ब्याज दरों में कटौती से घरों की मांग बढ़ेगी
- जुलाई 12, 2025
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रियल एस्टेट उद्योग को उम्मीद है कि रीपो रेट में (उम्मीद से ज्यादा) 50 आधार अंक की कटौती करने के, भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले से, देश भर में मकानों की मांग में सुधार होना चाहिए। दरों में कटौती हाल में मकानों की बिक्री में तेज गिरावट के बीच आई है।
एनारॉक के मुताबिक 2025 की पहली तिमाही में मकानों के दाम बढ़ने और भूराजनीतिक चुनौतियों के कारण आवासों की बिक्री 28 फीसदी घट गई।
इस समय आवास ऋण पर औसत ब्याज दर करीब 8.5 फीसदी है और बैंकों ने दर कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को दिया तो औसत दर 8 फीसदी रह जाएगी।
रियल एस्टेट की संस्था क्रेडाई ने कहा कि ईएमआई घटने से ग्राहकों का हौसला बढ़ेगा और पहली बार मकान खरीदने वाले लोग बाजार में आएंगे। मकान खरीदने के इच्छुक, खास तौर पर पहला घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह सुनहरा मौका है।
दर में कटौती से किफायती और मझोली श्रेणी के उन मकानों की मांग में सबसे ज्यादा तेजी आने की संभावना है, जिन पर ब्याज दर का ज्यादा असर पड़ता है। पिछले कुछ साल में मकानों की बिक्री घटने और नई परियोजनाएं नहीं आने से किफायती मकानों को सबसे ज्यादा झटका लगा है। पिछले कुछ सालों से आवास बाजार में प्रीमियम संपत्तियों में ही तेजी रही है और किफायती मकानों की बिक्री कमजोर पड़ी है।
एनारॉक के अनुसार 2019 में बिकने वाले 38 फीसदी मकान किफायती श्रेणी में थे। मगर 2024 में उनकी हिस्सेदारी घटकर 18 फीसदी रह गई। इन मकानों की आपूर्ति भी 40 फीसदी से घटकर 16 फीसदी रह गई।
रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) भी 100 आधार अंक घटाकर 3 फीसदी कर दिया। इससे डेवलपरों को अधिक पूंजी मिलेगी और परियोजनाएं समय पर पूरी करने में उन्हें मदद मिल सकती है। सीआरआर में कमी से बैंकिंग प्रणाली में तरलता काफी बढ़ने की उम्मीद है। इससे बैंक और भी ज्यादा कर्ज दे सकेंगे।
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