राष्ट्रीय वन नीति.1988 के कार्यान्वयन के साथए भारत में वन प्रबंधन का ध्यान देश की पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दर्ज वनों (Recorded Forest Areas – RFAs) के संरक्षण के साथ.साथए वनों के बाहर हरित क्षेत्रों को बढ़ाने की दिशा में केंद्रित हो गया है।

इसके परिणामस्वरूपए सरकारी नियंत्रण वाले वनों से लकड़ी का उत्पादन लगातार घटता गया - 1970 के दशक में 100 लाख घन मीटर से घटकर 1990 के दशक में 40 लाख घन मीटर, 2017 में 31.8 लाख घन मीटरए 2019 में 17.5 लाख घन मीटर और 2020 में केवल 15.6 लाख घन मीटर रह गया (धिमान 2025) इस परिवर्तित परिप्रेक्ष्य में वनों के बाहर के पेड़ (Trees Outside Forests & TOF) का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

वनों के बाहर के पेड़ों (TOF) का स्वरूप और भूमिका भारत के ग्रामीण और शहरी परिदृश्यों में TOF विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं . जैसे छोटे वृक्ष समूह, ब्लॉक प्लांटेशन सड़कों, नहरों मेड़ों के किनारे लगाए गए पेड़, खेतों, घरों, सामुदायिक भूमि और शहरी क्षेत्रों में फैले हुए वृक्ष।

 

TOF देश की अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी - दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका में विविधता लाने में योगदान देते हैं। साथ हीए यह स्थानीय समुदायों को वनों से प्राप्त सेवाओं जैसे - भौतिक संसाधन, पर्यावरणीय संतुलन, सहायक सेवाएँए तथा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व प्रदान करते हैं। ये कार्बन अवशोषण का एक प्रमुख स्रोत हैं और लकड़ी आधारित उद्योगों के लिए प्रमुख कच्चा माल भी।

वनों के बाहर क्षेत्रफल और कृषि वानिकी की स्थिति

भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने TOF को दो श्रेणियों में बाँटा है - ग्रामीण TOF और शहरी TOF 1 हेक्टेयर या उससे अधिक के ब्लॉक प्लांटेशन को सैटेलाइट इमेजरी द्वारा वन आच्छादन में शामिल किया जाता हैए जबकि छोटे और बिखरे पेड़ों का अनुमान सैंपलिंग तकनीकों से लगाया जाता है। इस प्रकार, वनों के बाहर के क्षेत्रों में मौजूद वन आच्छादन और वृक्ष आच्छादन के योग को TOF का क्षेत्रफल माना जाता है। कृषि वानिकी (Agroforestry) TOF का प्रमुख घटक है।

 

भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसारए देश में TOF का कुल क्षेत्रफल लगभग 307 लाख हेक्टेयर 9.3 प्रतिशत है जिसमें से 128 लाख हेक्टेयर कृषि वानिकी के अंतर्गत आता है - जो कुल TOF क्षेत्र का 42 प्रतिशत और देश के भौगोलिक क्षेत्र का 3.9 प्रतिशत है। जैसा कि ‘‘तालिका-1‘‘ में दिखाया गया है, भारत में “TOF (Tree Outside Forest) के क्षेत्रफल के मामले में ‘‘दक्षिणीए उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र‘‘ आगे हैं। इनमें से ‘‘उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र‘‘ ‘‘एग्रोफॉरेस्ट्री‘‘ के क्षेत्रफल में भी अग्रणी हैं, लेकिन ‘‘व्यावसायिक वाणिज्यिक वृक्ष फसलों की उत्पादकता‘‘ उत्तरी क्षेत्र में काफी अधिक है, क्योंकि वहाँ दक्षिणी क्षेत्र की तुलना में, उर्वक भूमि है।

2013 से 2023 के बीच TOF क्षेत्र में 37 लाख हेक्टेयर (14 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई हैए जबकि कृषि वानिकी में 21 लाख हेक्टेयर (20 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्रए कर्नाटक और ओडिशा ने इस वृद्धि में प्रमुख योगदान दिया हैए जबकि गुजरात में -1.2 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गईए जो चिंता का विषय है।

औद्योगिक लकड़ी उत्पादन की संभावनाएँ

ISFR रिपोर्टों के अनुसार, TOF से औद्योगिक लकड़ी उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, 2011 में 690 लाख घन मीटर से बढ़कर 2023 में 915 लाख घन मीटर प्रति वर्ष तक पहुँच गया। यह वृद्धि 225 लाख घन मीटर या 30 प्रतिशत की है और भारत की कुल औद्योगिक लकड़ी की मांग का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा TOF से पूरा होता है (सप्रा, 2025)।

The regional contribution to industrial wood production from TOF.

सबसे अधिक उत्पादन उत्तरी भारत (256 लाख घन मीटर) में है, जहाँ उपजाऊ मिट्टी, उन्नत खेती तकनीक और क्लोनल फॉरेस्ट्री का प्रचलन प्रमुख कारण हैं। सबसे कम उत्पादन पूर्वात्तर क्षेत्र (52 लाख घन मीटर) में है, जहाँ झूम खेती (shifting cultivation) आम है। पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र में TOF क्षेत्रफल में बड़ा अंतर होने के बावजूद उत्पादन लगभग समान है - इसका कारण दक्षिणी क्षेत्र में वृक्ष संरक्षण की प्रवृत्ति, अधिक शहरीकरण, लंबी अवधि वाली फसलें और जलवायु की कठोरता है।

इस असमानता को इस क्षेत्र में ’’वृक्ष संरक्षण पर अधिक ध्यान’’, ’’शहरीकरण वाले क्षेत्रों का अधिक प्रतिशत’’, ’’लंबी रोटेशन वाली फसलों की प्रचलित खेती’’, ’’कठोर जलवायु परिस्थितियाँ’’, और ’’भूमि की अपेक्षाकृत कम उर्वरता’’ से समझाया जा सकता है।

पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में TOF का क्षेत्रफल लगभग समान है, लेकिन पूर्वी क्षेत्र की ’’लकड़ी उत्पादन’’ उत्तरी क्षेत्र के उत्पादन का लगभग आधा है। इसका अर्थ है कि पूर्वी क्षेत्र में ’’व्यावसायिक वृक्ष फसलों की खेती को बढ़ावा देकर लकड़ी उत्पादन बढ़ाने की काफी संभावना’’ है।ISFR-2023 के अनुसार, TOF से औद्योगिक लकड़ी उत्पादन में शीर्ष तीन राज्य हैं - महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश।

Pioneer Panel gif

एग्रोफॉरेस्ट्री मुख्यतः ’’व्यावसायिक उद्देश्यों’’ के लिए की जाती है और इसलिए यह ’’औद्योगिक लकड़ी का प्रमुख स्रोत’’ बनती है। हालाँकि, छोटे जोतों के कारण किसान मुख्य रूप से छोटी व्यास वाली लकड़ी ही उगाते हैं, और मध्यम व बड़ी लकड़ी की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत को अब भी आयात करना पड़ता है। 2022-23 में लकड़ी और उससे बने उत्पादों का आयात मूल्य ₹77,169 करोड़ रहा (धिमान, 2025)।

सरकारी पहलें और कार्यवाहियाँ 

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और विभिन्न राज्य वन विभागों ने TOF को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं।
  • 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) 102 शहरों में लागू किया गया।
  • राज्य वन विभागों ने पंचायत, सामुदायिक भूमि, खेतों और पवित्र उपवनों में वृक्षारोपण योजनाएँ शुरू कीं।
  • लकड़ी आधारित उद्योगों ने भी अपनी कच्ची सामग्री की आवश्यकता पूरी करने के लिए व्यावसायिक वृक्ष फसलों को बढ़ावा दिया।

विकसित भारत@2047 के लिए दृष्टिकोण

  • “विकसित भारत@2047” के विज़न को साकार करने के लिए तीव्र गति से विकास आवश्यक है।
  • इस दृष्टि का एक प्रमुख घटक है - औद्योगिक लकड़ी उत्पादन को दोगुना (2,000 लाख घन मीटर) करना, जो TOF क्षेत्र का विस्तार और व्यावसायिक वृक्ष फसलों की उत्पादकता बढ़ाकर संभव होगा।
  • साथ ही, बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों के प्रबंधन में सुधार से गैर-लकड़ी वन उत्पादों (NTFP) का उत्पादन भी बढ़ेगा, जो ग्रामीण आजीविका के साथ-साथ निर्यात क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा।यह ’’लकड़ी आधारित उद्योगों के विकास’’ का समर्थन करेगा और ’’देश में बढ़ती लकड़ी और लकड़ी उत्पादों की मांग’’ को पूरा करने में मदद करेगा।

मुख्य अनुशंसाएँ (MoEFCC)

  1. 1. वन सर्वेक्षण भारत (FSI), देहरादूनः
  • ISFR की मुख्य रिपोर्ट को दो भागों में बाँटा जाए - एक RFAs के लिए और दूसरा TOF क्षेत्रों के लिए।
  • TOF उपलब्धियों को ग्रामीण और शहरी श्रेणियों में अलग-अलग दर्शाया जाए।
  • औद्योगिक लकड़ी उत्पादन का विश्वसनीय अनुमान प्रस्तुत किया जाए ताकि लकड़ी आधारित उद्योगों के लाइसेंसिंग में उपयोग किया जा सके।
  • रिपोर्ट में कृषि वानिकी और शहरी वानिकी पर अलग अध्याय जोड़े जाएँ।
  • ज़िला स्तर पर वृक्ष आच्छादन डेटा प्रकाशित किया जाए।
  • NCAP के तहत 102 शहरों की हरित आच्छादन स्थिति का विश्लेषण जोड़ा जाए।
  1. 2. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC):
  • “हर मेड पर पेड़” अभियान का विस्तार किया जाए ताकि औद्योगिक लकड़ी उत्पादन और NTFP उत्पादन दोगुना किया जा सके।
  • “ग्रीनिंग द सिटीज़” कार्यक्रम शुरू किया जाए, जिसमें “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियानों को जोड़ा जा सके।
  1. राज्य सरकारें
  • व्यावसायिक वृक्ष फसलों के लिए उपयुक्त जिलों की पहचान करें।
  • पेड़-संसाधन-विहीन जिलों को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में शामिल करें।
  • बहुउद्देशीय वृक्षों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण विकास को बढ़ावा दें।
  • स्वाभाविक रूप से पाई जाने वाली प्रजातियों (जैसे जांड) के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ शुरू करें।
  • शहरी हरित क्षेत्रों के लिए वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया जाए।
  • दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों के सर्वाेत्तम मॉडल को अपनाया जाए।

निष्कर्ष

  • हरित क्षेत्र ग्रामीण और शहरी - दोनों पारिस्थितिक तंत्रों की पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ये किसानों की आय बढ़ाते हैं, आजीविका सृजित करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह जलवायु संतुलन, सौंदर्य और स्वास्थ्य में योगदान देते हैं।
  • TOF का समन्वित और दीर्घकालिक विकास वायु प्रदूषण में कमी, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, और रहने योग्य पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।’’शहरी और ग्रामीण हरितकरण’’ के प्रति एक ’’केन्द्रित, समन्वित और सतत प्रतिबद्धता’’ वायु प्रदूषण को कम करने, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनने और रहने योग्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
  • वनों के बाहर पेड़ों की क्षमता का दोहन और गैर-लकड़ी उत्पादों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से, भारत “विकसित भारत/2047” की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकता है।
  • “TOF (Tree Outside Forest)’’ की संभावनाओं का उपयोग करके और “NTFP (गैर-काष्ठ वन उत्पाद)’’ की मूल्य श्रृंखलाओं को सशक्त बनाकर, भारत ’’विकसित भारत/2047’’ की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।

आर्थिक योगदानों से परे, ’’TOF संसाधन’’ वैश्विक पारिस्थितिक चुनौतियों का सामना करने और ’’जलवायु लचीलापन (climate resilience)’’ को मजबूत करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

References 

  1. Dhiman, R. C., 2025: Pramaan to Parinaam, The Ply Reporter, August 2025
  2. FSI, 2000: Trees Outside Forest Resources in India, Forest Survey of India, Dehradun
  3. FSI, 2013: India State of Forest Report, 2013, Forest Survey of India, Dehradun
  4. FSI, 2023: India State of Forest Report, 2023. Forest Survey of India, Dehradun
  5. Sapra, 2025a: Trends and Dynamics of Agroforestry in India, Van Premi, August 2025, Hyderabad
  6. Sapra, 2025b: India’s Urban Green Cover: An Urgent Need for Expansion and Monitoring, Van Premi, September 2025, Hyderabad.

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