‘न्यू नार्मल‘ को स्वीकार करें
- मार्च 24, 2026
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छोटी लड़ाइयां सामरिक कुशलता से जीती जा सकती हैं, लेकिन लंबी लड़ाइयां आमतौर पर रसद और औद्योगिक क्षमता से जीती जाती हैं। ईरान युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अब इसकी जीत और हार इस बात पर टिकी हो सकती है कि दोनों पक्षों में से किसके पास किस तरह के शस्त्रों का भंडार बचा है तथा वैश्विक तेल और गैस के भंडार की क्या स्थिति है।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से हर सप्ताह विश्व की सालाना तेल और गैस आपूर्ति लगभग 0.5 फीसदी बाजार से बाहर हो जाता है। स्ट्रेट बंद होने के कारण सऊदी अरब, कुवैत और इराक की अधिकांश क्षमता भी ठप पड़ी है। ईरान के खर्ग द्वीप संयंत्र और दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र में अन्य ऊर्जा ढांचे (जो कतर के साथ साझा हैं) पर अमेरिकी इजरायली हमलों ने तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने की ईरान की क्षमता को भी कम कर दिया है।
ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण कतर को रास लाफान स्थित अपने विशाल गैस टर्मिनल को बंद करना पड़ा है। इसे इतना नुकसान पहुंचा है कि इसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं और 20 अरब डॉलर से अधिक का खर्च आ सकता है।
युद्ध समाप्त होने के बाद भी संयंत्रों की मरम्मत और उत्पादन को फिर से शुरू करने में कई महीने या साल लग जाएंगे। यूक्रेन युद्ध की भू-राजनीति और वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, अप्रभावित क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने में भी समय लग सकता है।
फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में बाब अल-मंडेब स्ट्रेट का वैकल्पिक मार्ग बनाने में भी कई साल लगेंगे और भारी लागत आएगी। बाब अल-मंडेब भी एक ऐसा ही अवरोध बिंदु है जहां हूतियों ने कई बार लाल सागर में यातायात बाधित किया है। हूतियों को इसे बंद करने से रोकने के लिए अमेरिका को 2025 में युद्धविराम समझौते पर सहमत होना पड़ा था।
यदि आपूर्ति में कमी जारी रहती है, तो ये भंडार भी किसी न किसी स्तर पर मांग के मुकाबले कम पड़ जाएंगे। अगर पर्याप्त आपूर्ति बहाल होने से पहले तेल और गैस का भंडार खत्म हो जाता है, तो हम मुश्किल में पड़ जाएंगे क्योंकि प्रत्येक आवश्यक वस्तु की भारी कमी ही जाएगी।
ऊर्जा की कीमतों पर सीधे प्रभाव के अलावा, तेल और गैस ही उर्वरक, और पेट्रोकेमिकल्स आधारित मेथानोल, फेनोल, मेलामाइन आदि रसायनो के लिए कच्चा माल है। इसका मतलब होगा भोजन की कमी और उसका अधिक महंगा होना, साथ ही पेट्रोकेमिकल्स से जुड़े क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना।
यह एक सुखद स्थिति नहीं है। निकट भविश्य में, जो भी परिस्थितियां बदलेंगी और जीवन या अर्थव्यस्था में बदलाव लाएंगी, उसे ही ‘न्यू नार्मल‘ मान लेना होगा।
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