भारतीय अर्थव्यस्था के लिहाज से देखें तो वर्ष 2024 को ’मजबूत शुरूआत और कमजोर अंत वाला वर्ष कहा जा सकता है। वर्ष की शुरूआत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वास्तविक वृद्धि दर करीब आठ फीसदी थी और मुद्रास्फीति में कमी आ रही थी। मगर आखिर के कुछ महीनों में जीडीपी वृद्धि दर उम्मीद से अधिक घटने, खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने और रूपये का अवमूल्यन होने से नीतिगत संतुलन बिगड़ गया।

महामारी के बाद भारत ने वृद्धि की राह पर जो फर्राटा भरा था, उसकी कई वजहंे थीं जैसे काफी समय से दबी हुई मांग निकलना, खुदरा ऋण की मांग बढ़ना, सार्वजनिक पूंजीगत व्यय पर जोर और निर्यात में तेजी आना। इसमें से कई वजहें अब खत्म हो रही हैं।

शहरी खपत कमजोर पड़ने का खटका है क्योंकि महामारी के बाद उत्पन्न मंाग धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, मौद्रिक नीति सख्त है और नॉमिनल आय वृद्धि भी धीमी है। रिजर्व बैंक की सख्ती के कारण ऋण वृद्धि की रफ्तार घटी है और क्रेडिट कार्ड का बकाया तथा पर्सनल लोन चुकाने में चूक यानी डीफॉल्ट के मामले बढ़े हैं। संभव है, बैंक जौखिम से बचना चाहें। ऐसे में उपभोक्ता वस्तुओं के लिए ऋण की मांग मे कमी आएगी। माइक्रोफाइनैंस कंपनियों पर सख्ती के कारण लोग एक कर्ज चुकाने के लिए चार नए कर्ज नहीं ले सकेगें। कुल मिलाकर ऋण की शर्तें सख्त हैं और परिवारों पर कर्ज का चक्र 2025 में खपत मांग पर असर डालेगा।

Vibrant Buildcon

चीन की अतिरिक्त क्षमता भी भारत के लिए खतरा है। पश्चिम से शुल्क लगने पर चीन नए बाजारों में निर्यात करने की कोशिश करेगा, जिसमें भारत भी शामिल होगा। भारत पहले चीन से आ रहे सस्ते आयात से झूम रहा है, जो सस्ती उपभोक्ता वस्तुओं, धातु तथा रसायन, से लेकर महंगे उत्पादों तक फैला हुआ है। इसके कई आर्थिक प्रभाव हो रहे हैं, जिसमें बिगड़ता व्यापार संतुलन, कंपनियों का घटता मुनाफा मार्जिन और देश में कम उत्पादन शामिल हैं। अनिश्चिता भरे वैश्विक वातावरण कमजोर देसी मांग, महगें कर्ज और चीन से आते आयात का प्रभाव निजी पूंजीगत व्यय पर पड़ सकता है।

रिजर्व बैंक ने रूपये का अवमूल्यन रोकने के लिए अभी तक जमकर हस्तक्षेप किया है। मगर इससे बैंकिंग प्रणाली की तरलता कम हो रही है, जो बढ़ते व्यापार घाटे के बीच नुकसानदेह साबित हो रहे हैै। शायद रिजर्व बैंक रूपये को कुछ गिरने दे क्योंकि इससे स्थिरता आएगी और आयात कम होगा।

आगे की राह उथलपुथल भरी हो सकती है लेकिन सहज हालात रहें तो कौशल कभी नहीं निखरता। S. Verma


 👇 Please Note 👇

Thank you for reading our article!

If you don’t received industries updates, News & our daily articles

please Whatsapp your Wapp No. or V Card on 8278298592, your number will be added in our broadcasting list.


Natural Natural