जीएसटी के आंकड़े की अनौपचारिक जानकारी के मायने क्या है?
- अक्टूबर 10, 2024
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जून 2024 में वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी का कुल संग्रह 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा है। लेकिन इस कर संग्रह के आंकड़ों को संवाददाताओं को अनौपचारिक तौर पर बताया गया। आगे से नियमीत तौर पर इसे ऐसे ही जारी किया जाएगा।
ऐसे समय में जबकि पारदर्शिता और सूचनाओं का समय पर जारी होना अहम हो चुका है, तो एक नियमित बन चुकी प्रक्रिया को खारिज करना कहां तक उचित है, यह तो समय ही बताएगा।यह सही है कि जीएसटी व्यवस्था में अभी भी कुछ सुधार की आवश्यकता है ताकि वह कामयाबी हासिल कर सके। लेकिन वह कई अंशधारकों के लिए एक उच्च संकेतक का काम करती है। वित्तीय बाजार विश्लेषकों और निवेशकों समेत कई विश्लेषक इन पर नियमित नजर रखते हैं। चूंकि सकल घरेलू उत्पाद जीएसटी जैसे आधिकारिक आंकड़े एक अंतराल के बाद जारी होते हैं, ऐसे में जीएसटी संग्रह इस बात को लेकर व्यापक समझ देने में मदद करता है कि अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा है।
दिलचस्प बात है कि प्रेस विज्ञप्ति बंद करने की एक वजह यह बताई जा रही है कि इससे ऐसा माहौल बनता है कि मानो सरकार बहुत अधिक कर संग्रह कर रही है।
हालांकि, सकल जीएसटी संग्रह अकेले केंद्र सरकार का नहीं होता है। इसमें राज्यों की भी हिस्सेदारी होती है। इसमें क्षतिपूर्ति उपकर का संग्रह भी शामिल होता है जिसका इस्तेमाल उस कर्ज को चुकाने में किया जाता है जिसे महामारी के दौरान राज्यों की राजस्व कमी को दूर करने के लिए लिया गया था।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जीएसटी व्यवस्था राजस्व संग्रह के मामले में पिछड़ गई है। गत वित्त वर्ष में रीफंड के बाद जीएसटी संग्रह जीडीपी के 6.1 फीसदी के बराबर था जबकि 2016-17 में जीएसटी में शामिल करों से जीडीपी के करीब 6.3 फीसदी के बराबर कर हासिल हुआ था। यह बात भी ध्यान देने लायक है कि सकल संग्रह में क्षतिपूर्ति उपकर शामिल है जिसे पांच साल के बाद समाप्त हो जाना था। सरकार जीएसटी के पहले की तुलना में कम कर संग्रह कर रही है।
ऐसे में इस समय आवश्यकता है जीएसटी व्यवस्था में अहम सुधारों की। उसकी दरों और स्लैब में सुधार करने से शायद कर संग्रह बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का तात्कालिक ध्यान इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि वह राज्यों के साथ मिलकर काम करे और जीएसटी व्यवस्था में सुधार करे। अगर आम जनता में वास्तव में जीएसटी को लेकर कोई असहजता है तो सरकार को संवाद से सुधार करने पर काम करना चाहिए।
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