दूसरे राज्यों के लकड़ी उद्योग को आकर्षित करने के लिए विशेष छूट देनी होगी
- मई 8, 2025
- 0
यमुनानगर के उद्योपगति जेके बिहानी का मानना है कि यूपी सरकार को यदि लकड़ी उद्योग को अपने प्रदेश की ओर आकर्षित करना है तो इसके लिए पॉलिसी को और भी लाभप्रद बनाना होगा। वह प्लाईवुड मैन्युफैक्चर वेलफेयर एसोसिएशन के संवाद व समाधान कार्यक्रम में भाग लेने सहारनपुर गए थे।
उन्होंने कार्यक्रम की सराहना तो की, लेकिन साथ ही यह भी बोला प्रायः हर प्रदेश में यूपी जैसी तरह की नीतियां है। इसलिए इस तरह की नीतियां उद्योग को आकर्षित करने के लिए काफी नहीं है।
लकड़ी उद्योग के लिए पांच से छह एकड़ जमीन एक यूनिट के लिए चाहिए। इसलिए यदि यूपी सरकार को सहारनपुर में लकड़ी उद्योग को आकर्षित करना है तो कम से कम एक हजार एकड़ जमीन में स्पेशल क्लस्टर बनाना होगा। हरियाणा में यूपी की तुलना में जमीन महंगी है। इसलिए वह उद्योगपति जो अपने नए निवेश के लिए सस्ती जमीन चाह रहे हैं, वह सहारनपुर की ओर आ सकते हैं।
लेकिन किसी उद्योग को आकर्षित करने के लिए सिर्फ सस्ती जमीन ही काफी नहीं है। कई अन्य फेक्टर भी काम करते हैं।
- मसलन उद्योगपतियों को बिजली में छूट दी जाए।
- जमीन की रजिस्ट्री में छूट मिले।
- कैपिटल अनुदान मिलना चाहिए।
- जीएसटी पर पूरी स्टेट छूट या 75 प्रतिशत छूट मिल जाए जो कम से कम पांच से सात साल के लिए मिले तो बात बन सकती है।
इस तरह की नीति यदि बनें तो उद्योगपति सहारपुर की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
इसमें दो राय नहीं कि यूपी की लकड़ी यमुनानगर आ रही है। इसकी वजह भी है। वजह यह है कि यमुनानगर में लकड़ी की कीमतें यूपी से अपेक्षाकृत ज्यादा रहती है। इसके अलावा यमुनानगर मंडी में रोज के भाव होते है। जिससे तेजी मंदी का लाभ भी आढ़ती या किसानों को मिलता है। यह एक बहुत बड़ा आकर्शण है। इसीलिए हमें भरोसा है कि यह मंडी हमेशा आबाद रहेगी।
जेके बिहानी ने कार्यक्रम की तारीफ करते हुए सफल कार्यक्रम के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल को बधाई भी दी है।
बीआईएस लाइसेंस अब नेपाल और वियतनाम में जारी होने शुरू हो गए हैं?
भारतीय लकड़ी उत्पादक निर्माता अभी भी बीआईएस लाइसेंस लेने में इतने उत्साहित नहीं है क्योंकि लघु और सुक्ष्म उद्योगों को क्रमशः तीन और छह महीने का अतिरिक्त समय मिला हुआ है।
नेपाल में करीब दस से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं। इंडोनेशिया और थाईलैंड में एमडीएफ के एक दो लाइसेंस दिए गए हैं। वियतनाम को तीन चार लाइसेंस प्लाईवुड के दिए हैं। जून तक नेपाल में काफी लाइसेंस दे दिए जाएंगे उद्योगपतियों के बीच यह आम धारणा बन रही है।
क्यूसीओ का लाभ तो है ही?
क्यूसीओ की अच्छी बात तो यह है कि इसके आने से प्लाइवुड में गुणवत्ता को लेकर एक सिस्टम तो बन ही गया। लेकिन दिक्कत यह है कि यह सिस्टम हमारे लिए समस्या भी पैदा कर सकता है। क्योंकि बीआईएस देश में तैयार होने वाले प्लाईवुड का सैंपल तो कहीं से भी ले सकता है।
बस अब यह देखना होगा कि नेपाल और दूसरे देश से आयात होने वाले प्लाईवुड का सैंपल कहां से लिया जाएगा? क्योंकि सैंपल बार्डर पर ही लिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो अधिकारियों को बताया जाना चाहिए कि आयातित माल देश के किस किस बाजार में गया है।
अब होता यह है कि ज्यादातर आयातित माल का डिपो सिलीगुड़ी में हैं। देश के अन्य हिस्सों में सप्लाई होने वाले माल की जानकारी देने के लिए विदेशी उत्पादक बाध्य नहीं है। इसकी जानकारी बीआईएस को कैसे मिलेगी। ऐसा सिस्टम तो अभी नहीं है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में भारतीय उद्योगपतियों को खासी दिक्कत आ सकती है।
👇 Please Note 👇
Thank you for reading our article!
If you don’t received industries updates, News & our daily articles
please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298592, your number will be added in our broadcasting list.






Ply insight launched on March 2018 with a vision to make a platform to collaborate plywood MDF, Laminate, machinery manufactures with dealers in the Trade.
Categories
Useful Links
Follow Us