our broadcasting list.


Natural Natural