1. प्लाईवुड और पेनल उद्योग में QCO का विरोध क्यों हो रहा था?

ISI मार्क पहले अनिवार्य नहीं था, अब अनिवार्य होने वाला हैं। उस वजह से हमारी जो Compliance बढ़ने वाली हैं, उस वजह से छोटे और लघु उद्योग QCO के खिलाफ थे।

  1. क्या अब सारी दिक्कतें दूर हो गई है? कहां-कहां बदलाव की अभी भी आवश्यकता है?

प्लाईवुड और पेनल इंडस्ट्रीज को ये समझ में आ गया है कि हमारे यहां जो दिक्कते थी, फैक्ट्रीयां बंद हो रही थी, उसका एक प्रमुख कारण बाहर से घटिया क्वालिटी का माल आना था। इस वजह से ये अब जागरूकता आई हैं। BIS ने भी अपने नॉर्म्स मे काफी बदलाव किया है और वास्तविक उत्पादित गुणवत्ता के हिसाब से अपने नॉर्म्स को बनाया हैं। 

फिर भी अभी भी कुछ बदलाव की जरूरत है। जैसे कि portal पर जो हमारी Subsidy हैं Micro, small और midium के लिए, वो हमें प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलती हैं। उसके लिए ।चचसल करना पड़ता हैं। और दूसरा, अभी भी Stop Marking का कोई समाधान नहीं हुआ है। इतने इतने अगर Sample Draw होंगें, तो उस वजह से जो Compliance बढेंगी, बड़ी Industry तो उसका पालन कर लेंगें, पर छोटों के लिए अभी भी मुश्किल हैं। हालांकि BIS ने इस QCO को लागू करने के लिए छोटे Industry जैसे माइक्रों और स्मॉल को 3 से 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया है। और जरूरत पड़ी तो उसको और भी बढ़ा सकते हैं, ऐसी संभावना हैं।

  1. आप BIS से कब से परिचित हैं? तब (शुरू) से अभी तक इसमें क्या बदलाव आपने देखे हैं।

प्लाईवुड और पैनल उद्योग के पास BIS का लाइसेंस लगभग तीन दशकों से है। जीतने भी बड़े और मध्यम उद्योग थे वह पिछले दो से तीन दशकों से BIS का पालन कर रहे हैं। और छोटे और लघु में भी जो क्वालिटी कॉन्शैस मैन्युफैक्चरर्स हैं, उनके पास BIS का लाइसेंस है।

पिछले कुछ वर्षों में BIS मार्किंग का बहुत अधिक दुरुपयोग हुआ। लोगों ने किसी का भी सीएमएल नंबर लगा दिया या बिना सीएमएल के ही BIS मार्क लगा दिया। इस दुरुपयोग की वजह से कुछ मैन्युफैक्चरर्स का भरोसा उठा, तो उन कई लोगों ने अपने लाइसेंस सरेंडर भी करवा दिए। इसके अलावा, BIS ने भी काफी मार्केट सैम्पल्स ड्रॉ किए और कई लाइसेंस भी कैंसिल हुए।

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  1. 303 के मानकों में जो बदलाव हुए हैं उनसे आप कितने सहमत है वो कितने सहायक (Helpful) हैं?

303 में अब बी डब्ल्यू पी को शामिल कर लिया गया है, एमिशन नॉर्म्स को भी उसमें डाला गया है, ताकि अपने एन वायरनमेंट की भी सुरक्षा हो सके। पहले बॉयलिंग वाटरप्रूफ का 710 के नाम पर बहुत दुरुपयोग होता था, जो थोड़ा बहुत अभी भी हो रहा है। पर क्यूसीओ आने के बाद जब 303 में ये शामिल हो जाएगा, तो इसका दुरुपयोग काफी हद तक कम हो जाएगा।

जो नॉर्म्स में बदलाव किए गए हैं, वो इंडस्ट्री से पूछ के किए गए हैं। और भी कोई नॉर्म्स में बदलाव की जरूरत पड़ेगी तो हम ठप्ै से लगातार चर्चा करते रहेंगे। जो भी नॉर्म्स बनाए गए हैं, उससे हम काफी हद तक संतुष्ट हैं।

मार्केट सैंपल ड्रा करने की जो अधिक संख्या है या उसकी वजह से स्टॉप मार्किंग करने की दिक्कत हैं, उस सिस्टम में कुछ बदलाव करने की अभी भी जरूरत है।

  1. क्या आपको लगता है कि तय तिथी में QCO लागू हो जाएगा।

पिछले वर्ष भी हमें आशा नहीं थी, कि क्यूसीओ एक्सटेंडेड होगा, पर तब ये इंडस्ट्री एकजुट नहीं थी। छोटे लघु उद्योगों में जागरूकता काफी कम थी। पर इन एक वर्षों में जागरूकता आई है और लोगों ने समझा है कि उद्योग में क्यूसीओ लगाना कितना जरूरी है, क्वालिटी उत्पादन के लिए। जो घटिया प्रॉडक्ट आयात हो रहे हैं, उनको रोकने के लिए भारत सरकार ने ये नियम लागू किया है। पर फिर भी आखिरी निर्णय तो भारत सरकार के हाथ में ही है। वो इसे तय समय पर लागू करते हैं या छः महीने या एक साल का और एक्सटेन्शन देते है।

  1. अगर तय तिथी में QCO लागु नहीं होता है, उद्योग को क्या दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं?

पिछले एक वर्षों में सैकड़ों डोमेस्टिक इंडस्ट्री बंद हुई है हमारे हजारों लेबर बेरोजगार हुए हैं। अगर ये क्यूसीओ फिर से एक्सटेंड हो जाता है, तो यही चीज़ दोबारा से होगी। सैकड़ों फैक्टरी फिर बंद होंगी, हजारों लाखों हमारे लेबर फिर बेरोजगार होंगे, और घटिया क्वालिटी का माल भारत में आता रहेगा। Consumer के साथ भी धोखा होगा, फैक्टरी वालों के साथ भी धोखा होगा। इसलिए भारत सरकार से आग्रह है कि QCO को तय समय पे लागू कर देना चाहिए।


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