Ashok Agarwal

लकड़ी की ऊंची कीमतों के कारण जिन्हें अपनी पुरानी फैक्ट्री चलाने में दिक्कत आ रही है, उनके लिए उ प्र सरकार का यह न्योता वरदान की तरह है। यह सभी को पता है कि उ प्र के मुकाबले हरियाना और पंजाब में लकड़ी की कीमतें काफी अधिक है। इसलिए जो सक्षम है, उन्हें तो यहां नया प्लांट लगाना चाहिए। अन्याथा आप अपनी मशीनों को भी शिफ्ट कर सकते हैं।

जीवन में आने वाली चुनौतियों को देखने का नजरिया हर किसी का अलग होता है। कोई उसमें मुश्किलें देखता है तो कोई अवसर। एक जुता बनाने वाली कंपनी ने ग्रामीण इलाके में अपने अवसर तलाशने के लिए सर्वेक्षक भेजे। जहां एक सर्वेक्षक का मानना था कि चूंकि यहां कोई जुते नहीं पहनता, इसलिए यहां जुतों का बाजार ही नहीं हैं। वही दूसरे सर्वेक्षक ने अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं दी, ‘‘यहां अगर किसी को जुते चाहिए हों तो उन्हें मिलता ही नही है, अतः यहां पर जुते असिमीत मात्रा में बिक सकते हैं। हमारे लिए बहुत सुन्दर मौका है।‘‘

आखिरकार अधिकतर लकड़ी तो उ प्र से ही जा रही है। इसके अतिरिक्त किराया भी अतिरिक्त देना पड़ता है और मंडी शुल्क भी। आज की परिस्थितियों में कीमतो का यह अन्तर प्लाईउड फैक्ट्रीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

निसन्देह उ प्र में आज बिजली पानी सड़क की बेहतरीन सुविधाएं है। कानून व्यवस्था भी बहुत अच्छी हो गई है। अतः अपनी यूनिट अगर स्थानांतरित भी करने की सोचें, तो इससे बेहतर दूसरा राज्य नहीं हो सकता।

उ प्र में विभिन्न क्षेत्रों में कई तरह की सब्सीडी प्रदान की जा रही है। जिनका लाभ प्लाईउड के अलावा अन्य काष्ठ आधारित उद्योग जैसे पार्टिकल बोर्ड और एम डी एफ उद्योग भी उठा सकते हैं।

अगर समग्र रूप में देखा जाए तो उ प्र में जमीन भी सस्ती है और लकड़ी भी। दूसरे राज्यों से अगर तुलना करें तो वहां की एक फैक्ट्री के मुकाबले यहां दो फैक्ट्री या दुगुनी क्षमता से काम कर सकते है। उपर से कैपीटल सब्सीडी और दूसरी अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते है।

लकड़ी उद्योग में वर्तमान चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों का लाभ उठाने का यह एक बेहतर मौका है।


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