विदेशी उत्पादकों को बीआईएस प्रमाण-पत्र देने में आनाकानी
- दिसम्बर 15, 2023
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क्यूसीआई को आधार बना प्लाईवुड व अन्य उत्पादों के आयात को रोकने की कोशिश में जिस तरह से इन दिनों सरकार कदम उठा रही है, वह बाजार में विदेशी उत्पाद की धमक कम करने की ओर कारगर कदम साबित हो सकता है। सरकार की यह कोशिश प्लाईवुड सहित उन सभी वस्तुओं पर लागु हैं जिन पर सरकार ने हाल ही में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए हैं। चीन, थाईलैंड वियतनाम जैसे देशों से सस्ता प्लाईवुड आयात कर भारतीय बाजार में बेचने वालों पर भी इससे रोक लगेगी।
सरकार ने देशी एवं आयातित उत्पादकों के गुणवत्ता मानक QCO में तय कर दिए है। इतना ही नहीं भारत में निर्यात करने से पहले प्रत्येक कंपनी को भारतीय मानक संस्था से प्रमाण पत्र लेना होगा।
इसके तहत ही अब प्लाईवुड या दूसरे उत्पाद तैयार करने वाली इकाई भले ही किसी भी देश में हो, उसे भारत सरकार का बीआईएस-प्रमाण पत्र लेना ही होगा। बीआईएस प्रमाण पत्र धारक कारखानों में तैयार प्लाईवुड व अन्य उत्पाद ही भारतीय बाजार में आ सकते है। यह नियम प्लाइवुड समेत कई उत्पादों पर लागू कर दिया गया है। इसके बाद अब प्रत्येक फ़ैक्टरी को यह प्रमाण पत्र अपने उत्पाद के लिए लेना होगा। भले ही इन इकाईयों को एक व्यक्ति या संस्था ही क्यों न चला रहे हो। कुछ आयातकों ने बताया कि सरकार प्रमाण पत्र जारी करने में देरी कर रही है।
क्योंकि बाजार की मांग आपूर्ति और अपना वितरण बरकरार रखने का दबाव सभी आयातकों पर बढ़ रहा है। इसलिए इन कंपनियों के पास घरेलू उत्पाद खरीदने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा है। बताया जा रहा है कि नाइके, मित्सुबिशी और कैरियर सहित कई नामी कंपनियों को चीन में अपनी विक्रेता फैक्ट्रियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से प्रमाणन हासिल करने में दिक्कत आ रही है।
अब इन कंपनियों ने अन्य एशियाई देशों की फैक्टरी से तैयार माल को भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए सरकार से आग्रह किया है। इनके आग्रह के बावजुद सरकार थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में स्थित कारखानों को भी यह प्रमाण पत्र देने में हिचकिचा रही है। क्योंकि सरकार को यह अंदेशा है कि कंपनियां चीनी माल को वाया थाइलैंड या वियतनाम से बैक डोर एंट्री करते हुए भारतीय बाजार में उतार सकती है।
सरकार के इस कदम से भारतीय प्लाईवुड बाजार को काफी मजबूती मिलने की संभावना है। अभी तक विदेश से सस्ता प्लाईवुड व दुसरा माल आसानी से भारतीय बाजार में पहुंच जाता था, क्योंकि गुणवत्ता का कोई तय नियम नहीं था। इसलिए आयातकों को खुली छूट थी। यह भी एक कारण था कि चीन, थाईलैंड जैसे देशों से सस्ता प्लाइवुड भारतीय बाजार में काफी पकड़ बनाए हुए था। क्योंकि भारतीय प्लाइवुड निर्माता गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं, इसलिए उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाती थी। विदेश माल तुलना में सस्ता होने की वजह से भारतीय प्लाईवुड पर भारी पड़ जाता था।
अब सरकार ने इसके निर्बाघ आयात पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाए हैं। जो निश्चित ही भारतीय प्लाइवुड के लिए अच्छे संकेत माने जा सकते हैं। अगर सरकार की यह नीति कामयाब होती है, तो इससे आने वाले दिनों में बाजार में विदेशी सस्ता प्लाईवुड जो भारतीय प्लाइवुड निर्माताओं को परेशान कर रहा है, वह खुद ब खुद बाजार से दूर हो जाएगा।






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