एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक साल की सुस्त गति के बाद, भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र सुधार की ओर बढ़ रहा है। डेवलपर्स, फाइनेंसरों और व्यवसायियों सहित सभी हितधारक अल्पकालिक वैश्विक चुनौतियों से परे देख रहे हैं।

बेहतर व्यापक आर्थिक परिस्थितियाँ, जैसे कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कुल 100 आधार अंकों की कटौती, मजबूत जीएसटी संग्रह, उपभोक्ता मुद्रास्फीति के छह साल के निचले स्तर के बीच तरलता में कमी और कम ऋण दरें, निवेश निर्णयों को गतिमान कर रही हैं।

 नारेडको के अनुसार, ‘‘इस सुधार का कारण स्थिर कार्यालय लीजिंग, विशेष रूप से जीसीसी और फ्लेक्स ऑपरेटरों द्वारा, और प्रीमियम आवास की मजबूत मांग है। क्षेत्रीय स्तर पर, दक्षिण के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में धारणा में सुधार हुआ है। बेहतर तरलता और कम उधारी लागत के बीच डेवलपर्स का दृष्टिकोण मजबूत हुआ है। रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह और मौद्रिक सहजता के समर्थन से, भारत का रियल्टी क्षेत्र 2025 के शेष भाग में निरंतर वृद्धि के लिए अच्छी स्थिति में प्रतीत होता है।‘‘

बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख बाजार रणनीतिक परियोजना लॉन्च और स्थिर अंतिम-उपयोग मांग के समर्थन से इस सुधार का नेतृत्व कर रहे हैं।

रियल्टी डेवलपर्स ने अपने भविष्य के भावना स्कोर में वृद्धि के साथ आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। कम वित्तपोषण लागत और उच्च मूल्य वाली आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की स्थिर मांग इस बदलाव का कारण बन रही है।

गैर-डेवलपर हितधारकों, जिनमें बैक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (एनबीएफसी) और निजी इक्विटी निवेशक शामिल हैं, ने भी बेहतर धारणा की सूचना दी है।

आवासीय बाजारों में, लगभग 70 प्रतिशत हितधारकों को उम्मीद है कि नई परियोजनाओं के शुभारंभ की गति अपरिवर्तित रहेगी या बढ़ेगी।

प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट, विशेष रूप से 1 करोड़ से अधिक कीमत वाली आवासीय संपत्तियों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जबकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के आवास क्षेत्र में गतिविधि सामर्थ्य के दबाव और कम मार्जिन के कारण सीमित बनी हुई है।


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