वैश्विक कर चोरी से जंग
- जून 12, 2025
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बहुराष्ट्रीय कंपनियां और उच्च आय वाले व्यक्ति (एचएनआई) कम कर वाले क्षेत्रों और टैक्स हैवन (कर बचाने वाले इलाकों) में जाकर या तो कर चोरी करते हैं या काफी कर बचा लेते है, जिस पर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है।
विकासशील देशों में यह चिंता ज्यादा नजर आती है क्योंकि उन्हे बुनियादी ढ़ाचा बढ़ाने तथा मानव विकास करने और पर्यावरण की चुनौतियों से लड़ने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। इससे भी अहम बात है कि विकाशील देशों के लिए महामारी तथा अंतरराष्ट्रीय वैमनस्य के कारण उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से लड़खड़ाई वृहद अर्थव्यवस्था को संभालना बहुत जरूरी है। इसके लिए घाटे और कर्ज पर काबू पाना होगा, जिसके लिए एक बार फिर संसाधनों की दरकार होती है। इन चुनौतियों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बिगाड़ दी है और उत्पादन की लागत तथा ऊर्जा की कीमत चढ़ा दी हैं।
वैश्विक कर चोरी पर आई यूरोपीय संघ की ईयू टैक्स ऑब्जर्वेटरी रिपोर्ट के मुताबित बहुराष्ट्रीय कंपनियां और एचएनआई कई तरह से कर चोरी करते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसके लिए ट्रांसफर प्राइसिंग का तरीका सबसे ज्यादा अपनाती हैं। इसमें अधिक कर वाले किसी देश में मौजूद संबंधित कंपनी से बेहद ऊंची कीमत पर प्रबंधन या वित्तीय सेवाएं खरीदती है। इस तरह वह अपना मुनाफा कम कर वाले देश में पहुंचा देती है।
दूसरे तरीके में अधिक कर वाले देश की कंपनी कम कर वाले देश की संबंधित कंपनी से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेती है और ब्याज चुकाने के नाम पर अपना मुनाफा वहां पहुंचा देती है।
तीसरा तरीका अपना मुख्यालय टैक्स हैवन में बना लेना तथा ट्रेडमार्क, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं लोगो जैसी अमूर्ति संपत्तियों के इस्तेमाल के बदले उच्च कर वाले देश की सहायक कंपनी से रॉयल्टी लेना है। बहुराष्ट्रीय डिजिटल कंपनियां खास तौर पर ऐसा करती हैं क्योंकि वे अपना मुख्यालय कम कर वाले देश में आसानी से बना सकती हैं और कर देने से बच सकती हैं।
वैश्विकरण और आधुनिक तकनीक ने जटिलता बढ़ा दी हैं और एचएनआई तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कर चोरी के नए रास्ते बना दिए हैं।
वित्तीय लेनदेन की जानकारी कई पक्षों को देने का नियम 2017 में शुरू होने के बाद एचएनआई विदेश में नकदी रखने के बजाय रियल एस्टेट में लगा रहे हैं। अन्य देशों में अचल संपत्ति रखने की वैध वजह हो सकती हैं मगर वह काले धन का सफेद बनाने का जरिया भी हो सकता है।
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